जाने अनजाने
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कमलेश की नौकरी यूनिवर्सिटी छोड़ने के बाद ही लग गई !पिताजी दबंग अफसर थे बारह तेरा घंटा काम करते थे ! घर कैसे चलता था उन्हें मालूम नहीं था ! माताजी सीधी साधी थोड़ी पढ़ी लिखी घर का काम करती थी ! खाना पकाती थी बच्चे पालती थी लेकिन घर चलना उन्हें भी नहीं आता था ! शुरू में कमलेश की दादी और बाद में कमलेश की छोटी बिधवा बुआ घर चलाती थी ! जब कमलेश की नौकरी लगी तब तक दादी और बुआ जी का स्वर्ग बास हो चूका था और अम्मा काफी बूढी हो चुकी थी ! घर में किसी को पता नहीं था बेटे की शादी कैसे की जाती है ! आख़िरकार कमलेश के पिताजी ने अम्मा की सहेली की बेटी के साथ कमलेश की शादी तै करदी !
कमलेश भी अपने पिताजी के तरह दबंग अफसर था ! नौकरी को ही अपना जिंदगी का मकसद मान कर १२--१३ घंटा रोज काम करता था ! कमलेश की पत्नी सुचेता पढ़ीलिखी जरूर थी लेकिन दबंग की दबंगीन नहीं थी !
दिन भर घर का काम करती थी ! सुचेता को दुर्भाग्यबश कोई संतान की प्राप्ति नहीं हुई, इसलिए वह मन ही मन यातना भोग रही थी ! काम बाली बाई के बच्चो पर ही अपना प्यार लुटाती थी ! इस बारे में पति पत्नी में कोई चर्चा भी नहीं होती थी ! मोहल्ले की औरते सुचेता को बाँझ मानते थे, इसलिए सुचेता के किसी के घर आना जाना नहीं था वह कमलेश के ऑफिस जाते ही बाहर के दरवाजे में ताला लगा देती थी और करीब ८ बजे शाम ताला खोलती थी ! इस तरह १२ चौदा साल बीत गए !
एक दिन सुचेता को बुखार आया और जब ज्वर नहीं उतरा तो उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन ज्वर नहीं उतरा और उसी शाम को सुचेता का देहांत हो गया ! कमलेश अब अकेला हो गया और अब दफ्तर से लौटकर अकेले ही समय बिताने लगा !
एकदिन कमलेश हिंदी के समाचार पत्र में एक लेख पढ़ा जिसमे साफ़ लिखा था की संतान प्राप्ति का मुख्य उपाए है पति पत्नी के बीच मानसिक घनिष्टता दोस्तों जैसी होनी चाहिए ! जिंदगी में बहार आनी चाहिए ! एक दूसरे के बेक्तित्व को समझना चाहिए और उसका सन्मान करना चाहिए ! इस लेख को पढ़ने के बाद कमलेश घर के अंदर जाकर सुचेता की अलमारी अपने बिबाहित जीबन में पहली बार खोली और और अलमारी में उसे एक डायरी मिला ! जिसमे न जाने कितने लेख और कबिता सुचेता ने लिखी थी ! कमलेश ने रात भर पूरी डायरी पढ़ डाली ! और उसे लगा की उसने सुचेता के साथ अन्याय किया है ! उस डायरी में एक लेख था "मै बाँझ हूँ" जिसमे उसने लिखा था हे भगवान तुम मुझे उठा लो जब मै अपने पति को संतान नहीं दे सकती तो मै क्यू उनका जीबन ब्यर्थ करू ? मै इस परिवार की बोझ हूँ ! मेरे पति दिन रात काम करते है लेकिन यह मेहनत उनका बर्बाद हो रहा है ! हमलोग दोनों एक दूसरे को इतना सन्मान करते है की डाक्टरी इलाज के बारे में बात करने की दुःसाहस नहीं कर पाते है !
