Thursday, December 17, 2020

 এ মিডসামার নাইটস ড্রিম ! এক মধ্য গ্রীষ্মের রাত্রির স্বপ্ন ! (পরী কাহিনী)


ড; প্রদীপ কুমার মৈত্র ১৭/১২/২০
এ মিডসামার নাইট'স  ড্রিম উইলিয়াম শেকসপিয়র (ব্যা ২৬ এপ্রিল, ১৫৬৪; মৃত্যু ২৩ এপ্রিল, ১৬১৬) লিখিত একটি কমেডি। মনে করা হয়, এটি ১৫৯০ থেকে ১৫৯৬ সালের মধ্যবর্তী কোনো এক সময় লিখিত হয়। এথেন্সের ডিউক থিসিয়াস ও আমাজনদের রানি হিপ্পোলিটার বিবাহের পারিপার্শ্বিক ঘটনা অবলম্বনে এই নাটক রচিত। নাটকে দুই প্রণয়ীযুগল ও একদল শখের অভিনেতার অ্যাডভেঞ্চার প্রদর্শিত হয়েছে। "পরী "রা কীভাবে এদের চালনা করে, তা-ই নাটকের মূল উপজীব্য। এটি শেকসপিয়রের অন্যতম জনপ্রিয় নাটক ও সারা বিশ্বে অভিনীত।

চরিত্র

১]এথেনীয় চরিত্র:
থিসিয়াস--এথেন্সের রাজা হিপ্পোলিটা-- আমাজনদের রানি ও থিসিয়াসের বাগদত্তা ইজিয়াস-- হার্মিয়ার বাবা, তিনি জোর করে ডিমেট্রিয়াসের সঙ্গে হার্মিয়ার বিয়ে দিতে চান লাইস্যান্ডার-- নাটকের সময়ভেদে হার্মিয়া অথবা হেলেনার প্রেমিক হেলেনা--ডিমেট্রিয়াসের প্রেমিকা ডিমেট্রিয়াস-- নাটকের সময়ভেদে হার্মিয়া অথবা হেলেনার প্রেমিক হার্মিয়া-- লাইস্যান্ডারের প্রেমিকা ফিলোস্ট্রেট-- রাজার বিনোদন সভাসদ ২]অলৌকিক চরিত্র:
ওবেরন-- পরীদের রাজা টাইটানিয়া-পরীদের রানি পাক রবিন গুডফেলো--ওবেরনের পরিচারক টাইটানিয়ার পরী পরিচারিকাবৃন্দ (বটমের মনোরঞ্জনকারিণী): পিসব্লসম--পরী, কবওয়েব--পরী, মথ--পরী, মাস্টার্ডসিড--পরী, ৩]অভিনেতার দল
(দ্য মেকানিক্যালস নামেও পরিচিত): পিটার কুইন্স--ছুতোর, দলের সর্দার নিক বটম, তাঁতি; তিনি দলের প্রযোজনা পিরামিস ও থিসবি-- নাটকে পিরামিসের ভূমিকায় অভিনয় করেন ফ্রান্সিস ফ্লুট, হাপর-সারাইকারী, থিসবির ভূমিকায় অভিনয় করেন রবিন স্টার্ভলিং, দরজি, মুনশাইন বা চন্দ্রালোকের ভূমিকায় অভিনয় করেন টম স্নট, কেটলি-মেরামতকারী, পাঁচিলের ভূমিকায় অভিনয় করেন স্নাগ, কাষ্ঠশিল্পী, সিংহের ভূমিকায় অভিনয় করেন

ম 







Communication of information 
संचार पारस्परिक रूप से समझे जाने वाले संकेतों, प्रतीकों और अर्ध-नियमों के उपयोग के माध्यम से एक इकाई या समूह से दूसरे तक पहुंचने को कहते  है।
 কিভাবে মানুষের মস্তিষ্ককে  একটি কম্পিউটারের সাথে তুলনা করা যেতে পারে ?https://www.crucial.com/blog/technology/how-does-the-human-brain-compare-to-a-computer

 আমরা এমন এক পৃথিবীতে বাস করি যেখানে কম্পিউটারের ক্ষমতা মানুষের ক্ষমতা থেকে ছাড়িয়ে যেতে পারে যেমন দাবা, গো (গেম) খেলার মধ্যে আমরা দেখতে পাই !এমনকি সম্ভাব্য কৃত্রিম বুদ্ধিমত্তা (এ আই) এবং মেশিন লার্নিং (এম এল) সারাক্ষণ বিরাট সাফল্য-অর্জন করছে, আমরা ভাবছি যে আমরা শীঘ্রই কোনও প্রযুক্তিগত ইউটোপিয়ায় (কল্পরাজ্যে) বাস করব বা বেঁচে থাকার জন্য লড়াই করবো একজন সাইবার্গ আর্নল্ড এর মতন পালোয়ানের বিরুদ্ধে ! কিন্তু কম্পিউটারগুলি কি মানুষের মস্তিস্ককে সামগ্রিকভাবে ছাড়িয়ে যেতে পারে ? আমরা কম্পিউটারকে অ-পেশাদার ব্যবহারের জন্য ব্যক্তিগত ডেস্কটপ হিসাবে সংজ্ঞায়িত করি (অর্থাত্ 24/7 চলমান একটি সার্ভার নয়কি)।এবং বিষয়গুলি সহজ রাখতে, আমরা তুলনা করতে পারি চারটি সীমাবদ্ধ ক্ষেত্রে:

ভাণ্ডাৰণ স্টোরেজ প্রসেসিং গতি স্মৃতি শক্তিদক্ষতা

স্টোরেজ-কম্পিউটার ডেটা স্টোরেজ এমন একটি প্রযুক্তি যা কম্পিউটার উপাদান এবং রেকর্ডিং মিডিয়া সমন্বিত যা ডিজিটাল ডেটা ধরে রাখতে ব্যবহৃত হয়। এটি কম্পিউটারের একটি মূল ফাংশন এবং মৌলিক উপাদান !প্রতিদিন ব্যবহারের জন্য, বেশিরভাগ কম্পিউটার ব্যবহারকারী 500 জিবি স্টোর করতে পারেন। ক্রিয়েটিভ-টেকনোলোজিস্টরা, দাবা-খেলোয়াড়রা (বা গেমারস) এবং অন্যান্য ভারী-ডেটা ব্যবহারকারীরা প্রায়শই ক্লাউড-কম্পিউটিং এর  উপর অথবা  কোনও পোর্টেবল সলিড-স্টেট ড্রাইভে  (SSD)  অতিরিক্ত স্টোরেজ ক্ষমতার ওপর  নির্ভর করে থাকে । তর্কের খাতিরে, আমরা কম্পিউটারকে গড়ে 1TB স্টোরেজ স্পেস যুক্ত বলে ধরে নিতে পারি ।মস্তিষ্কের ভাণ্ডারন ক্ষমতা কতটা ? আমাদের ব্রেন কতটা ভাণ্ডারন (স্টোর) করতে পারে? ঠিক আছে, এটি জটিল।আমাদের মস্তিষ্কে নিউরন বা স্নায়ু কোষ আছে  একটি বৈদ্যুতিক উত্তেজক কোষ যা সিগন্যাল সঞ্চার করতে স্বক্ষম !সাধারণ মস্তিষ্কে কতগুলি স্নায়ু কোষ বা নিউরন রয়েছে তার অনুমানের পরিমাণ পৃথক পৃথক বা ভিন্ন ভিন্ন । অনেক গবেষণকরা মনে করেন নিউরণের সংখ্যা  100 বিলিয়নের উপর নির্ভর করে, আবার  স্ট্যানফোর্ড বিশ্ববিদ্যালয়ের একটি গবেষণা অনুমান করে যে মস্তিষ্কে আসলে 200 বিলিয়ন নিউরন রয়েছে।

You might be thinking, “Wait, the computer has bytes and the brain has neurons. How do we compare the two?”

One marked difference between the human brain and computer flash memory is the ability of neurons to combine with one another to assist with the creation and storage of memories. Each neuron has roughly a thousand connections to other neurons. With over a trillion connections in an average human brain, this overlap effect creates an exponentially larger storage capacity.

Based on our understanding of neurons today, which is very limited, we would estimate the brain’s storage capacity at 1 petabyte, which would be the equivalent of over a thousand 1TB SSDs.



