साधन बाबू की मौत
[ गृहस्वामी की मृत्यु के बाद,संपत्ति के बटवारे को लेकर आज के परिवार में जो लड़ाई लड़ी जाती है, वह आज
साधन बाबू को उनके सपने में दिख गई।]
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साधन बाबू रात को छाती में एक गंभीर दर्द में अस्थिर हो गय। अतिशयोक्ति नहीं, उन्हें ऐसा लगा की दिल का एक टुकड़ा उनके गले में फंस गया है और वायुमार्ग को दबादिया है। साधन बाबू ने एक बार चिल्लाया और सोती हुई पत्नी को बगल वाले कमरे से बुलाने का प्रयास किया पर असफल रहे। उनके गले से कोई आवाज नहीं निकल रही थी ! साधन बाबु को पता चल रहा था की उनका समय समाप्त हो रहा है, लेकिन उनके पास कुछ भी करने की कोई शक्ति नहीं थी। आखिरकार वह धीरे-धीरे मृत्यु की गोद में समां गए !
सुबह पत्नी की जोरसे रोने पर मकान के आसपास रहने वाले अपने अपने घर से बाहर आ गए ! साधन बाबू की आँखे खुली हुई थी ! वह स्पष्ट रूप से पत्नी और पड़ोसियों को देख रहे थे और उनलोगो की बातचीत सुन पा रहे थे ! अब क्या करना है इस बारे चर्चे हो रही थी !एक ने कहा भाभीजी बैंक का चेकबुक और ए टी एम कार्ड सही जगह पर है न ? दादा किसी को बिना परेशां किये अचानक कैसे चले गए, आप भाग्यबती हैं महोदया ! एकबार सोचिए अगर दादा को नर्सिंग होम में डालते तो आज के ज़माने में कितना खर्च होता ?
दूसरे ने कहा यह कोई कहनेवाली बात है क्या,एक बार वहां गए तो पूरा चूस कर आदमी को छिबड़ा बना देते हैं ! मेरे छोटे साले की समधी को मरने के बाद सात दिन वेंटिलेटर में रखने का साढ़े तीन लाख का बिल बना दिया था ! जब की वह सातदिन शब्गृह के फ्रीजर में थे ! आपकी किस्मत अच्छी है लेकिन इस तरह,उनका अचानक चले जाना काफी दुखद है, शायद उनको आखरी समय में गंगा जल भी नहीं मिला होगा ! लेकिन आप निश्चित रूप से गया जाकर उनका पिंड दान कीजियेगा ! कोई जल्दी नहीं है, लेकिन उस अवसर पर राजगीर, नालंदा, बुद्ध गया भी एक बार देख लीजियेगा !
पत्नी ने कहा घूमने की बात छोड़िये, मेरी जो शारीरिक हालत है वह घूमने लायक नहीं है ! यदि आप लोग थोड़ी चाय पिएंगे तो मै पानी चढ़ा के आती हूँ ! हमें लड़के लड़की को खबर देने की व्यवस्था करनी है, मैं अकेले ही हूं " क्या क्या करू !
"हां, डॉक्टर को भी खबर करना होगा, मौत प्रमाण पत्र भी चाहिए शब् जलाने के लिए "।
साधनबाबू सभी बातें सुन पा रहे थे भले ही वह थोड़ा धुंधला हो, वह सब कुछ देख पा रहें है, लेकिन समस्या यह है कि वह अपनी मृत्यु हो जाने के कारण गर्दन नहीं हिला पा रहे थे। नतीजन, कुछ लोंगो को नहीं देख पा रहे थे !
लड़का-बहु, लड़की-दामाद, पोते-पोति सभी आए थे !साधन बाबू पोता- पोती को थोड़ा गले लगाकर प्यार करना चाहते है, लेकिन उनका हाथ पैर नहीं चल रहे है और अगर हाँथ पैर चलाया तो लोग डर जायेंगे ! बच्चो की इच्छा थी की अपने दादाजी के पास जाये लेकिन उन्हें यह अबसर नहीं मिला और उनको बगल के कमरे में भेज दिया गया !
