Tuesday, April 24, 2018

अपना पराया

अपना पराया
सुधाजी की जब शादी हुई तब उनका पति अभिनाश जुनिअर अफसर हुआ करते थे ! और सास ससुर के साथ किराये की मकान   में रहा करते थे !पुराना   मकान  था और किराया भी कम था !जब अभिनाश का प्रमोशन हुआ तो उसने सुधाजी से कहा अब हमको जयादा मकान भाड़ा मिलेगा क्यू न हम बड़े फ्लैट में शिफ्ट कर जाये ?
लेकिन सुधाजी ने बड़े फ्लैट में जाने से मना कर दिया और कहा तुम कंपनी से लोन लेकर एक अच्छा फ्लैट बुक कर दो ! माताजी का   इस फ्लैट से काफी यादे  जुड़े है हम लोग भी पड़ोसियों के साथ काफी घुल मिल गए है ! चार पांच साल थोड़ा संचय कर लेंगे तो आगे काम आएगा !अभिनाश को सुधा का सुझाव पसंद आया और उसने कंपनी से लोन लेने का फैसला किया !नया फ्लैट मिलने में करीब सात साल लग गए और नए मकान में शिफ्ट करते ही घर का खर्च कम हो गया ! इस बीच सुधाजी के दो  पुत्र राजीब और संजीब पैदा हुए और सास ससुर भी स्वर्गवासी  हो गए  !कंपनी का लोन समाप्त होते ही अभिनाश ने फ्लैट सुधाजी के नाम करवा दिया ! राजीव
और संजीव बड़े हुए तो सुधा जी ने अपने सहेली के बेटी अंकिता के साथ राजीव की शादी करवादी !अंकिता घर में सब की सेबा करती थी और सबको खुश रखना चाहती थी ! लेकिन सुधाजी को अंकिता का सावला होना मन को कचोटती थी ! सोचती थी मै  सहेली के चक्कर में आकर सावली बहु घर ले आई ! अंकिता सीधी साधी लड़की थी जो कुछ भी कहती उसमे कोई बनाबटी बात नहीं होती थी ! अब क्या था सुधाजी ने तै किया की संजीव की शादी एक गोरी लड़की से करुँगी ! पांच साल बाद संजीब की शादी प्रिया  नाम की लड़की से हो गई ! प्रिया  आधुनिक लड़की जो पढ़ी लिखी और सूंदर थी सुधाजी को पसंद आई !  प्रिया की मीठी मीठी बाते  सुधाजी को इतनी अच्छी लगती थी की अंकिता की घरेलु कथोपकथन सुधाजी के कानो में चुभती थी और अंकिता को सलाह देती थी की प्रिया जैसी बाते  करो ! प्रिया घर का कोई काम नहीं करती थी ! सब काम अंकिता करती थी, फिर भी सास का मन जीत नहीं पाती  थी क्यू कि वह सावली थी ! राजीब सब  समझता था लेकिन मा के मन को ठेस न पहुंचे इस लिए चुप रहता था !
धीरे धीरे समय बीता और सुधा को लगने लगा की प्रिया हमेशा अपने कमरे में रहती और जब कभी भी खाना परोसने का वख्त आता रसोई में घुसकर खाना लेकर परोसने लगती सबको यह लगता था की प्रिया  ने आज खाना बनाया है ! सब खाने की तारीफ करते और प्रिया कभी भी नहीं कहती की यह खाना अंकिता ने बनाया है !
एकबार अंकिता को मलेरिआ हो गया और उसने खाट  पकड़ लिया ! प्रिया  ने दो एक दिन खाना बनाया लेकिन सबको समझमे आगया की वह खाना नहीं बना सकती थी !प्रिया कुछ दिन होटल से खाना मंगाया केकिन होटल का बिल इतना ज्यादा होता था की संजीव ने रोज रोज  होटल  से  खाना  मंगवाने  से साफ़ मना  कर दिया और कहा की अब प्रिया को ही खाना बनाना होगा ! इधर अंकिता का बुखार कम नहीं हो रहा था ! उस  रात  प्रिया  ने  इतना  घटिया  खाना  बनाया की कोई भी खाना नहीं खा सका ! संजीव  ने सबके सामने प्रिया को डांट कर कहा   प्रिया तुम अपने मायके चले जाओ  तुम्हारी यहाँ कोई जरूरत नहीं है !और कह देता हूँ की जब तक तुम खाना बनाना नहीं सीख जाती वही रहना ! सुधा जी ने कहा यह क्या बात हुई खाना नहीं बनाना आता तो उसे मायके भेज दोगे ? कल से मै  प्रिया को खाना बनाना सिखलाऊँगी !