भय

दोस्तों नमस्कार, मेरे सभी सहकर्मी मित्र लोग जानते थे और जानते हैं की मैं भूत प्रेत से डरता नहीं हूँ ! क्यू की मैं जनता हूँ कि डर एक नकारात्मक भावना है। डर संभावित खतरे के लिए एक सहज वृत्ति प्रतिक्रिया के रूप में पूर्व क्रमादेशित एक अनुमान है। यह भावना हमेशा परिस्थिति के अनुकूल नहीं होता है। यह कई रूपों में प्रकट होता है। हर मनुष्य का जीवन डर से जीत के लिए एक संघर्ष करता रहता है। डर के विपरीत, निडरता एक मन की जागरूकता है। डर के सबसे शक्तिशाली जनक है मन में मृत्यु की अवधारणा। डर हम सब एक ही तरह से महसूस करते हैं। यह अनुभूति बाल्यकाल में सबसे पहले जागृत किया जाता है। ज्यादातर लोगों को डर एक अप्रिय भावना लगती है। खतरे की उपस्थिति या निकटस्थता की वजह से एक बहुत अप्रिय भावना को डर केहते हैं। भय, मानव प्रजाति द्वारा अनुभव किया जाता है, यह एक पूरी तरह से अपरिहार्य भावना है। मैं ऐसी एक घटना आप लोंगो को सुनाता हूँ-
BALCO के शुरुआती दौर में, R & C लैब जो श्री बिमलेन्दु रॉय साहब के देख रेख में वनी थी एक तिमंजिला बिल्डिंग था, जिसमे लोहे की खिड़की दरवाजे थे ! एक लिफ्ट का प्राभधान तो था किन्तु उसे ब्लॉक कर रखा गया था और सब लोग सीढ़ी से ही ऊपर निचे आते जाते थे !उस समय हमारे सभी स्टाफ लोकल स्नातक थे जिन्हे नौकरी के बारे में कोई अनुभब नहीं था ! RCL प्रमुख डॉ दत्ता थे ! पहले तो सभी स्टाफ जनरल शिफ्ट में आते थे और लैब में ट्रेनिंग लेते थे !कुछ दिनों के उपरान्त हमारे प्रभुख ने कहा हमें सारे स्टाफ को काम के अलावा बिभिन्न शिफ्ट में काम करना, रात जागना और अकेले सून सान बिल्डिंग के तिमंजीले में रात ब्यतीत करना सीखना होगा ! उन्होंने अफसर लोंगो से कहा आप लोग चुपके चुपके आकर देंखेगे यह लड़के अकेले रात बिताने में सक्छम है की नहीं ! अतः लड़कियों को छोड़कर सभी लड़को को तीनो शिफ्टों में बाँट दिया गया ! और तीसरे मंज़िल में प्रयोगशाला का काम चालू हुआ ! हम लोंगो ने surprise चेकिंग में पाया की रात के समय,
लड़के सब ग्राउंड फ्लोर उतर आते थे ! समीक्षा करने पर पता चला की तिमंजिले में भूत का निवास है ! और यह भी पता चला की इस बिल्डिंग में किसी श्रमिक का देहांत हुआ था वेल्डिंग मशीन के करंट लगने से ! और वह तिमंजिले में रहता है और वह रात को बच्चे की आवाज़ में रोता है, कभी कभी दरवाज़ा खिड़की की खुलने और बंद होने की आवाज़ आती है ! डाक्टर दत्ता बोले यह सब फालतू बाते हैं हम लोग सब यहीँ रहेंगे अगर रात को बच्चा नहीं रोया तो झूठा भ्रम फ़ैलाने के लिए दण्डित किया जायेगा ! उस रात हमलोंगो ने देखा रात को ख़ामोशी छा जाती है तब हलकी सी आवाज़ आती है जिसे एक बच्चे की रोने की तरह माना जा सकता है ! अतः हम आवाज़ की उत्पत्ति कहाँ से हो रही जानने के लिए हर कमरे का दरवाज़ा खोलना शुरू किया और अंत में एक कमरा मिला जिसको खोलने से आवाज़ का उत्स का पता चला ! उस कमरे की कुछेक लोहे की खिड़किया खुली हुई थी और हवा से वह खुलती और बंद हो रही थी जिससे एक बच्चे के रोने के सामान आवाज़ निकल रही थी ! इसके बाद भूत का भय लैब से गायब हो चूका था !और तीसरे मंज़िल में भी काम सब ठीक ठाक चल रहा था, इसी बीच तीसरी मंज़िल में फिर भूत का प्रकोप दिखाई दिया ! लड़को का कहना था की तीसरी मंज़िल में बहुत सारे भूत दौड़ते हुए आते हैं और गायब हो जाते हैं ! डाक्टर साहब यह सब बाते सुनकर कर बोले रात को तीसरी मंज़िल में एक सिक्योरिटी गार्ड को लगा दिया ! गार्ड बिचारा शिफ्ट इंचार्ज के सामने बैठा रहता था ! एकदिन उसने दौड़ते हुए भूत को देखा और भूत भूत चिल्लाते हुए सीढ़ियों को अनियंत्रित होकर लांघते हुए उतारते उतारते गिर पड़ा और दादारे /माइरे कहते हुए बेहोश हो गया ! गार्ड को हॉस्पिटल पहुंचाया गया !लैब के सबलोग परेशान हो गए थे की कैसे तीसरी मंज़िल में ड्यूटी करे ? डाक्टर साहब ने हमसे कहा की मैं कोई कहानी सुनने के लिए तैयार नहीं हूँ ! एक दिन के अंदर भूत की कहानी समाप्त करो नहीं तो अनुशाशणात्मक कारबाई की जायगी ! मरता क्या न करता, मैं रात के शिफ्ट में आकर शिफ्ट रूम में बैठ गया ! जाड़े का महीना था कमरे में हीटर चल रहा था लड़कोने कहा सर दरवाज़ा बंद कर देते हैं मैंने कहा नहीं अगर दरवाज़ा बंद कर डोज तो मैं भूत को पकडूँगा कैसे ? वह लोग दर रहेथे देख कर मैं ने दरवाज़ा बंद करने की अनुमति दे दी और मैं कमरे के बहार आकर गलियारेमें चहल कदमी करने लगा तब मैंने देखा की गलियारे में रौशनी की बिलकुल कमी है ! मैंने बरांडे की सब स्विच दबाया लेकिन कोई भी बत्ती नहीं जली ! फिर मैं गलियारे के अत्रिम छोर जा पहुंचा और देखा दीवार काटकर हवा और रौशनी आने के लिए लम्बी लम्बी चैनल करीब ८ फिट लम्बा छै चैनल बना दिया गया था और उसके ऊपर थोड़ा गैप देकर एक एक फिट लम्बाई का छै चॅनेल बने हुए थे ! चॅनेल से मैंने बाहर के तरफ देखा, वहां से BALCO का गराज साफ दिखाई दे रहा था ! मैं ग्रिल यानि वेंटीलेटर के पास से हटकर शिफ्ट रूम के सामने आगया ! इसी वख्त मैंने देखा पांच छै साये भागते हुए मेरे तरफ आ रहे हैं , और देखते ही देखते गायब हो गए ! अब मुझे भूत का रहस्य समझ में आगया ! यह भागता हुआ परछाई उस चलती हुई जीप गाड़ी के हेड लाइट से निकली रौशनी वेंटिलेटर चॅनेल का परछाई था जो गलियारे के दीवाल पर दौड़ती हुई प्रतीत होती थी ! परछाई दो हिस्से में थी चॅनेल का ऊपरी हिस्सा मस्तक और निचे का हिस्सा शरीर का आभास देता था !जब कोई जीप गाड़ी गराज में घुसती थी तो उसका हेड लाइट जलता रहता था और जब गाड़ी घुमाकर बंद करता था तब भूत भी गायब हो जाता था ! तत्पश्चात मैं लैब में घुसकर कागज पर गलियारे का प्रतिरूप कागज पर कैची से छिद्र बनाकर तैयार किया , फिर कमरे का लाइट बंद कर टोर्च की रौशनी कागज के पीछे से दीवाल पर प्रतिस्फलित होने दिया ! यह देखकर प्रशिक्षु लड़को को कुछ हद तक बात समझ में आई ! इसके बाद मैं गैराज जाकर जीप ड्राइवर को बताया जब मैं ऊपर से सिटी बजाऊंगा तब तुम गेट के अंदर घुसकर गाड़ी को खड़ी हालत में हेड लाइट को जलाना और जब मैं दूसरा सिटी बजाऊ तब गाडीको खूब धीरे धीरे चलाना ! इसके बाद गाड़ी गेट के बाहर ले जाना और जैसे तुमलोग रोज घुसते हो उसीतरह गाराज में घुसना ! सब लड़कोने इस प्रयोग को देखा और प्रफुल्लित हो गए ! उनके मन से भूत का आतंक ख़त्म हुआ इस प्रयोग से सभी प्रशिक्षु संतुष्ट होकर ड्यूटी करने लगे !

 सबसे पहले, मैं आपको बतलाना चाहता हूँ की यह एक कहानी नहीं है, इसलिए इसे  कहानी के रूप में सोचने की चेष्टा न करें।
चावल गया मस्तक का आभास देता था 
 मेरी मां यह बात कहती थीं !  कभी किसी का भोजन नहीं खा लेना चाहिए ! काश यह बात मै पहले सोचता ! मैं सभी बुजुर्गो के बारे में सोचता था।उन लोंगो के कथन में सब कुछ बेकार नहीं था । उनके द्वारा बताये  घटनाओ में  कुछ घटनाएं ऐसे भी हैं जो निर्णय से परे हैं, जिसे मैं आज कह रहा हूं। अपनी ही आँखों से देख कर तभी रहा हूँ।अगर कोई मर जाता है तो? मृत्यु के बाद, मृतआत्मा, उसका पसंदीदा भोजन चावल (भात) खाने के उद्देश्य से  अपने परिवार के पास आता है ! ऐसा उम्मीद की जाती है कि मृतआत्मा आकर वह खाना खा लेगा। एक दिन हम तीन दोस्त तालाब के किनारे बैठे बातें कर रहे थे। वहां किसी परिवार के सदस्यों ने अपने घर में मरने वाले किसी व्यक्ति के लिए तालाब के घाट के बगल में एक अंधेरी जगह में भात रख दिया था, जंहा हम तीन उस स्थान से थोड़ी दूर बैठे थे और बातें कर रहे थे !

हम कह रहे थे कि देखो उनलोगो ने कितना सारा खाना रख दिया है। जब यह चर्चा  चल रही थी, मृत ब्यक्ति का परिवार घाट से जा चूका था। अचानक मैंने देखा कि कुछ लड़के और एक लड़कि घाट में  गप्प मारने आए थे। ज्यादा शराब पीने से  वे सभी नशे में थे। लड़की ने कहा कोई भी अँधेरे स्थान पर रक्खे उस भोजन को खाने के लिए ललचा सकता है, और मई खाउंगी । लेकिन उनके दोस्तों ने यह कहते हुए रोकने की कोशिश की कि वो लोग खाना नहीं खाएंगे, यह खाना यहाँ किसी ने छोड़ दिया है कुत्तो बिल्लिओ के खाने के लिए । लेकिन लड़की ने कहा कि मैंने सुबह से खाना नहीं खाया है। यदि तुमलोग नहीं खाना चाहते, तो मेरे साथ रहो हम बाते  करते करते खाएंगे !  उसके दोस्तों ने भी मजबूर नहीं किया, और वह अपने दोस्तों के बगल में बैठ कर खाना खाती रही और बातचीत कर रही थी । हमने यह सब देखा  और फिर हम अपनी गप्पशप  में व्यस्त हो गए थे। हमने यह भी माना की बेरोजगारी  की समस्याए इतनी ज्यादा है की लोगबाग छोड़े हुए भोजन को भी खा रहे हैं ! देश का क्या होगा?हमने कहा  उन्हें उनके जैसा रहने दो, हम जैसे हैं वैसे ही रहते हैं।  हम मच्छरों के उपद्रव में भी तंग हो गए थे ।

অতিপ্রাকৃত Supernatural  গন্ধ বোধ   

 গন্ধ এক বা একাধিক Volatile উদ্বায়ী রাসায়নিক যৌগগুলির দ্বারা সৃষ্ট হয় যা সাধারণত কম মাত্রাতে পাওয়া যায় যা মানুষ এবং অন্যান্য প্রাণী তাদের অনুভূতি দ্বারা  গন্ধ উপলব্ধি করতে পারে  যা একটি আনন্দদায়ক যেমন ফুলের গন্ধ , বা অপ্রীতিকর যেমন পচা মাংসের গন্ধ অথবা কোনো বিশিষ্ট বস্তুর যেমন বইয়ের গন্ধকে বোঝায়। নাসিকা বা নাক হল আমাদের ঘ্রাণেন্দ্রিয় । এই নাকের গহ্বরের শেষ প্রান্তে  অবস্থিত আছে ঘ্রাণ-ঝিল্লি [Olfactory epithelium] ঘ্রাণ ঝিল্লিতে অবস্থিত বাইপোলার স্নায়ু কোষ বা অলফ্যাক্টরি কোষ ঘ্রাণ গ্রাহক হিসেবে কাজ করে । • ঘ্রাণ [Smell] বহিরাগত কোনো রকম গন্ধ গ্যাসীয় মাধ্যমে নাসা-গহ্বরে প্রবেশ করলে নাসিকার অলফ্যাক্টরি অংশ থেকে নিঃসৃত গ্রন্থিরসে দ্রবীভূত হয়ে বাইপোলার স্নায়ুকোষগুলিকে উত্তেজিত করে । এই উদ্দীপনা তখন অলফ্যাক্টরি স্নায়ুর মাধ্যমে মস্তিষ্কের ঘ্রাণ কেন্দ্রে প্রেরিত হয়, ফলে আমরা গন্ধটিকে অনুভব করতে পারি ।গন্ধের তীব্রতা  নিম্নলিখিত  ভাগে ভক্ত করা যেতে পারে:! 0 - গন্ধ বিহীন,1 অতি দুর্বল গন্ধ, 2 দুর্বল;3 -স্পষ্ট, 4 - শক্তিশালী5 - খুব শক্তিশালী, 6 - অসহনীয় এই পদ্ধতিটি পরীক্ষাগারে প্রয়োগ করা হয়  অতিপ্রাকৃত গন্ধ বোধ হলো এক রকম অতিরিক্ত গন্ধ বোধ করতে পারার ক্ষমতা ! স্বাভাবিকভাবে যা সম্ভব তার চেয়ে অনেক বেশি।অতিপ্রাকৃত শব্দটা হলো সংজ্ঞার উপ-শক্তি, বর্ধিত গন্ধ বোধের  উন্নত সংস্করণ।  

 

 গন্ধ -  সমবেদনশীলতা সংবেদন যে ফলাফল যখন নাকের ঘ্রাণগ্রাহী রিসেপ্টরগুলি গ্যাসীয় আকারে নির্দিষ্ট রাসায়নিক দ্বারা উদ্দীপিত হয়; "তিনি গোলাপের গন্ধ পছন্দ করতেন"