लड़का और दामाद अंतिम संस्कार के बारे में चर्चा करने में व्यस्त थे। उनके शव को कैसे ले जाया जा सकता है, कैसे जलाया जा सकता है, बिजली-चूल्हा में या लकड़ी से आदि।
साधन बाबू कई बार सोचते थे कि उनके पिता की मृत्यु के बाद उनका शव जंहा अंतिम संस्कार किया गया था वही साधन बाबू का भी अंतिम संस्कार किया जाये ! लेकिन अब उनकी इच्छा-अनिच्छा का कोई मूल्य नहीं है,! शायद उसे स्थानीय मुक्ति धाम में जलाया जाये ! अब साधन बाबू को जलने के बारे में सोच कर डर लगने लगा ! एक बार जब उनके हाथों में गरम पानी गिर गया था तो बहुत जलन हुई थी !
यद्दपि साफ़ सुनाई नहीं दे रहा था फिर भी बगल वाले कमरे में गप्शप और ठहाके का दौर चल रहा था वंहा मौत का कोई गम किसी को नहीं था, कोई शोक नहीं था ! इधर इस कमरे में उनके बेटे और दामाद के अलावा कोई नहीं है। उन् लोंगो ने अलमारी खोली और सभी कागजात, बैंक और डाकघर का पासबुक, फिक्स्ड डिपॉजिट के सर्टिफिकेट्स को निकला। जो मिला उसके अलाबा कुछ और है की नहीं इस बारे में बिबाद भी हुआ ! असहमतियां शुरू हो गई हैं, बैंक लॉकर खोलने के समय माताजी के साथ कौन चलेगा इस बात को लेकर !
कुछ समय बाद,बेटी और बहु दोनों कमरा खाली देखकर अंदर आती है
! ऐसा लग रहा था की वे भी अलमारी खोलना चाहती हैं, लेकिन यह संभव नहीं है क्योंकि उन्हें कुंजी नहीं मिल पाई !बेटी की इच्छा है की उसके माता के गहने को समान समान दो भागों में बाँटा जाये ! चूंकि मां को अब गहने पहनने का अवसर नहीं है, इसलिए यह वांछनीय है कि बटवारा अब करना चाहिए।बहु को इस बात पर बहुत आपत्ति है, दो-भागो में साझा करने का कोई सवाल ही नहीं उठता है सास के सारे गहने बहु को मिलना चाहिए।"क्यों ननदजी, सुना है आपके पिताजी ने तो आपको पर्याप्त धन शादी के समय दे दी,है! क्या उससे आपका मन नहीं भरा जो अब आपको मेरे हक मेंसे भी हिस्सा चाहिए ?"
क्या बात कर रही हो भाभी ?"मैं खुश हूं, मेरे पिता ने मुझे क्या दिया ?बचपन से मैं उपेक्षित थी नहीं देखा, एक अच्छा खिलौना, अच्छे ड्रेस कभी भी लेकिन मेरे पिता की आय कुछ कम नहीं थी !मैंने पूरे जीवन में एक ही कहानी सुनी है, भविष्य, बचत, और सुरक्षा सुना है।हम भविष्य में अच्छे रहेंगे इस लिए बर्तमान को बर्बाद कर दूँ ? मन की इच्छा क्यू नहीं पूरी कंरू ?कब फिक्स्ड डिपाजिट मेच्योर
होगी उसके लिए इंतज़ार करूँ ? इन्सुरेंस का पैसा जीते जी नहीं मिलता ! खाली जिंदगीभर प्रीमियम भरते जाओ और सूखी रोटी
खाओ!मै अपनी मन की इच्छा क्यू न पूरी कंरू ? उस समय तुम कहा थी जब हम तकलीफ में जी रहे थे, बड़ी आई मुझे समझने मै क्या करू और क्या न करू
! आपके विवाह में, आपके पिताजी ने भी कई साड़ियां, गहने दीं है, इसलिए आप अपने पिता की संपत्ति का हिस्सा नहीं लेंगी । आप भी जीवित रहोगी , मैं भीजीवित रहूंगी , मैं देखूंगी कि आप क्या करती हो"
"और सुन बड़े बाप की बेटी, सास की दौलत पर बहु का कोई हक़ नहीं होता है ! ससुर के दौलत में बेटे का हक होता है ! अब हम भाई बहन जो तै करेंगे वह तुम्हे और तुम्हारे नन्दोई को मानना पड़ेगा,हम दोनों इस घर के बच्चे है तुम दोनों बाहर वाले हो! अभी तो मै तुम्हे समझा रही हूँ, समझ जाओ तो इसमें भलाई है तुम्हारी
ननद जी "अगर तुम्हारा भाई माके गहने लेता है और मुझे देता है तब क्या होगा? वह आपके भाई और आपके भतीजे की भलाई के लिए ही लेगा
! आपका भाई और भतीजा थोड़ा बेहतर जिंदगी जिए आप यह भी नहीं चाहती ? धन्य हैं आपका लालच की सीमा"
भौजी "मेरे पास क्या परिवार नहीं है, मेरे पति को थोड़ा बेहतर जिंदगी नहीं जीना चाहिए ? मेरी बेटी को एक अच्छे स्कूल में होना चाहिए की नहीं , आप क्या ऐसा चाहती हैं?"