दूसरे दिन सुधाजी ने  प्रिया को नहा धोके चौके में बुलाया प्रिया बहुत देर कर आई ! सुधा जी ने कहा इतने देर से आओगी तो सब को बगैर खाये पिए दफ्तर जाना पड़ेगा !पर प्रिया को इस बात का फ़िक्र काहां था ! वह बहाना बना कर अपने कमरे में चली जाती थी ! अब धीरे धीरे अंकिता के बीमारी में सुधार  होने लगा और वह रसोई में आकर सास को काम में मदत करने लगी !घरवालों की जान में जान आई !
इत्तफाक से अंकिता के ठीक होते ही सुधाजी को पुराना  पेट की गाल ब्लैडर का दर्द उठने लगा और उसे हॉस्पिटल में आपरेशन के लिए भर्ती करना पड़ा !अंकिता सास के साथ अस्पताल जाकर रहने लगी ! एक हप्ता बाद सुधाजी घर लौटी !अंकिता सास की सेबा करती और घर का काम भी करती थी ! जब सुधाजी ठीक हुई तब
उसने अंकिता को अपने पास बुलाया और उसका हाँथ को अपने हाथ में लेकर रोने लगी और कहने लगी बेटी अंकिता तू  मेरी बेटी है ! और मैंने तुझे कितना भला बुरा कहा तू मुझे माफ़ करदे, तूने यह साबित कर दिया की तेरा दिल कितना सूंदर है ! अंकिता ने भी रोते  हुए कहा मम्मी जी आप मेरी माँ पहले भी थी आज भी हैं और हमेशा रहेंगी ! सुधाजी बोली बेटी तेरे बीमारी से हम सब को पता लगा की तेरी क्या अहमियत है, और मेरी बीमारी से पता चला की तू कितनी कोमल और दयालु है !
अंकिता ने रात का खाना बनाया और सबको खाना खाने के लिए बुलाया लेकिन प्रिया  ने आकर बताया की आज वह और संजीब रात का खाना नहीं खाएंगे ! सब खाने बैठे तो सुधाजी ने कहा मै  देखती हूँ संजीब जरूर खायेगा यह कहकर वह प्रिया के कमरे के पास पहुंची, और सुना प्रिया कह रही थी संजीब अगले महीने हम लोंगो को इस घर से अलग होना है मै  तुम्हारे खूसट बुढ़िया मम्मी के साथ नहीं रह सकती अब वह बीमार होती ही रहेगी मै  दीदी की तरह उनकी सेबा नहीं कर सकती हूँ  ! सुधाजी पर्दा हटाके अंदर घुसी तो देखा प्रिया और संजीब होटल का खाना खा रहे है !
सुधाजी को देखकर दोनों सन्न हो गए ! सुधाजी ने रोष पुर्बक दोनों को देखा और कहा खाना खाकर दोनों बहार आओ जरूरी बात करनी है ! जब दोनों बाहर आये तो सुधाजी ने कहा सुनो संजीब मै  तुझे कह रही हूँ मै  तुझे इस घर से बेदखल कर रही हूँ तेरी पत्नी को इस खूंसट बुढ़िया की सेबा  नहीं करनी है और न तुझे अपनी आत्म सन्मान खोकर इस बदजुबान औरत का समर्थन करना है !यह मकान मेरा है तेरे पिता का नहीं इस माकन पर तुम लोंगो का कोई अधिकार नहीं है ! मै  अपने मकान को अपनी बेटी अंकिता को दे रही हूँ ! संजीब बोला माँ तुम ऐसा कैसे कर सकती हो मै तुम्हारा बेटा हूँ ! सुधाजी बोली क्यू नहीं कर सकती वैसे भी तुम लोग अगले महीने से अलग होने वाले हो न ? और अभी बहाना बनाकर घर का खाना छोड़ होटल का खाना खा रहे थे न ? इस हरकत से तुम लोंगो ने यह सिद्ध कर दिया की तुम दोनों इस घर के सदस्य नहीं मेहमान हो और मेहमानो का बिदा होने का समय आगया है !
लेखक-ड:प्रदीप कुमार मैत्रा २५/४/१८