সমগ্র ইতিহাস জুড়ে মানবজাতির সেই  ক্ষণস্থায়ী ephemeral গন্ধগুলিকে প্রাপ্ত করার চেষ্টা করেছে যা তার জগৎকে পরিতৃপ্ত করে। অনেকগুলি গন্ধ এখনও অপ্রাপ্ত, তবে অনেক কিছু গন্ধ বিভিন্ন প্রক্রিয়াটির বিকাশ এবং পরিপূর্ণতার মাধ্যমে একত্রিত হয়েছে। আজকের উচ্চ প্রযুক্তির, বৈজ্ঞানিক বিশ্বে আমাদের কল্পনা করা কঠিন যে অনেকগুলি পদ্ধতি এখনও ব্যবহারযোগ্য বলে মনে হয় রসায়নবিদদের চেয়ে রসায়নবিদদের থেকে বেশি ণী (ওরিস ধরুন, উদাহরণস্বরূপ, আইরিস রাইজোমের শিকড়, পাতা এবং ফুল থাকতে হবে) সর্বনিম্ন তিন বছর ধরে শুকানোর আগে মুছে ফেলা হয় যার ফলস্বরূপ শক্ত, জীবাশ্মযুক্ত দেখতে পাথর তৈরি হয় in এটি এখন ওরিস হিসাবে পরিচিত এবং এর কোনও সত্য গন্ধ নেই it ইতিহাস সিদ্ধান্ত নিয়েছে এটিকে অ্যালকোহলে রাখবে এবং সেখানে এটি দুই বছর রেখে দেওয়া হবে Theআরিস অ্যালকোহলে দ্রবীভূত হয়, হলুদ বর্ণ ধারণ করে এবং মাখনের মতো দেখতে লাগে যা একটি গরম চুলার কাছে খুব বেশি ফেলে রাখা হয়েছিল। এটি এখন ওরিস মাখন, বা বেয়ার হিসাবে পরিচিত is ডিরিস, এবং চর্বিযুক্ত গন্ধযুক্ত, এবং অস্পষ্টভাবে কিছুটা ভায়োলেট-জাতীয় — এটি লুকিয়ে থাকা সৌন্দর্যের প্রথম আসল ঝলক or অরিস মাখন তেলটি বের করার চূড়ান্ত চিকিত্সা করে যা যা সত্যই এর গোপন রহস্য প্রকাশ করে না এটি অট এর সাথে একত্রিত হলেই হয় এর উপাদানগুলি যা এর সহজাত নরম, বিলাসবহুল, গুঁড়ো যাদু নিজেই প্রকাশ করে। আজ, ওরিস প্রক্রিয়াজাতকরণের পদ্ধতিটি আসলেই পরিবর্তিত হয়নি এবং এর কারণে এটি অন্যতম ব্যয়বহুল উপাদান।

ওরিস  তেল, গুঁড়ো ,শেকড় ,Orris root (rhizoma iridis) is a term used for the roots of Iris germanica and Iris pallida. It had the common name of Queen Elizabeth Root The most valued component of orris root is oil of Orris (0.1–0.2%), a yellow-white mass containing myristic acid. Oil of Orris is sometimes sold as Orris Butter. Other components include fat, resin, starch, mucilage, bitter extractive, and a glucoside called iridin or irisin. it is now used mainly as a fixative and base fixative is used to equalize the vapor pressures, and thus the volatilities, of the raw materials in a perfume oil, as well as to increase the tenacity.

note - in perfumery; it is the most widely used fixative for potpourri  Orris is also an ingredient in many brands of gin.Potpourri   is a mixture of dried, naturally fragrant plant materials, used to provide a gentle natural scent, commonly in residential settings. It is often placed in a decorative bowl.

 









Wednesday, October 14, 2020

প্রাচীন পৃথিবীতে ভূত

 প্রাচীন পৃথিবীতে ভূত
প্রাচীন বিশ্বের মানুষের মনে  কোনও সন্দেহ ছিলোনা, যে কোনও মানুষের শারীরিক মৃত্যুর পশ্চাতে  আত্মা বেঁচে থাকে।এই বিষয়টিতে কোনও ব্যক্তির ব্যক্তিগত মতামত যাই থাকুক না কেন, সাংস্কৃতিকভাবে এগুলি বোঝার সাথে সাথেই তাদের মনে উত্থাপিত হয়েছিল যে মৃতের আত্মা দেহ পরিত্যাগ করার পর অন্যরকমভাবে এই পৃথিবীতে বাস করে যার জন্য তাদের এখনও একধরনের ভরণপোষণের প্রয়োজন থাকে, পরের জীবনের অস্তিত্ত যা বেশিরভাগ কোন না কোনো কারণ দ্বারা নির্ধারিত হতো : যেমন জীবিত অবস্থাতে তারা তাদের জীবন ধারণ করেছিল, কীভাবে তাদের মৃত্যুর পরে তাদের দেহাবশেষর নিষ্পত্তি করা হয়েছিল এবং / অথবা কীভাবে জীবন্তদের দ্বারা তাদের স্মরণ করা হয়। বিভিন্ন সংস্কৃতিতে পরকালীন জীবনের বিবরণ পৃথক, তবে স্থির ছিল যে এই অবস্থাটির অস্তিত্ব ছিল এবং এটি অপরিবর্তনীয় আইন দ্বারা পরিচালিত হত, এবং মৃতদের আত্মারা সেখানে থাকত দেবতাদের অনুমতি না পাওয়া পর্যন্ত, তৎপশ্চাৎ হয় তবে তারা তাদের নিজের জন্ম স্থানে ফিরে আসতো এবং কিছু নির্দিষ্ট কারণে বাস করতো ।

এই কারণগুলির মধ্যে অন্তর্ভুক্ত হতে পারে অনুপযুক্ত বা অসম্পূর্ণ আনুষ্ঠানিকতা, কোনও ধরণের অভাব মৃত শরীরের শেষকৃত্য সম্পাদনা না করার, যেমন লাশ উদ্ধার হয়নি সেখানে ডুবে মারা যাওয়া, খুন যেখানে দেহটি কখনও পাওয়া যায়নি (এবং তাই সঠিকভাবে শেষকৃত্য করা হয়নি), বা কিছু অসম্পূর্ণ কাজ সমাধান করতে বা একটি নির্ধারিত সরবরাহ অন্তর্ভুক্ত থাকতে পারে যখন একজনকে খুন করা হয়েছিল এবং কারও মৃত্যুর প্রতিশোধ নেওয়া হয়েছিল এবং শান্তিতে বিশ্রামের জন্য খুনি বিচারকের বিচারে হাজির হওয়ার প্রয়োজন ছিল।

বিদেহী ভূতের চেহারা এমনকি প্রিয়জনদের মতন খুব কমই অভিজ্ঞতা হিসাবে বিবেচিত হত। আত্মাদের তাদের নিজস্ব এলাকাতে থাকার কথা এবং তাদের জীবন্ত জগতে ফেরার কোনো আশা করা যায়না। যখন এই জাতীয় ঘটনা ঘটে তখন এটি নিশ্চিত লক্ষণ যে কিছু ভয়াবহভাবে ভুল ঘটনা ঘটে ছিল এবং যারা আধ্যাত্মিক লড়াইয়ের মুখোমুখি হয়েছিল তারা ভূতকে তার সঠিক জায়গায় ফিরে আসার জন্য সমস্যার সমাধান যত্ন নিয়ে করবে বলে আশা করা হয়েছিল। এই বোঝাপড়াটি এতটাই প্রচলিত ছিল যে মেসোপটেমিয়া, মিশর, গ্রীস, রোম, চীন এবং ভারতের প্রাচীন সংস্কৃতিগুলির পাশাপাশি মেসোয়ামেরিকা এবং আয়ারল্যান্ড এবং স্কটল্যান্ডের সেল্টিক ভূখণ্ডগুলিতে খুব অনুরূপ থিম সহ ভুতের গল্পগুলি দেখতে পাওয়া যায়। বাইবেলে ভূতদের প্রকরণেও ঠিক একইভাবে চিত্রিত করা হয়েছিল যেমনটি তারা আগের রোমান রচনায় ছিল। নিম্নলিখিত কোনওভাবেই বিষয়টির একটি বৃহত চিকিত্সা নয়। উল্লিখিত প্রতিটি সংস্কৃতিতে ভূতের বিশ্বাস সম্পর্কে অনেক বই রচিত হয়েছে এবং অনেকগুলি যেগুলি নেই। এই নিবন্ধটির উদ্দেশ্য কেবলমাত্র পাঠকদের পরকালের মূল ধারণাগুলি এবং প্রাচীন বিশ্বের ভূতে বিশ্বাসের সাথে সরবরাহ করা।

আধুনিক যুগের সংস্কৃতি এবং সভ্যতার লক্ষ লক্ষ বছর মানব বিবর্তনের পরে উদ্ভূত আদি সভ্যতার কাছে প্রচুর ঋণী । এই নিয়ে, নিম্নে কয়েকটি সভ্যতার নাম হলো ::মেসোপটেমিয়ান সভ্যতা সময়কাল: 3500 বিসি – 500 বিসি, সিন্ধু সভ্যতা সময়কাল: 3300 বিসি – 1900 বিসি, মিশরীয় সভ্যতা সময়কাল: 3150 বিসি – 30 বিসি, মায়া সভ্যতা সময়কাল: 2600 বিসি – 900 খ্রিস্টাব্দ, চীনা সভ্যতা সময়কাল: 1600 বিসি – 1046 বিসি, গ্রীক সভ্যতা সময়কাল: 2700 বিসি – 479 বিসি, পারস্যে  সভ্যতা সময়কাল: 550 বিসি – 331 বিসি, রোমান সভ্যতা সময়কাল: 550 বিসি – 465 খ্রিস্টাব্দ, অ্যাজটেক সভ্যতা সময়কাল: 1345 এডি – 1521 এডি, ইনক্যান সভ্যতা সময়কাল: 1438 AD – 1532  এডি মেসোপটেমিয়ায় ভূত  মেসোপটেমিয়ান সংস্কৃতিতে মৃত্যুই জীবনের চূড়ান্ত অবস্থা ছিল যা থেকে কোনও প্রত্যাবর্তনেই কোনো সম্ভাবনা ছিলোনা । মৃতদের দেশ অনেক নামে পরিচিত ছিল; এর মধ্যে ইরাকলা Irkalla ছিল, পৃথিবীর নীচে এমন এক রাজ্য যেখান থেকে কারো "প্রত্যাবর্তনের দেশ নয়""land of no return" নামে পরিচিত, যেখানে মৃতদের আত্মারা শান্ত অন্ধকারে বাস করত, সেখানে তারা মাটি-কাদা আবৃত থাকে এবং মাটির ভাঁড়ে থেকে চুমুক দিযে তরল বস্তু পান করে ! (যদিও পরবর্তীকালের অন্যান্য দর্শন ছিল যেমন কাজের মধ্যে প্রকাশিত গিলগামেশ, এনকিডু এবং নেদারল্যান্ডস)। এই অস্তিত্বটি সমস্ত জীবনযাত্রার চূড়ান্ত পরিণতি ছিল, তারা কতই না দুর্দান্ত বা দরিদ্র জীবন যাপন করুক না কেন, এবং এটি অন্ধকার রানী Ereshkigal ইরেশকিগালের দ্বারা শাসিত ছিল। কোনও আত্মাকে কোনও কারণে ইঙ্কাল্লা ছাড়ার অনুমতি দেওয়া হয়নি, এমনকি কোনও দেবীও নয়, দ্য অব ডিসেন্ট অব ইন্না কবিতায় উদাহরণ হিসাবে বলা হয়েছে, এমনকি স্বর্গের রানী (এবং ইরেশকিগালের বোন), ইন্নাকে অবশ্যই একবার তার জায়গা নেওয়ার বিকল্প খুঁজে পেতে হবে? তিনি জীবন্ত বিশ্বের ফিরে যান। তবে বিশেষ আত্মা দেওয়া হয়েছিল এমন এক আত্মাকে যাদের একরকম মিশন শেষ করা দরকার। ভূতরা পৃথিবীতে মানুষের কাছে উপস্থিত হতে পারে যদি মনে করা হত যে তাদের কোনওরকম ভুলকে সংশোধন করা দরকার।https://www.ancient.eu/ghost/