भौजी "मेरे पास क्या परिवार नहीं है, मेरे पति को थोड़ा बेहतर जिंदगी नहीं जीना चाहिए ? मेरी बेटी को एक अच्छे स्कूल में होना चाहिए की नहीं , आप क्या ऐसा चाहती हैं?"
साधन बाबू सब सुन रहे थे और एक बार सोचा भी था कि एक वसीहत बनानी चाहिए। साधन बाबू यह भी सोचे की ननद-भौजाई को शांत किया जाये ! लेकिन इस बीच, पत्नी अंदर आई वह झगड़ा के पीछे के कारण जानकर खुद को कंट्रोल में नहीं रख सकी !
पत्नी चिल्लाई , पिताजी के पर्थिब शरीर का संस्कार नहीं हुआ है और तुम दोनों को दौलत हथियाने की पड़ी है और आपस में झगड़ रही हो ! क्या बात है तुम दोनों गहने और दौलत आपस में बाँट लो और मैं भिखारिन बन जाऊं यही चाहत है न तुम्हारे ? जीवन में कितनी इच्छाएं थीं मेरी ? "एक सुव्यवस्थित गराज सहित फ्लैट, एक सूंदर कार ! जिंदगी भर तुम्हारे पापा
ऑफिस ऑफिस खेलते रहें और मै जान देकर घर चलती रही अब मै एक सूंदर फ्लैट और गाड़ी खरीदूंगी और उसमे रहूंगी ! तेरे पिताजी परिवार परिवार करते करते मर गए, और उनका परिवार उनके मरने के साथ साथ दौलत बटोरने लग गए !मैंने अपनी पूरी जिंदगी गवां दी तुम्हे और तुम्हारे भाई को पालने में ! अब मै अपनी इच्छा पूरी करुँगी ! और यह जान लो यह माकन ज़मीन जायदाद फिक्स्ड डिपॉजिट्स सब मेरे नाम पर है ! जेबरात सब मेरे स्त्री धन है ! जब तक मै तुमलोंगो को दान नहीं करती सब मेरा है !
साधन बाबू के मुँह के ऊपर दो मक्खिया बैठ गई थी और खुजली पैदा कर रही थी ! उस तरफ किसीका भी ध्यान नहीं था
! पत्नी फटाफट बगल के कमरे में चली गई शायद अतिथियों के लिए चाय बनाने ! अतिथि भगवन होते हैं
! अचानक घंटी बजती है, शयद डाक्टर साहब आगय डेथ सर्टिफिकेट बनाने के लिए !
यह रहा तुम्हारा चाय ! साधन बाबू का नींद टूट गया !पत्नी ने चाय का कप रक्खा और दरवाजा खोलने
गई!और घर में काम करने वाली बाई का आगमन हुआ !
Dr Pradeep Kumar Maitra, 20/10/17
Dr Pradeep Kumar Maitra, 20/10/17

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