 










Thursday, April 19, 2018

जाने अनजाने

जाने अनजाने 
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कमलेश की नौकरी यूनिवर्सिटी छोड़ने के बाद ही लग गई !पिताजी दबंग अफसर थे बारह तेरा घंटा काम करते थे ! घर कैसे चलता था उन्हें मालूम नहीं था ! माताजी सीधी साधी थोड़ी पढ़ी लिखी घर का काम करती थी ! खाना पकाती थी बच्चे पालती थी लेकिन घर चलना उन्हें भी नहीं आता था ! शुरू में कमलेश की दादी और बाद में कमलेश की छोटी बिधवा बुआ घर चलाती थी ! जब कमलेश की नौकरी लगी तब तक दादी और बुआ जी का स्वर्ग बास हो चूका था और अम्मा काफी बूढी हो चुकी थी ! घर में किसी को पता नहीं था बेटे की शादी कैसे की जाती है ! आख़िरकार कमलेश के पिताजी ने अम्मा की सहेली की बेटी के साथ कमलेश की शादी तै करदी !
कमलेश भी अपने पिताजी के तरह दबंग अफसर था ! नौकरी को ही अपना जिंदगी का मकसद मान कर १२--१३ घंटा रोज काम करता था ! कमलेश की पत्नी सुचेता पढ़ीलिखी जरूर थी लेकिन दबंग की दबंगीन नहीं थी !
दिन भर घर का काम करती थी ! सुचेता को दुर्भाग्यबश कोई संतान की प्राप्ति नहीं हुई, इसलिए वह मन ही मन यातना भोग रही थी ! काम बाली बाई के बच्चो पर ही अपना प्यार लुटाती थी ! इस बारे में पति पत्नी में कोई चर्चा भी नहीं होती थी ! मोहल्ले की औरते सुचेता को बाँझ मानते थे, इसलिए सुचेता के किसी के घर आना जाना नहीं था वह कमलेश के ऑफिस जाते ही बाहर के दरवाजे में ताला लगा देती थी और करीब ८ बजे शाम ताला खोलती थी ! इस तरह १२ चौदा साल बीत गए !
एक दिन सुचेता को बुखार आया और जब ज्वर नहीं उतरा तो उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन ज्वर नहीं उतरा और उसी शाम को सुचेता का देहांत हो गया ! कमलेश अब अकेला हो गया और अब दफ्तर से लौटकर अकेले ही समय बिताने लगा !
एकदिन कमलेश हिंदी के समाचार पत्र में एक लेख पढ़ा जिसमे साफ़ लिखा था की संतान प्राप्ति का मुख्य उपाए है पति पत्नी के बीच मानसिक घनिष्टता दोस्तों जैसी होनी चाहिए ! जिंदगी में बहार आनी चाहिए ! एक दूसरे के बेक्तित्व को समझना चाहिए और उसका सन्मान करना चाहिए ! इस लेख को पढ़ने के बाद कमलेश घर के अंदर जाकर सुचेता की अलमारी अपने बिबाहित जीबन में पहली बार खोली और और अलमारी में उसे एक डायरी मिला ! जिसमे न जाने कितने लेख और कबिता सुचेता ने लिखी थी ! कमलेश ने रात भर पूरी डायरी पढ़ डाली ! और उसे लगा की उसने सुचेता के साथ अन्याय किया है ! उस डायरी में एक लेख था "मै बाँझ हूँ" जिसमे उसने लिखा था हे भगवान तुम मुझे उठा लो जब मै अपने पति को संतान नहीं दे सकती तो मै क्यू उनका जीबन ब्यर्थ करू ? मै इस परिवार की बोझ हूँ ! मेरे पति दिन रात काम करते है लेकिन यह मेहनत उनका बर्बाद हो रहा है ! हमलोग दोनों एक दूसरे को इतना सन्मान करते है की डाक्टरी इलाज के बारे में बात करने की दुःसाहस नहीं कर पाते है !
आज पहलीबार कमलेश को लगा उसको पत्नी के साथ पहल करनी चाहिए थी ! चाहे किसी में भी कमी हो उसे ठीक करना डाक्टर का काम है, लेकिन डाक्टर के दरवाजे तक कमलेश को ही पत्नी को लेकर जाना था, यह नहीं हुआ ! कमलेश पत्नी को जान कर भी अनजान रहा !
लेखक डा प्रदीप कुमार मैत्रा १८/४/२०१८