ইরেশকিগাল Ereshkigal (Sumerian: DEREŠ.KI.GAL. "Queen of the Great Earth") ছিলেন কুরের দেবী, সুমেরীয় পুরাণে পাতালদের দেশ।পরবর্তী পূর্ব সেমিটিক পুরাণে, তিনি তাঁর স্বামী নেড়গালের সাথে ইরকাল্লাকে শাসন করার কথা বলেছিলেন। কখনও কখনও তার নাম ইরকাল্লা হিসাবে দেওয়া হয়, গ্রীক পৌরাণিক কাহিনী অনুসারে পাতাল ও তার শাসক উভয়ের জন্য হেডেস নামটি ব্যবহৃত হয়েছিল, এবং কখনও কখনও এটি নিমকিগল নামেও দেওয়া হয় "গ্রেড আর্থের লেডি বলে "।সুমেরীয় পুরাণে, ইরেশকিগালই একমাত্র ব্যক্তি যিনি রায় দিতে এবং তাঁর রাজ্যে আইন দিতে পারেন। তাঁর উত্সর্গীকৃত প্রধান মন্দিরটি Kutha কুঠা য় অবস্থিত। প্রাচীন সুমেরীয় কবিতায় ইনানার ডেসেন্ট টু আন্ডারওয়ার্ল্ডে ইরেশকিগালকে ইনানার বড় বোন হিসাবে বর্ণনা করা হয়েছে।ইরেশকিগালের সাথে জড়িত দুটি মূলকথার কাহিনী হ'ল আন্ডারওয়ার্ল্ডের ইনান্নার উত্থানের গল্প এবং দেবতা Nergal নেড়গাল সাথে ইরেশকিগালের বিবাহের গল্প।

নেড়গাল নেরগাল, নির্গল, বা নির্গালি (সুমেরিয়ান: dKIŠ.UNU বা dGÌR-UNUG-GAL হিব্রু: আধুনিক: নেড়গাল, টাইবেরিয়ান: নরগল; লাতিন: নের্গেল) এমন এক দেবতা যা প্রাচীন মেসোপটেমিয়া জুড়ে উপাসনা করা হত (আক্কাদ, আশেরিয়া এবং ব্যাবিলোনিয়া) কুতাহে তাঁর পূজার প্রধান আসনটি টেল-ইব্রাহিমের byিবির প্রতিনিধিত্ব করে। তাঁর অন্যান্য নাম হলেন ইররা এবং ইররা।নেরগাল, টাইবেরিয়ান: নরল; আরামাইক: এমন এক দেবতা যা পুরাতন মেসোপটেমিয়া জুড়ে (আক্কাদ, আসিরিয়া এবং ব্যাবিলোনিয়া) পূজা হত কাথাহে তাঁর পূজার প্রধান আসনটি টেল-ইব্রাহিমের বি দ্বারা উপস্থাপিত। তাঁর অন্যান্য নাম হলেন ইররা এবং ইররা।

সুকোথ বেনোথ (হিব্রু, কন্যার বুথস) ছিলেন একজন ব্যাবিলনীয় দেবতা, ইস্রায়েলীয়রা অশূর দ্বারা কনান নির্বাসনের পরে ইস্রায়েলীয়দের দ্বারা পূর্বের সাম্রাজ্যের যে দেবতা আনা হয়েছিল (যেটিকে আশেরিয়ান সাম্রাজ্যও বলা হয়, তিনি ছিলেন মেসোপটেমিয়ার রাজ্য এবং সাম্রাজ্য)প্রাচীন নিকট পূর্ব এবং লেভ্যান্ট যা একটি রাজ্য হিসাবে বিদ্যমান ছিল)। প্রচুর সংখ্যক কনানের পুনর্বাসনের পরে (একটি সেমেটিক ভাষী সভ্যতা)

  "জনগণ" হালাহ, গোজনে, হাবর নদীর তীরে এবং মেডিসের শহরগুলিতে ", আশেরিয়ার রাজা ব্যাবিলন, কাটা, আভা, হামাত এবং সিফারওয়াইম থেকে লোকদের এনে কনান শহরে বসতি স্থাপন করেছিলেন।




মের্গা বিয়েন Merga Bien, (1560–1603) সালের শেষদিকে, ফুলদা শহরে, হেসেন রাজ্য, মধ্য জার্মানি) এক জার্মান মহিলা যাদুবিদ্যার জন্য দোষী সাব্যস্ত এবং সম্ভবত 1603-এ ফুলদা জাদুকরী বিচারের শিকার ব্যক্তিদের মধ্যে সবচেয়ে বিখ্যাত ছিলেন । বিয়েনের জন্ম ফুলদা শহরে। তিনি তিনবার বিবাহ করেছিল এবং তাঁর প্রথম দুই স্বামীর উত্তরাধিকারী ছিলেন, যা পরে অভিযোগে গুরুত্বপূর্ণ ভূমিকা পালন করেছিল। 1588 সালে, তিনি ব্লাসিয়াস বিয়েনকে বিয়ে করেছিলেন এবং শহর ছেড়ে চলে গিয়েছিলেন, কিন্তু স্বামীর কার্য ক্ষেত্রের নিযুক্তি কর্তাদের সাথে বিরোধের পরে ফিরে এসেছিলেন। এ সময়, প্রিন্স অ্যাবট বাল্টসার ভন ডার্নবাচ, যিনি দীর্ঘ নির্বাসনের পরে 1602 সালে ক্ষমতায় ফিরে এসেছিলেন, তিনি শহরে জাদুবিদ্যার তদন্তের নির্দেশ দিয়েছিলেন। 1605 খ্রিস্টাব্দে তাঁর মৃত্যুর আগ পর্যন্ত জাদুকরী বিচারে দুই শতাধিক ব্যক্তিকে জাদুকরী মৃত্যুদণ্ড কার্যকর করা হয়েছিল। 16003 সালের মার্চ মাসে তদন্তে নগরীতে প্রথম গ্রেপ্তারের ঘটনা ঘটে। 19 জুন, মের্গাকে গ্রেপ্তার করে কারাগারে রাখা হয়েছিল। তার স্বামী স্পিকারের রিখস্ক্যামার্সরিচের আগে প্রতিবাদ করেছিলেন এবং উল্লেখ করেছিলেন যে তিনি গর্ভবতী। কারাগারে, তাকে তার দ্বিতীয় স্বামী এবং তার সন্তানদের এবং তার স্বামীর চাকরি জীবীদের পরিবারের এক সদস্যের সাথে হত্যার স্বীকার করতে বাধ্য করা হয়েছিল এবং তিনি শয়তানের বিশ্রামবারে অংশ নিয়েছিলেন। তার গর্ভাবস্থা একটি উদ্বেগজনক পরিস্থিতি হিসাবে বিবেচিত হয়েছিল; চৌদ্দ বছর ধরে বিবাহিত হওয়া সত্ত্বেও তার এবং তার স্বামীর কোনও সন্তান ছিল না। তিনি স্বীকার করতে বাধ্য হন যে তার বর্তমান গর্ভাবস্থা শয়তানের সাথে সহবাসের ফলাফল। বাইনকে যাদুবিদ্যার জন্য দোষী সাব্যস্ত করা হয়েছিল এবং 1603 সালের শরত্কালে ফুলদার ঝুঁকিতে তাকে জীবন্ত পুড়িয়ে দেওয়া হয়েছিল।

घोँघा और गुलाब की कहानी यह एक विशाल और सुंदर बगीचा है। जिसमे अनगिनत फूल हैं। कहीं समूह में रजनीगंधा के खिले हुए फूलों की गंध है, तो कहीं पर गुलदाउदी की झाड़ी है, कहीं पर रात की रानी की झाड़ी है। बगीचे में कितने फूल खिलते हैं इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। वह गुलाब जो बगीचे के सभी सुंदर फूलों में सबसे सुंदर दिखता है, किउकी यह गहरे लाल रंग के साथ साथ अत्यंत सुगन्घित पुष्प जो साल भर खिलता रहता है और जो भी इसे देखता है वह आश्चर्यचकित हो जाता है।

 और इस गुलाब के पेड़ के ठीक नीचे एक विशाल घोंघा snail रहता है। उसके मोटे शरीर के ऊपर खोल है - उसके खोल के अंदर उसका मोटा शरीर है। एक सुबह घोंघा अपने खोल से हाय करने के लिए बहार निकला। उसने गुलाब के पेड़ को सुप्रभात कहा- और पूंछा क्या कर रहे हो गुलाब भाई? क्या आप जल्दी में हैं ? काम नहीं तो लगातार फूल खिलाये जा रहे हो क्योंकि और तो कुछ करना आता नहीं है? मै इस धरती में नजाने कितने काम किये हैं यदि आप भी अच्छा काम करना चाहते हैं - तो मेरी तरह धीरे-धीरे काम करना सीखें!क्या आप कभी उतना काम कर पाएंगे, जितना मैं धरती पर करता हूं? गुलाब के पेड़ ने अपना सिर झुका कर घोंघे को प्रति नमस्कार किया और घोंघा से कहा - आप कितने बुजुर्ग है, आप कितना काम जानते हैं! हम आपसे ऐसे काम की उम्मीद करते हैं। अब बड़ा काम कब करोगे गुलाब ने पूंछा ?

घोंघे ने इस प्रश्न से हक्का बक्का रह गया और झेंपकर कहा कब- कब होगा, इतना सोचने की क्या जरूरत है? आप अपनी जल्दबाजी के कारण कोई बड़ा काम नहीं कर सकते हैं! जैसा कि आपने कहा, यह कहते हुए घोंघे अपने कठोर काले खोल में घुस गया । वह पूरे सालभर कोई काम नहीं किया, बस गुलाब के पेड़ के नीचे सोता रह गया। नया साल आ गया। नए साल की सुबह, घोंघा फिर से बाहर आ गया, अपने काले रंग के खोल से अपने हाथः को उठाते हुए, गुलाब के पेड़ को बुलाकर पूछा, "यह क्या, हे गुलाब?" मैं कहता हूं कि आप दिन प्रतिदिन सयाने होते जा रहे हैं! पूरे साल आप फूल खिलाते रहे और आपके पास जितनी शक्ति थी, आप उसे समाप्त कर दिए हो, लेकिन फायदा क्या मिला तुम्हे ? मुझे देखो, देखो- मैंने एक साल तक सोने से खुद को कितना बेहतर और कितना उर्जा संचय किया है? आपकी तरह, मैं अपनी ऊर्जा बर्बाद नहीं कर रहा हूं। देखो, मैं अपने अंदर ऊर्जा जमा रहा हूं। घोंघा फिर आह भरते हुए कहता है - अच्छा, तुम इतनी सालो से फूल खिला रहे हो, लेकिन क्या तुमने कभी सोचा है कि तुम क्यों फूल खिला रहे हो, या इसके खिलने का क्या मतलब है? और क्या होगा अगर फूल खिलते हैं या नहीं खिलते हैं ? घोंघे से इतने सारे सवालों के सामने, गुलाब का पेड़ सकपका गया ! गुलाब के पेड़ ने कहा- नहीं, मैंने ऐसा कभी नहीं सोचा है ? मुझे फूल खिलना पसंद है, मैं फूल बगैर खिलाये नहीं रख सकता - इसलिए मैं फूल खिलाता रहता हूँ । मेरे ऊपर सूरज अपनी रोशनी फैलाता है और मेरी नसें में ऊर्जा बनता है। दक्षिण की हवा मेरे ठंडे शरीर को पत्तों को सहलाती है और लहराती है, सुबह का ओस मेरे चेहरे को धोता है और बारिश का शीतल जल मेरे शरीर को धोता है! मेरी पंखुड़ियां खुशी से कांपती हैं, यह सब मैं खुद नहीं कर सकता - नीले आकाश के नीचे मैं सूरज की तेज रोशनी से भर जाता हूं। मैं देख रहा हूँ कि आपका जीवन बहुत मज़ेदार है - घोंघे ने कटाक्ष कर कहा ! बेशक, यह झूठ नहीं है ! गुलाब ने कहा - लेकिन आपका जीवन भी कम सुंदर नहीं है! मैं आपकी तरह दुनिया के लिए इतना सारा काम कर नहीं सकता हूँ , बताइये इससे ज्यादा मै और क्या कर सकता हूं - गुलाब विनम्रता से कहता है। घोंघा भौ सिक़ोड कर कहा ! गुलाब मुझे बताओ, क्यू मैं दुनिया को लाभान्वित करूंगा? मुर्ख की तरह बात करते हो - सुनते ही हंसी आती है ! सबसे बडा काम अपने लाभ के लिए करना, अपने आप को खुश करना है - यह हमेशा याद रखें। तुम्हारी तरह फूल खिला खिलाकर और अंत में सूखकर बेजान होजाने की क्या कीमत है ? इसमें क्या सुख है ? गुलाब के पेड़ को देखते हुए, घोंघे को गुस्सा आने लगा और वह आपने काळा खोल के अंदर घुस गया और सामने का दरवाजा बंद कर दिया और सो गया,

गुलाब ने आह भरते हुए कहा- मुझे घोंघे के द्वारा कहा गया सुझाब कुछ समझ में नहीं आ रहा है। बब्बा, वह किस तरह से खोल के अंदर घुस गया, उसके होने या न होने का कोई निशान तक नहीं है । हालाँकि, मैं अपने आप को उसकि तरह लपेट नहीं सकता! यह सच है कि मैं फूलों की गंध के साथ दिन-प्रतिदिन कमजोर होता जा रहा हूं - लेकिन जब छोटे छोटे बच्चे मेरे पास आकर खुश होते हैं और खुशी के साथ हाथों से ताली बजाते हैं,राहगीर रास्ते पर चलना बंद कर देते हैं - वे मुझे विस्मय में देखते हैं, तब मुझे बहुत ख़ुशी मिलती है ! इस ख़ुशी का मतलब क्या है यह घोंघे बेहतर समझेंगे?

लेकिन घोंघा गुलाब के पेड़ के इन शब्दों को नहीं सुन सका, क्योंकि वह खर्राटा  मरते हुए  सो रहा था। इस तरह कई साल बीत गए। कितने गुलाब खिले, सुगंध बिखेरते हुए, हर किसी के मन में खुशी जागृत करते हुए इसका कोई हिसाब नहीं है । फिर एक दिन गुलाब के पौधे की मौत हो गई। जब तक वह जीबित था - जब भी वह घोंघा से मिलता था - घोंघा कारीगरी, नेक काम और महानता पर व्याख्यान देता था, और अंत में वह थक जाता था और अपने खोल में वापस चला जाता था। गुलाब कभी नहीं समझ पाया, किसका जीवन सुंदर है - उसका या घोंघे का?

क्या आप बता सकते हैं- किसका? मूल कहानी: घोंघा और गुलाब का पेड़: हंस क्रिश्चियन एंडरसन Hans Christian Anderson is either a tale which confirms in your mind that the author had a jaundiced view of life, or it is a real metaphor for people's contrasting attitudes. Take your pick. There isn't much development to the story, so I'm not including spoiler tags.


The author describes a sullen and resentful snail, who is horrible to everybody, including a beautiful rose tree who is growing next to him. He does nothing, only says with a sneer,







































মেদুসা (Medusa) – গ্রীক মিথলজির এক ভয়ঙ্কর দানবী।গ্রীক পৌরাণিক কাহিনী অনুসারে, মেডুসা গর্গো নামেও পরিচিত ছিলেন, তিনি তিনটি রাক্ষসী গুলির মধ্যে একজন Gorgons ছিলেন, সাধারণত চুলের জায়গায় জীবন্ত বিষাক্ত সাপ নিয়ে ডানাওয়ালা মানবী হিসাবে পরিচিত। এটি রোমান কবি Ovid’sওভিডের রূপকথায় আছে যে তাঁর গল্পটি সবচেয়ে গভীরভাবে ব্যাখ্যা করা হয়েছে। তিনি কবিতা অনুসারে সুন্দর ছিলেন যতক্ষণ না Poseidon পোসেইডনের সাথে অ্যাথেনার মন্দিরে তার সম্পর্ক হয়েছিল। অতঃপর Athenaএথেনা মেদুসাকে অভিশাপ দিলেন, এই অপরাধের জন্য, মেদুসাকে পাথুরের -চকচকে প্রাণীতে পরিণত করে যা আমরা সবাই জানি। এছাড়া যারা মেদুসার চোখের দিকে তাকাবে তারাও পাথরে পরিণত হবে। বেশিরভাগ সূত্রগুলি মাদুসাকে,Phorcys and Ceto,ফোর্কিস এবং সিটোর কন্যা হিসাবে বর্ণনা করে, যদিও লেখক হাইগিনাস তাকে Gorgon এবং সিটোর মেয়ে হিসাবে বর্ণিত করেছেন ! তার মানে এই হলো যে মেদুসা গ্রীক মিথলজীর সবচেয়ে রূপসী এবং সবচেয়ে কুৎসিত ও ভয়ঙ্কর নারী।


















কাহিনী -অনেক অনেক আগে গ্রীসের এ্যাথেন্স শহরে বাস করতো এক অপরূপ রূপসী, যার নাম ছিল মেদুসা।
মেদুসা, সৌন্দর্যের দেবী, রূপের অপ্সরী মেদুসা। যে রাস্তা দিয়ে হেটে যেত, সেখানে পুরুষদের ভীড় জমে যেত। তার চোখ ছিল চাঁদের মতো উজ্জল, গায়ের রং ছিল যেন সোনা গলিয়ে বানানো। সবচেয়ে আকর্ষনীয় ছিল তার চুল। লম্বা, উজ্জল আর মসৃন।
নিজের রুপ নিয়ে প্রচন্ড অহংকার ছিল মেদুসার। আর এই অহংকারই হলো মেদুসার কাল।
কে এই মেদুসা ? মেদুসা ছিল (গ্রীক মিথলজির ক্যাথনিক মনস্টার)। তিন বোন স্থেনা এবং ইউরায়েল এবং মেদুসা। দুই বোন স্থেনা এবং ইউরায়েল ছিল অমর কিন্তু মেদুসা অমর ছিলনা।
মেদুসা সূর্য থেকে অনেক অনেক দূরে উত্তরে বাস করতো। সে কখনও সূর্য দেখেনি শুধু শুনেছিল সূর্যের কথা। একবার তার প্রচন্ড ইচ্ছা হলো সূর্যকে দেখার। তখন সে গডেস এথেনার কাছে দক্ষিনে যেয়ে সূর্য দেখার অনুমতি চাইল। কিন্তু এথেনা তাকে অনুমতি দিল না সূর্য দেখার। এতে মেদুসা প্রচন্ড ক্ষুদ্ধ হয়ে পড়ে এবং বলল, এথেনা তাকে সূর্য দেখার অনুমতি দিলনা কারন এথেনা তার রূপের কারনে তাকে হিংসা করে। এই কথায় এথেনা রেগে গেল। এথেনা তার চুলগুলোকে সাপে রূপান্তিত করলো এবং প্রচন্ড কুৎসিত বানিয়ে ফেলল এবং অভিশাপ দিল যদি কেউ কখনও মেদুসার চোখের দিকে তাকায় তাহলে সে পাথরে রূপান্তিত হবে।নিজের রূপ হারানোর পর প্রচন্ড অত্যাচারী হয়ে পড়ে মেদুসা। তার চোখের কারনে কেউ তাকে পরাস্ত করতে পারতোনা। যেই তার সাথে যুদ্ধে লিপ্ত হতো, মেদুসা তাকে তার চোখের শক্তি দিয়ে পাথরে রূপান্তিত করতো।
মেদুসা চরম ভুলটা করে জিউসের স্ত্রী ড্যানীকে বন্দী করে। জিউস তার ছেলে পারসিউসকে পাঠায় তার মাকে উদ্ধার করে আনার জন্য। এ যুদ্ধে পারসিউস কে সাহায্য করে দেবী এ্যাথেনা এবং দেবতা হারমেস। তারা পারসিউসকে একটা আয়না আর একটা তলোয়ার দেয় মেদুসাকে পরাস্ত করার জন্য।
আবশেষে সংঘঠিত হয় এক প্রচন্ড যুদ্ধ। যুদ্ধে পারসিউস সরাসরি মেদুসার দিকে না তাকিয়ে আয়নার মাধ্যমে মেদুসাকে টার্গেট করে এবং একসময় মেদুসার মাথা ধর থেকে আলাদা করে ফেলে তার শক্তিশালী তলোয়ারের মাধ্যমে এবং উদ্ধার করে নিজের মা ড্যানীকে।মেদুসা নিয়ে অনেক কাহিনী প্রচলিত আছে গ্রীক মিথলজীতে। তবে সব মিথলজিকাল ইতিহাস একটা কথায় একমত, মেদুসার অহংকারই তার পতনের একমাত্র কারন।

Wednesday, September 30, 2020

यहूदी टाई विक्रेता

यहूदी टाई विक्रेता ..

एक भागते हुए ISIS का आतंकवादी, जो पानी के लिए बेताब हो रहा था ,वह अफगानिस्तान के रेगिस्तान से गुजर रहा था !तब उसने दूर कुछ हल चल देखा। पानी पाने की उम्मीद से , उस ओर जाने की जल्दबाजी की, वहां पंहुच कर उसे केवल एक बहुत छोटासा यहूदी आदमी मिला ! वह एक छोटी सी डिस्प्ले रैक लेकर खड़े होकर टाई बेच रहा था । ISIS के आतंकवादी ने पूछा, “क्या आपके पास पानी है? यहूदी व्यक्ति ने जवाब दिया, "मेरे पास पानी नहीं है। क्या आप एक टाई खरीदना चाहेंगे? वे केवल मात्र $ 5 के हैं।" आईएसआईएस के आतंकवादी ने पागलो की तरह चिल्लाया, "इडियट काफिर ! मुझे इस तरह के अति-मूल्य वाले पश्चिमी श्रंगार की आवश्यकता नहीं है - मैं आपके संबंधों पर थूकता हूं। मुझे पानी की आवश्यकता है! "क्षमा करें, मेरे पास कोई पानी नहीं है - केवल टाई - शुद्ध रेशम के - और केवल $ 5" "फूह ! तुम्हारे टाई की मै भत्सना करता हूँ एक अभिशाप है, मुझे आपकी पतली सी गर्दन के चारों ओर टाई लपेट कर आपका गाला घोंट देना चाहिए और आप को जीवन से छुटकारा देना चाहिए, लेकिन मुझे अपनी ऊर्जा का संरक्षण करना है और पानी ढूंढना चाहिए!"
"ठीक है," छोटे बूढ़े यहूदी ने कहा, "इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप मुझसे एक टाई खरीदना नहीं चाहते हैं, या कि आप मुझसे नफरत करते हैं, मेरी जान को खतरा है, और मुझे काफिर कहते हैं।" मैं आपको बतलाऊंगा कि मैं उससे कहीं बेहतर इंसान हूं। यदि आप लगभग दो मील तक उस पहाड़ी पर पूर्व की ओर बढ़ते हैं, तो आपको एक रेस्तरां मिलेगा।वहां बहुत अच्छा भोजन और बर्फ जैसे -ठंडे पानी की भरमार है ... अब ख़ुशी ख़ुशी जाओ गो इन पीस! " यहूदी को फिर भी कोसते हुए, हताश आईएसआईएस आतंकवादी पहाड़ी के तरफ भाग गया। कई घंटे बाद, वह आतंकवादी घुटनो के बल रेंगते हुए वापस आया, लगभग मर रहा था, और हांफते हुए बोला, "वे मुझे बिना टाई के रेस्तरां के अन्दर नहीं दाखिल होने देंगे!" यह लो पांच $,यहूदी कहा यह लो सिल्क का टाई ! आतंकबादी बोला टाई मेरे गले मे बांधो ! यहूदी बोलै उसके पांच $ और लगेगा !आतंकवादी बोलै क्यू ! यहूदी बोलै मेरा मेहनताना है !मै ईमानदार हूँ , कोई बेईमान नहीं की दस $ लेलू ! आतंकवादी ने उसे 5$ और दिया तब यहूदी ने उसके गले में टाई बांध दिया ! अब आतंकवादी ने कहा एक गिलास पानी दे ! यहूदी बोलै पहले तू आपना बन्दूक मुझे दे ! आतंकवादी ने यहूदी को गन दे दिया !यहूदी ने उसे एक पानी का पट्टी दिया और कहा क्या तू एक मरे हुए आदमी को जिन्दा कर सकता है !आतंकी बोलै नहीं !यहूदी ने कहा क्यू की तू भगवान नहीं है ! अब मै चलता हूँ !