Monday, April 16, 2018

मोटी

मोटी
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मैना इस घर की बेटी है अब २५ साल की हो गई है और लम्बाई चौड़ाई में भी काफी इज़ाफ़ा हुआ है ! सरोज बाबू बैंक में अफसर है और ठीक ठाक कमा लेते हैं ! मैना जब छोटी थी तब मैना की माँ की मिर्तु हो गई थी और रमा देबी ने सरोज बाबू का घर सम्हाला था और मैना को पूरा माँ का प्यार दिया था यहाँ तक की छोटू के पैदा होने के बाद भी प्यार में कोई कमी नहीं आई ! छोटू जिसका असली नाम चिराग है १२बी का परीक्षा देगा ! मैना बचपन से ही पढ़ने में कमजोर थी , किसी तरह बी कॉम पास कर शार्ट हैंड सीखा है ! मैना सूंदर थी और गाना भी अच्छा गाती थी ! शादी की बात चली लेकिन कोई खास प्रतिक्रिया नहीं आया लड़के वाले उसके आकार को देखकर सहम जाते थे ! सरोज बाबू खाना खाकर दफ्तर चले जाते थे और मैना पुरे घर के काम में माँ को मदत करती थी ! और बाहर का काम भी करती थी जैसे छोटू को कोचिंग क्लास पहुँचाना ! सब्जी लाना किराना का सामान लाना इत्यादि ! मोहल्ले के लड़के उसे सिटी बजा कर मोटी मोटी कहते थे और उसके पास आते ही भाग जाते,सिर्फ महेश नाम का एक लड़का था जो मोटी को पसंद करता था और उसे कभी टुनटुन और कभी भोजपुरी दरवान कहता था !
महेश मैना को जो कुछ भी कहता सामने कहता था !इसलिए मैना भी उसे पसंद करती थी ! 
मैना की शादी की चिंता रमा देबी को अंदर से खाये जाती थी ! वह अब मैना को डांटने लगी थी कभी सबेरे अपने बिस्तर पर बेढंगी से लेटे रहने पर तो कभी जोर जोर से बात करने पर तो कभी बाजार से देर में लौटने पर ! एक दिन रमा देबी ने कहा की तू किस काम की है ? न एक नौकरी जुगाड़ सकती है और न एक पति ? तेरे साथ की सब लड़किया या तो शादी कर ससुराल गई या फिर कोई जॉब करने लगी है !
इस घटना से मैना को दुःख हुआ लेकिन उसने इसका कोई उल्टा जबाब नहीं दिया क्यू की वह माँ की मन की ब्यथा समझ सकती थी ! थोड़े दिनों के बाद एक दिन रमा के पेट में बहुत दर्द होना चालू हुआ ! मैना ने माँ को अस्पताल ले गई और आपरेशन करवाया ! रमा देबी मैना को पकड़ कर खूब रोइ और कहा बेटी मुझे माफ़ करना मैंने तेरे साथ बहुत बुरा बर्ताव किया है ! मैना बोली माँ तुम ऐसा मत कहो नहीं तो मै भी रोने लगूंगी ! तुम्हारे मन की हालत मै जानती हूँ तुम चाहती हो की जल्दी से मेरी शादी हो जाये, लेकिन माँ भाई अभी छोटा है और मेरे बाद तुमको देखने वाला कौन है ? 
इसके बाद रमा ने कभी भी मैना को उलाहना नहीं दिया !
इसके थोड़े दिन बाद मोहल्ले में बहुत बड़ा सोशल फंग्शन का आयोजन किया गया और मैना को स्टेज पर गाने का नेउता मिला और मैना ने लताजी के तीन गाना प्रस्तुत किया जिसमें "ऐ मेरे बतन के लोगो जरा आँख में भरलो पानी" को लोंगो ने खूब सराहा ताली की गरगराहट से पूरा मोहल्ला गूंज उठा !
स्टेज से उतरने के बाद पत्रकारों ने मैना को घेर लिया कहा यह कलाकार अबतक कहाँ थी ?
थोड़ीदेर बाद महेश ने मैना को निकलते देखा और उसका रास्ता रोका और उसके गाने की प्रसंशा की ! मैना ने पहले सोचा यह जरूर मुझे कुछ उटपटांग कहेगा लेकिन महेश इसका बिपरीत निकला ! वह खुश होकर थैंक्स कहा !
महेश ने कहा तुम से एक बात करनी है मैना बोली बोलो !
महेश ने कहा प्राइवेट है और ब्यक्तिगत भी है ! मैना ने महेश को एक कोने में लेजाकर बोली अब कहो ! महेश बोला मेरी मोटी मैना मै तुमसे प्यार करता हूँ और शादी करना चाहता हूँ ! अगर मै इस लायक नहीं तो तुम मुझे मना कर दो मै बुरा नहीं मानूंगा !
मैना को महेश अच्छा लगता था लेकिन शादी तक बात आजायेगी यह नहीं सोचा था ! मैना ने परिस्थिति को सम्हालते हुए कहा कुछ कठिन फैसला लेने से पहले मेरा गाला सूख जाता है तुम प्लीज तीन फ्रूटी ले के आओ जल्दी से ! महेश जल्दी से भागा फ्रूटी लेने ! इतने में मैना ने माको पास बुलाकर उसको सब बात बताई ! जब महेश वापस आया तो मैना ने ,कहा महेश यह मेरी माँ है महेश ने माताजी को प्रणाम कर कहा हम दोनों पुराने मित्र है ! 
रमा देबी ने कहा बेटा कल शाम को तुम मेरे घर आ सकते हो ! महेश बोला अबश्य ! तब रमा उन दोनों को छोड़ कर अपने आसन पर आकर बैठ गई ! 
अब महेश ने कहा मैना तुमने मेरे प्रस्ताब का कोई उत्तर नहीं दिया ! मैना बोली कल तो तुम मेरे घर आ ही रहे हो !
महेश बोला नहीं अगर तुम मुझे चाहती हो तभी आऊंगा नहीं तो नहीं आऊंगा ! अब मैना बोली महेश मै तुमसे प्यार करती हूँ लेकिन मै पिता माता के अनुमति के बिना शादी नहीं कर सकती इस लिए तुम्हे फ्रूटी लेन भेजा ! 
लेखक डॉ प्रदीप कुमार मैत्रा १२/४/१८