Sunday, September 20, 2020

-আমিনার গল্প

আলিফ লায়লা বা আরবীয় নাইটের গল্পগুলি মূলত ফারসি ভাষায় 'আলিফ লায়লা' শিরোনামে রচিত হয়েছিল। এটি বিশ্বের অন্যতম বৃহত  রচনা, বিশেষত শিশুসাহিত্যের ক্ষেত্রে। রচনাগুলির বেশিরভাগ  প্রাচীন ভারত, ইরান এবং আরব দেশগুলির পৌরাণিক কাহিনীর সংগ্রহ are গল্পগুলি অত্যন্ত কল্পনাপ্রসূত, পৌরাণিক এবং যাদুকরী ঘটনায় পূর্ণ। 

 আমিনার গল্প -- 

আমিনা বলল, শাহানশাহ 'আপনি জুবাইদার মুখ থেকে তার গল্প শুনেছেন, এখন আমি আমার গল্পটি আপনাদের সামনে উপস্থাপন করছি। আমার মা আমার সাথে আমার বাড়িতে এসেছিলেন যাতে তার বৈধব্য একাকীত্ব তাকে উতলা না করে। তারপর তিনি আমার  এই শহরের একটি বড় ঘরের  ছেলের সাথে বিয়ে দিয়ে দিলেন ! দুর্ভাগ্যক্রমে এক বছরের মধ্যেই আমার স্বামী মারা গেলেন। তবে তার সমস্ত সম্পত্তি যার মূল্য প্রায় নব্বই হাজার রিয়াল ছিল আমার কাছে এসেছিল। এই টাকা আমার সারা জীবনের যাবতীয় ব্যায়ের জন্য যথেষ্ট ছিল। আমার স্বামীর মির্ত্যুর  ছয় মাস পরে, আমি দশটি অত্যন্ত মূল্যবান পোশাক তৈরি করলাম, যার প্রত্যেকটির মূল্য ছিল এক হাজার রিয়াল। এবং আমার স্বামীর মৃত্যুর এক বছর পর থেকে আমি আমারএই পোশাকগুলি পরতে শুরু করি। 
একদিন আমি আমার বাড়িতে একা বসে ছিলাম এমন সময়  আমার চাকর আমাকে এসে বলেছিল যে একজন বৃদ্ধা আপনাকে কিছু বলতে চান, আপনার যদি আদেশ হয় তাহলে তাকে এখানে পাঠাবো ! আমি অনুমতি দিয়েছিলাম। বৃদ্ধা মহিলাটি এসে মাটিতে চুম্বন করলেন এবং আমাকে প্রণাম করলেন, তারপর উঠে দাঁড়ালেন এবং বললেন, 'আমি আপনার করুণার খুব প্রশংসা শুনেছি, তাই আমি আপনার কাছে একটি অনুরোধ করতে চাই। তা হলো যে আমার একটি মেয়ে আছে যার বাবা-মা নেই। আজ রাতে তার বিয়ে হবে । আমরা দুজনেই এই শহরে অপরিচিত। যে ছেলেটির সাথে তার বিয়ে হবে সে একজন ধনী পরিবারের সন্তান  এবং তার অনেক আত্মীয়রা এই অনুষ্ঠানে আসবে। শোনা যাচ্ছে যে অনেক মহিলারা বরের সাথে মূল্যবান পোশাক পরে আসবেন। আপনি যদি সেই বিয়েতে যোগ দেন তবে আমি সম্মানিত থাকব। আপনি যদি আমাদের পক্ষ থেকে উপস্থিত থাকেন তবে বড় যাত্রীরা আমাদের অচেনা এবং দরিদ্র বলে বিবেচনা করবেন না। আপনার মতো কোনো সুন্দরী এবং ধনী মহিলা   যখন এই বৃদ্ধা মহিলার সাথে রয়েছে তখন তারও আমাদের শ্রদ্ধা করবে । আপনি যদি আমার দারিদ্র্যতার ও নির্ধনতার  জন্যে আমার এখানে যেতে  অস্বীকার করেন তাহলে আমার সুনাম ধুলিস্যাত হবে ! এই শহরে আমার কোনও আত্মীয় নেই, সুতরাং আমি আপনার কাছে সাহায্যের জন্য প্রার্থনা করছি, এখানে আপনার মতো কোনো দানশীল মহিলা নেই যে দরিদ্র আর অনাথদের  প্রতি করুণা পোষণ করে।বৃদ্ধা এই কথাটি বলে কাঁদতে শুরু করলেন। আমি তার কান্নাকাটি দ্বারা প্রভাবিত  হয়েছিলাম । আমি তাকে সান্ত্বনা দিয়ে বললাম, 'আম্মা, আপনি চিন্তা করবেন না, আমি অবশ্যই আপনার মেয়ের বিয়েতে যোগ দেব। আপনার আর এখানে আসার দরকার নেই, আপনি বিয়ের ব্যবস্থা করুন । আপনার বাড়ির ঠিকানা বলুন, আমি নিজেই সেখানে পৌঁছে যাব। 'বৃদ্ধা এই শুনে খুব খুশি হলেন। তিনি বলেছিলেন, ঈশ্বর তোমাকে  সদা আশীর্বাদ করুন, যেমন আপনি এই সময় আমাকে সুখ প্রদান করলেন ! তবে আপনি আমার বাড়িটি কোথায় খুঁজতে যাবেন, আমি নিজে সন্ধ্যায় এখানে এসে আপনাকে আমার বাড়িতে নিয়ে যাব। বৃদ্ধা এই বলে চলে গেলেন !

আমি তৃতীয় প্রহরে যাবার প্রস্তুতি নিলাম ! একটি মূল্যবান কাপড়ের জোড়া বেরকরে পড়লাম। বড় মুক্তোর মালা এবং আরও অনেক রত্ন অলঙ্কার যেমন আর্মলেট, কর্ণফুল, আংটি  ইত্যাদি পরেছিলাম ! ইতিমধ্যে সন্ধ্যা হয়ে গিয়েছিলো। বৃদ্ধা আমাকে নিতে এসে আমার হাতে চুম্বন করে বললেন যে বরের বাবা-মা এবং অন্যান্য আত্মীয়রা আমার বাড়িতে এসেছেন, তারা অনেক ধনী ও নামী লোক এবং তাদের বাড়ির মহিলারাও  পাত্রপক্ষ থেকে এসেছেন; এখন, দয়া করে আমার কন্যার পক্ষের ভার আপনি  নিন। আমি বৃদ্ধ মহিলার সাথে তার বাড়ির দিকে রওনা দিলাম এবং আমার অনেক দাসীকেও সুন্দর পোশাক পরিয়ে আমার সাথে নিয়ে গিয়েছিল। হাঁটতে হাঁটতে আমরা একটি প্রশস্ত এবং পরিষ্কার রাস্তায় পৌঁছেছিলাম। বৃদ্ধ মহিলা আমাদের নিয়ে গিয়ে একটি বড় গেটের সামনে দাঁড় করালেন। দরজার ওপরে একটি তক্তায় কাঠ কাটা অক্ষরে লেখা ছিল যে এই বাড়িটিতে  সর্বদা সুখের বসবাস । প্রদীপ জ্বলছিল তার আলোতে আমি এই আয়াতটি পড়েছিলাম । বৃদ্ধা তালি বাজিয়ে দরজা খুলে  আমাকে একটি বড় হলওয়ের ভিতরে নিয়ে গেলে।ভিতরে, একজন খুব সুন্দরী মহিলা আমাকে স্বাগত জানিয়েছিল, তারপর আমাকে জড়িয়ে ধরলেন এবং শ্রদ্ধার সাথে আমাকে একটি ঘরে নিয়ে গিয়ে বসালেন। তখন আমি দেখতে পেলাম যে সেখানে একটি রত্নজড়িত সিংহাসন রয়েছে। সেই সুন্দরী  আমাকে বলেছিল যে আপনি ভাবছেন  যে আপনি অন্য কারোর  বিয়েতে এসেছেন, কিন্তু বাস্তবিকতা হলো এই যে  আপনাকে এখানে আপনার নিজের বিবাহের জন্য নিয়ে আসা হয়েছে। আমি এটি শুনে অবাক হয়েছিলাম , তবে মহিলাটি আমাকে আর কিছু জিজ্ঞাসা করতে দেয়নি তবে এদিক সেদিকের অনেক ভালো ভালো কথা বলতে লাগলেন ! এবং আমার প্রতি শ্রদ্ধা দেখাতে শুরু করলেন।কিছুক্ষন পরে সেই মহিলা বললেন বিয়ের ব্যাপারটা হলো যে আমার ছোট ভাই আপনাকে দেখে মুগ্ধ হয়েছেব এবং আপনাকে বিয়ে করতে চায় ! আম্মার ভাই খুব সুশীল, ভদ্র আর রূপবান আর সব দিয়ে আপনার উপযুক্ত ! এখন আপনি যদি তাকে প্রত্যাখ্যান করেন তবে সে মর্মাহত হবে এবং তার হৃদয় চূর্ণ বিচূর্ণ হবে !আপনি তাকে পুরোপুরি বিশ্বাস করতে পারেন। তিনি খুব সুখী মানুষ এবং আপনাকে সর্বদাই সুখী রাখবেন। সেই মহিলা দীর্ঘকাল ধরে তার ভাইয়ের বিষয়ে কথা বলতে থাকে এবং তার প্রশংসা পুল তৈরী করে চলেছিল। অবশেষে তিনি আমাকে বলেছিলেন যে যদি আমি আপনার কাছে থেকে একটু সভবনার ইঙ্গিত পাই তবে আমি আমার ভাইকে আপনার আগমনের কথা জানাতে পারি ! 

যদিও প্রথম স্বামীর মৃত্যুর পরে আমার বিয়ে করার সামান্যতম ইচ্ছাও  ছিল না, তবে মহিলা তার ভাইয়ের এতো    প্রশংসা করেছিলেন যে একেবারে অস্বীকার করার কোনও উপায়  ছিল না। আমি ধীরে ধীরে হাসতে থাকলাম, কোনো উত্তর দিলাম না  । মহিলাটি আমার হাসি এবং নীরবতার দেখে  বুঝতে পেরেছিল যে আমি প্রস্তুত। তিনি হাততালি দিলেন। সাথে সাথে একজন খুব সুদর্শন যুবক পাশের ঘর থেকে বেরিয়ে এসেছিলেন সুন্দর দামি  পোশাক পরে। তাকে দেখে আমি আমার ভাগ্যের কথা ভেবে  খুব আনন্দিত হলাম যে এত সুন্দর মানুষটি আমার স্বামী হতে চলেছে !   তিনি আমার কাছে এসে বসে খুব শিষ্টাচারের সাথে  এবং বুদ্ধিমানের মতো আমার সাথে কথা বলতে শুরু করলেন। আমি তার বোন দ্বারা প্রশংসার  চেয়ে  তাকে বেশি প্রশংসা পেয়েছিলাম । সেই সুন্দরী  আমাকে ও তার ভাইকে কথা বলতে দেখছিল, সে  দ্বিতীয় বার হাততালি দিতেই একজন কাজী অন্য ঘর থেকে বেরিয়ে এলো  এবং এবং তাদের সাথে আরও চার জন লোক এল। কাজী আমাদের দুজনকে শরিয়া অনুসারে বিয়ে করিয়েছিলেন এবং চার জনের সাক্ষ্যও গ্রহণ করা হয়েছিল। আমার স্বামী আমাকে প্রতিশ্রুতি দিয়েছিলেন যে আমি অন্য কোনও ব্যক্তির সাথে কথা বলবনা বা  দেখব না, সর্বদা আচারটি অনুসরণ করব এবং আনন্দের সাথে তার আদেশগুলি মানবো। তিনি আরও বলেছিলেন যে আপনি যদি আপনার প্রতিশ্রুতি পালন করেন তবে আমি আপনাকে কখনই ত্যাগ করব না।

আমি ধনী মহিলাদের মতো রানীর মতো আমার স্বামীর বাড়িতে থাকতে শুরু করি। এক মাস পরে আমি আমার স্বামীকে শহরের বাজার ঘুরে দেখার অনুমতি চেয়েছিলাম। আমি বলেছিলাম যে অনেক ধনী পরিবারের মহিলারা যেমন বাজার থেকে সিল্ক ব্যাগ কিনে বেচা করেন আমিও তাই করতে চাই। আমার স্বামী এটির জন্য অনুমতি দিয়েছেন। আমি দুজন মেয়ের সাথে গিয়েছিলাম এবং সেই বৃদ্ধা মহিলা যিনি আমাকে নিজের মেয়ের বিবাহের ভান করেছিলেন, শহরের সবচেয়ে বড় বাজারে গিয়েছিলেন যেখানে বড় ব্যবসায়ীদের দোকান ছিল। বুড়ো মহিলা বললেন, এখানে একজন যুবক ব্যবসায়ী আছেন, যাকে আমি খুব ভাল করেই জানি, খুব প্রসিদ্ধ্য  জায়গার তাঁর দোকান আর তার কাছে যে মাল থাকে তা আর কোথাও পাওয়া যাবে না। আমি আরও ভেবেছিলাম যে যদি এক জায়গায় ভাল জিনিস পেয়ে যাই  তবে কেন এক জায়গা থেকে অন্য জায়গায় ঘোরা  ঘুরি করবো !  সেই  কারণেই আমি সেই বণিকের দোকানে গিয়েছিলাম।ব্যবসায়ীটি কেবল যুবকই ছিলেন না, খুব সুদর্শনও  ছিলেন। বৃদ্ধ মহিলা আমাকে বলেছিলেন যে এখানে প্রচুর মাল রয়েছে, আপনি বণিককে যা খুশি তাই জিজ্ঞাসা করতে পারেন। আমি তাকে বলেছিলাম যে আমি আমার স্বামীকে একটি প্রতিশ্রুতি দিয়েছি যে আমি লোকটির সাথে কথা বলব না, তাই আমি তার সাথে কথা বলব না, আপনার সাথে কথা বলব। সুতরাং সেই ব্যবসায়ী বৃদ্ধা মহিলার সাথে কথা  বলছিলো এবং আমাকে কী পছন্দ করেছেন তা দেখিয়েছিলেন। আমি সেই মালের মধ্যে থেকে একটি পছন্দ করেছিলাম এবং দাম জিজ্ঞাসা  করেছিলাম । বণিক বললেন, 'এই মালটি অমূল্য। আমি এটি অগণিত মোহর পেলেও বিক্রি করবো না। তবে এই সুন্দরী  যদি আমাকে তার গালে চুম্বন করতে দেয় তবে এই মালটি তার হয়ে যাবে।আমি বৃদ্ধ মহিলার উপর রেগে গিয়েছিলাম এবং বলেছিলাম যে এই ব্যবসায়ী একটা   লম্পট এবং বেপরোয়া বলে মনে হচ্ছে, সে এত নোংরা কথা বলার সাহস পায়ে কি করে ! তবে বৃদ্ধা ওই ব্যবসায়ীটির পক্ষ নিয়ে বললেন, 'সুন্দরী, এ সম্পর্কে বিশেষ কিছু মনে করার মতন নেই। আপনার স্বামী আপনাকে অন্য  ব্যক্তির সাথে দেখা করতে এবং কথা বলতে নিষেধ করেছেন,কিন্তু শিষ্টাচারে কোনোরূপ প্রতিবন্ধ আরোপিত করেননি । আপনি নিষিদ্ধ কাজ  করবেন না। আপনি কেবল চুপচাপ এই ব্যাপারীকে আপনার গালে একটি চুমু খেতে দিন শিষ্টাচার হিসেবে । এতে আপনার কোনও অসুবিধা হওয়া উচিত নয়। আমি এমন একজন মূর্খ ছিলাম এবং সাথে সাথে রেশমের থানের প্রতি এত প্রলুব্দ হয়ে গিয়েছিলাম যে আমি এই কাজের জন্য প্রস্তুত হয়েছিলাম । আমার বুডি মহিলা এবং দুই দাসী রাস্তায় দাঁড়িয়ে ছিল। আমি আমার মুখ এবং গাল থেকে পর্দা সরিয়েছিলাম সেই ব্যবসায়ীর সামনে।চুম্বনের পরিবর্তে দুষ্ট ব্যবসায়ী আমার গালে  দাঁতদিয়ে জোরে কামড়িয়ে দিয়েছিল, যার ফলে আমার গালটি ক্ষত হয়ে  রক্ত ঝরতে লাগএবং আমি অজ্ঞান হয়ে গেলাম। এই সময় বণিক দ্রুত তার জিনিসপত্র গুটিয়ে নেয় এবং দোকান বন্ধ করে পালিয়ে যায়। কিছুক্ষণ পরে যখন আমার চেতনা ফেরে তখন আমার গালে রক্তপাতের চিহ্ন পেলাম। বৃদ্ধা মহিলা এবং কাজের মেয়েরা আমার গালে কাপড় দিয়ে  ঢেঁকে দিয়েছিল ! সেখানে জড়ো হওয়া লোকেরা আমার দুর্দশা  দেখে বুঝতে পেরেছিল যে কোনও অসুস্থতা বা দুর্বলতার কারণে আমি অজ্ঞান হয়ে গিয়েছি।   বিশেষত বুডির  ভীষণ খারাপ লাগছিল, সে বলল, 'সুন্দরী , আমি তোমার অপরাধী, আমাকে ক্ষমা করুন। এই সমস্ত ঝামেলা আমার জন্য হয়েছে । আপনি আমার জন্য এই জারজ বণিকের দোকানে এসেছিলেন। এখন বাড়ি গিয়ে যা ঘটেছে, আপনি তার জন্য আর চিন্তা করবেন না। আমি আপনার ক্ষতস্থানে এমন ওষুধ লাগিয়ে দেব যার প্রয়গে তিন দিনের মধ্যে কেবল মাত্র ক্ষত নিরাময় হবে না বরঞ্চ ক্ষতের  কোনও চিহ্নই থাকবে না। '

আমি  কোন রকমে  বাড়ি পৌঁছে আমার ঘরে গেলাম এবং ব্যথা, দুর্বলতা এবং ক্লান্তির দরুন অজ্ঞান হয়ে গেলাম।বুড়ো মহিলা আমাকে হুঁশে এনেছিলেন। তারপরে আমি আমার বিছানায় শুয়ে পরলাম। আমার স্বামী রাতে এসে আমাকে শুয়ে থাকতে দেখে বললেন তোমার কী হয়েছে,  কেন শুয়ে আছো । আমি ভান করলাম যে আমার মাথা ব্যাথা করছে। আমি ভেবেছিলাম যে এর পরে সে আমার থেকে তার দৃষ্টি অপসারণ করবে। কিন্তু সে আমার হাতটি হাতে নিয়ে এবং নাডির গতি  ইত্যাদি দেখে আমার মুখ থেকে কাপড়টি সরিয়ে নিয়ে মাথায় হাত বুলিয়ে দিল। কিন্তু গালের ক্ষত দেখে তিনি রেগে গেলেন এবং আমাকে জিজ্ঞাসা করতে লাগলেন যে আপনার গালে এই ক্ষতটি  কীভাবে হয়েছে  আমি অনেক বাহানা বানিয়ে তাকে শোনালাম কিন্তু কোনো লাভ হলোনা ! স্বামী আবার বললেন, যতক্ষণ না আপনি সত্য কথা বলেন, আমার ক্রোধ কমতে পারে না। আমি বলেছিলাম যে হেঁটে যাওয়ার সময় আমি চঞ্চল হয়ে পড়েছিলাম যার কারণে আমি পড়ে গিয়ে আমার গালে ক্ষত হয়েছে। এতে কারও দোষ নেই। আমার স্বামী এখন নিয়ন্ত্রণের বাইরে এসে বললেন, 'আপনি মিথ্যার পর মিথ্যা  বলে চলেছেন, এখন আমি আপনার কোনো অজুহাত শুনতে চাইনা। এই বলে তিনি তালি দিলেন, তাই শুনে তিন জন হাবশী সৈনিক ঘরে এসে হাজির হলো ! আমার স্বামী তাদের বলেছিলেন, একজন এর মাথার দিকে আর একজন এর পায়ের দিকে ধরো আত্রিটিও জন তলোয়ার দিয়ে এর টুকরো টুকরো করে মাছদের খেতে দাও !  হাবশী জল্লাদ যখন ইতস্তত করছিল, তখন আমার স্বামী ধমক দিয়ে বললেন, তুমি আমার আদেশ মানছ না কেন? তখন জল্লাদ আমাকে বলল, 'তোমার সময় শেষ হয়ে এসেছে। আপনি এই শেষ মুহুর্তে ঈশ্বরকে  স্মরণ করুন। এছাড়াও যদি আপনি আরও শুনাতে চান তবে বলুন। আমি বলেছিলাম যে যদি কিছু সময়ের জন্য আমার জীবন অনুদান পাই তবে আমি কিছু বলতে চাই। আমি মাথা উঁচু করে পুরো কথাটি বলতে চেয়েছিলাম কিন্তু সংকোচ  এবং কান্নার কারণে কিছু বলতে পারলাম না। আমার স্বামী আমার প্রতি করুণা না করে  হাবশী দাসকে শিগগিরই আমাকে হত্যা করার নির্দেশ দিলেন।দাস আমাকে হত্যা করতে রাজি হয়েছিল। কিন্তু এই সময়, বৃদ্ধা দৌড়ে এসেছিল। ছোটবেলায় সে আমার স্বামীকে দুধ খাইয়েছিলেন তাই তিনি আমার স্বামীর পায়ে পড়ে বললেন আমি আমার দুধের দাম হিসেবে  এই মহিলার প্রাণ ভিক্ষচাইছি ! বুড়ি  বলেছিলেন যে এই স্ত্রীর  কোনও দোষ নেই, আপনি নির্দোষের হত্যা করে ঈশ্বরকে কী জবাব দেবেন। তার কথার মূল্য হিসাবে আমার স্বামী আমাকে হত্যা করেছিলেন না, তবে বলেছিলেন যে কিছু শাস্তি এর পাওয়া দরকার, তার আদেশে, দাস আমাকে এতবার  চাবুক দিয়ে আঘাত করল যে আমি অজ্ঞান হয়ে গিয়েছিলাম এবং আমার কাঁধ এবং বুক থেকে অনেক জায়গায় মাংস উড়ে গিয়েছিলো । আমি এমন একটি  প্রাসাদে চার মাস বন্দি  ছিলাম যেখানে আমি শুয়ে ছিলাম। বৃদ্ধা আমার দেখাশোনা করছিলেন । এবং তার সেবাতে আমি ভালো হয়ে গেলাম, তবে আপনি যে কালো চিহ্নগুলি দেখেছেন সেগুলি থেকেগিয়েছিলো।যখন আমি চলাফেরা করতে শুরু করেছিলাম, তখন আমি ভেবেছিলাম যে আমার প্রথম স্বামীর বাড়িতে গিয়ে থাকা উচিত হবে, যা আইনত এখনও আমার নিজস্ব সম্পত্তি ছিল, সেখানে গিয়ে দেখলাম আমার  সেই বাডি কে  আমার দ্বিতীয় স্বামী ভেঙে চুরমার করে সমতল মাঠে পরিবর্তন করে দিয়েছিল। এই অন্যায়ের বিরুধ্যে অভিযোগ করলে  রাগান্বিত হয়ে আমাকে হত্যা করতে পারে, এই ভয়ে আমি অভিযোগ  করতে পারিনি।

আমি যখন আমার জীবন ফিরে  পেলাম  তখন আমি ঈশ্বরকে ধন্যবাদ জানিয়ে জুবাইদার কাছে গেলাম এবং আমার সমস্ত দুঃখকষ্টের গল্পটি বলেছিলাম। সে আমাকে সান্ত্বনা দিয়েছিল এবং সে  আমাকে  বলেছিল যে তুমি আমার কাছে এসে থাকো ! এই সময়টি ভাল নয়, তাই এখন  আমাদের কারও কাছ থেকে দয়া আশা করা উচিত নয় ! তাদের থেকেও নয়  যারা আমাদের বন্ধুত্বের দাবি করেন বা যারা আমাদের রূপে মুগ্ধ হয়ে থাকেন !  জুবাইদা আমাকে আরও  বলেছিল যে আমার এত টাকা আছে যে আমরা কোনও অসুবিধার মুখোমুখি হব  না। জুবাইদা আমাকে আরও বলেছিলেন যে তাঁর বাগদত্তা শেহজাদা কীভাবে জুবেইদার  নিজের বোনদের ইর্ষা ও শত্রুতার শিকার হয়েছিলেন আর সেই কারণে সমুদ্রে ডুবেছিল এবং কীভাবে তার বাধ্য দেবদূত তার দুষ্ট বোনদের কুক্কুরীতে পরিণত করেছিল।আমি সেই সময় থেকেই জুবাইদার কাছে  থাকতে শুরু করি। যখন আমার মা মারা গেলেন, জুবাইদা আমার বোন সাফী কেও তার সাথে থাকবার জন্য ডেকে নিয়েছিলেন এবং তখন থেকে আমাদের তিনটি বোন সুখেই আছি । আমরা ঈশ্বরের  প্রতি কৃতজ্ঞ যে আমাদের কোনও সমস্যা নেই। আমরা একসাথে বাড়ি চালাই । মাঝে মাঝে দর কষাকষি করতে বাজারে যাই। গতকাল আমি বাজারে গিয়ে জিনিসপত্র নিয়ে এসেছিলাম, এক শ্রমিকের মাথায় চাপিয়ে। সে  একটি দুর্দান্ত কৌতুক অভিনয় করতে পারে  এবং তার আচরণ খুব ভালো ছিল, তাই আমরা তাঁর কথাটি মনে রেখে  আমাদের বিনোদন দেওয়ার জন্য তাকে সারা দিন আমাদের সাথে থাকতে দিয়েছিলাম। তারপর রাতে তিন ফকির আমাদের কাছে আশ্রয়ের জন্য প্রার্থনা করেন।আমরা  তাদেরকেও  খাওয়া-দাওয়া করিয়েছিলাম । তারা গভীর রাত অবধি গান গাইতে থাকে এবং আমরাও গান চালিয়ে যেতে থাকি। এরপরে মোসিলের তিনজন বণিক, যাকে খুব উচ্চাকাঙ্ক্ষী বলে মনে হয়েছিল তারা রাতারাতি অবস্থানের জন্য প্রার্থনা করে  ছিল। আমরা তাঁদেরও অভ্যর্থনা করেছি।আমিনা বলেছিল যে যদিও আমাদের সাত জন অতিথিরা  আমাদের প্রতিশ্রুতি দিয়েছিল যে তারা সমস্ত কিছু দেখবে কিন্তু  কোনও কিছুর বিষয়ে জিজ্ঞাসাবাদ করবে না, কিন্তু তারা এই প্রতিশ্রুতি ভঙ্গ  করেছিলেন  এবং কুকুরের মারধর এবং আমার দেহের দাগ সম্পর্কে অনুসন্ধান শুরু করেছিলেন সেই অপরাধে  আমরা তাদের সবার প্রাণ নিতে পারতাম কিন্তু আমরা তা করিনি অবশ্য এই চুক্তি ভঙ্গে  আমরা খুব অসন্তুষ্ট হয়েছিলাম ।অথচ  অতিথিদের কাছ থেকে তাঁদের ব্যক্তিগত জীবনী  শুনে মনে হলো তারা সবাই অত্যন্ত সম্ভ্রান্ত এবং সন্মানীয় ব্যক্তি তাই তাদের সবাইকে সম্মানের সাথে মুক্তি দেয়া হয়েছিল ।

খলিফা  হারুন রশিদ দু'জন মহিলার গল্প শুনে অবাক হয়ে গেলেন। তিনি মনে মনে তাদের তারিফ করলেন এবং ভাবলেন যে এই ফকিররা, যারা প্রকৃতপক্ষে রাজা ও রাজকুমার ছিলেন এবং এই বুদ্ধিমান মহিলাদের কিছুটা মানবিক অনুগ্রহ করা উচিত। তিনি জুবাইদাকে জিজ্ঞাসা করেছিলেন যে আপনার অনুগ্রহকারী পরী  আপনাকে কি জানিয়েছিল যে আপনার বোনরা কতদিন কুক্কুরীর বেশে  থাকবে। জুবাইদা বলেছিল যে ঘটনাক্রমে একটা কথা  আমি আপনাকে বলতে ভুলে গিয়েছিলাম,তা হলো যে পরীরা  আমাকে চলে যাবার  সময়  কয়েকটি চুল দিয়েছিলেন এবং বলেছিলেন যে আমি যদি এই চুলের কোনওটি আগুনে ফেলেদি  তবে পরী  পৃথিবীর যে অংশেই থাকুকনা কেন  তৎক্ষণাৎ আপনার সামনে এসে হাজির হব ! খলিফা জিজ্ঞাসা করলেন, সেই চুলগুলি কোথায়? জুবাইদা বলেছিল, আমি সেই চুলগুলি সব সময় আমার সাথে রাখি। এই বলে সে একটা ছোট কৌটো বেরকরে খলিফা কে দেখালো !খলিফা বলেছিলেন যে আমিও সেই পরীকে  দেখতে চাই। জুবাইদা তখন পুরো কৌটো কে আগুনে ফেলে দিয়েছিল। ধোঁয়া উঠার সাথে সাথে একটি ভূমিকম্প হলো  এবং কয়েক মুহুর্তে এক ঝলকানি পোশাক পরিহিত পরীর আবির্ভাব হলো ! তিনি খলিফাকে বললেন, 'আপনি পৃথিবীতে ঈশ্বরের  প্রতিনিধি, আপনার আদেশ যা কিছু হোক আমি তা পালন করব। এই জুবাইদা আমার জীবন বাঁচিয়েছিল, এ কারণেই আমি তাঁর প্রতি খুব কৃতজ্ঞ। আমি তাঁর বোনদের, যারা তাদের মানবিক অপরাধের জন্য আমি এই শাস্তি প্রদান করে ছিলাম। এখন আমার জন্য কী আদেশ আছে? 'খলিফা বললেন, 'একটি হ'ল যেহেতু উভয়কেই তাদের কৃতকর্মের জন্য শাস্তি দেওয়া হয়েছে, সুতরাং আপনি তাদের পুরানো দেহে ফিরিয়ে দিন । দ্বিতীয়ত, একজন ব্যক্তি তার স্ত্রীকে এত মারধর করেছেন যে তার কাঁধ এবং বুক কালো দাগে পূর্ণ। অন্যায়কারীরা তার পুরানো বাড়িটি খনন করে জমির সমান করে দিয়েছিল এবং তার প্রথম স্বামীর কাছ থেকে পাওয়া সম্পত্তিও দখল করে নিয়েছে । আমি অত্যন্ত দুঃখিত যে এই ধরনের অবিচার আমার শাসনের অধীনে হচ্ছে ।  আপনি নিশ্চই সেই ব্যক্তি  জানেন। আমাকে তার ঠিকানা বলুন এবং এই কুকুরটিকে আবার মহিলা বানান এবং আমিনার দেহের ক্ষতের কালো দাগকে অপসারণ করুন ! এবার পরী  আশ্বাস দিয়েছিলেন যে আমি সবকিছু ঠিক করে দেব। খলিফা যুবাইদাকে আদেশ করলেন যে  তাঁর বাড়ি থেকে কুকুর নিয়ে আসতে। পরী  একটি পাত্রে জল নিয়ে তাতে কিছু মন্ত্র উচ্চারণ করলেন। তখন সে কুকুর এবং আমিনা উভয়ের উপরে সেই জল ছিটিয়ে দিল। তত্ক্ষণাত কুকুরগুলি তাদের পুরানো দেহে সুন্দরী মহিলা হয়ে উঠল এবং আমিনার সমস্ত কালো দাগ চলে গেল এবং তার শরীর কুন্দনের মতো উজ্জ্বল হলো ! এখন দেবদূত পরী বলল  যে আমি জানি আমিনার স্বামী কে তবে তিনি আপনার সাথে খুব ঘনিষ্ঠভাবে জড়িত; আপনি চাইলে তবেই আমি  তাঁর নাম বলব । খলিফা বললেন দয়া করে বলুন।পরী বলেছিল, সে তোমার ছোট ছেলে আমিন, যে আমিনার  সৌন্দর্যের প্রশংসা শুনে তাকে  পেতে ইচ্ছুক হয় এবং জালিয়াতি করে তাকে তার ঘরে ডেকে বিয়ে করে । পরী তখন বললো আমিনা যখন রেশম বাজারের  ঘটনা বর্ণনা করেছিলেন তখন আমিনা নির্দোষ হলেও সত্য কথা বলার সাহস করতে পারেননি এবং অনেক মিথ্যা অজুহাত  দিয়েছিলেন  তাই তার স্বামী তাকে শাস্তি দিয়েছিল ।এই বলে দেবদূত পরী অদৃশ্য  হয়েগেলো । খলিফা তার ছেলেকে ডাকলেন কিন্তু ভয় ও লজ্জার কারণে তিনি আসার সাহস করলেন না। খলিফা তাকে সামনে ডেকে আনার জন্য জেদ করেননি বরং আমিনাকে তাঁর কাছে প্রেরণ করলেন এবং নির্দেশ দিলেন যেহেতু এই স্ত্রী  নির্দোষ তাই আপনি আমিনাকে  স্ত্রী হিসাবে শ্রদ্ধার সাথে গ্রহণ করুন । তাই শাহজাদা আমিন এটি করেছিলেন। খলিফা যুবাইদাকে নিজে বিবাহ করেছিলেন এবং সাফী ও অন্য দুই বোনকে তিন ফকিরের সাথে বিবাহ দিয়েছিলেন  এবং এই রাজকন্যাদের উচ্চ পদে বসিয়েছিলেন।