आज पहलीबार कमलेश को लगा उसको पत्नी के साथ पहल करनी चाहिए थी ! चाहे किसी में भी कमी हो उसे ठीक करना डाक्टर का काम है, लेकिन डाक्टर के दरवाजे तक कमलेश को ही पत्नी को लेकर जाना था, यह नहीं हुआ ! कमलेश पत्नी को जान कर भी अनजान रहा !
लेखक डा प्रदीप कुमार मैत्रा १८/४/२०१८
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कमलेश की नौकरी यूनिवर्सिटी छोड़ने के बाद ही लग गई !पिताजी दबंग अफसर थे बारह तेरा घंटा काम करते थे ! घर कैसे चलता था उन्हें मालूम नहीं था ! माताजी सीधी साधी थोड़ी पढ़ी लिखी घर का काम करती थी ! खाना पकाती थी बच्चे पालती थी लेकिन घर चलना उन्हें भी नहीं आता था ! शुरू में कमलेश की दादी और बाद में कमलेश की छोटी बिधवा बुआ घर चलाती थी ! जब कमलेश की नौकरी लगी तब तक दादी और बुआ जी का स्वर्ग बास हो चूका था और अम्मा काफी बूढी हो चुकी थी ! घर में किसी को पता नहीं था बेटे की शादी कैसे की जाती है ! आख़िरकार कमलेश के पिताजी ने अम्मा की सहेली की बेटी के साथ कमलेश की शादी तै करदी !
कमलेश भी अपने पिताजी के तरह दबंग अफसर था ! नौकरी को ही अपना जिंदगी का मकसद मान कर १२--१३ घंटा रोज काम करता था ! कमलेश की पत्नी सुचेता पढ़ीलिखी जरूर थी लेकिन दबंग की दबंगीन नहीं थी !
दिन भर घर का काम करती थी ! सुचेता को दुर्भाग्यबश कोई संतान की प्राप्ति नहीं हुई, इसलिए वह मन ही मन यातना भोग रही थी ! काम बाली बाई के बच्चो पर ही अपना प्यार लुटाती थी ! इस बारे में पति पत्नी में कोई चर्चा भी नहीं होती थी ! मोहल्ले की औरते सुचेता को बाँझ मानते थे, इसलिए सुचेता के किसी के घर आना जाना नहीं था वह कमलेश के ऑफिस जाते ही बाहर के दरवाजे में ताला लगा देती थी और करीब ८ बजे शाम ताला खोलती थी ! इस तरह १२ चौदा साल बीत गए !
एक दिन सुचेता को बुखार आया और जब ज्वर नहीं उतरा तो उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन ज्वर नहीं उतरा और उसी शाम को सुचेता का देहांत हो गया ! कमलेश अब अकेला हो गया और अब दफ्तर से लौटकर अकेले ही समय बिताने लगा !
एकदिन कमलेश हिंदी के समाचार पत्र में एक लेख पढ़ा जिसमे साफ़ लिखा था की संतान प्राप्ति का मुख्य उपाए है पति पत्नी के बीच मानसिक घनिष्टता दोस्तों जैसी होनी चाहिए ! जिंदगी में बहार आनी चाहिए ! एक दूसरे के बेक्तित्व को समझना चाहिए और उसका सन्मान करना चाहिए ! इस लेख को पढ़ने के बाद कमलेश घर के अंदर जाकर सुचेता की अलमारी अपने बिबाहित जीबन में पहली बार खोली और और अलमारी में उसे एक डायरी मिला ! जिसमे न जाने कितने लेख और कबिता सुचेता ने लिखी थी ! कमलेश ने रात भर पूरी डायरी पढ़ डाली ! और उसे लगा की उसने सुचेता के साथ अन्याय किया है ! उस डायरी में एक लेख था "मै बाँझ हूँ" जिसमे उसने लिखा था हे भगवान तुम मुझे उठा लो जब मै अपने पति को संतान नहीं दे सकती तो मै क्यू उनका जीबन ब्यर्थ करू ? मै इस परिवार की बोझ हूँ ! मेरे पति दिन रात काम करते है लेकिन यह मेहनत उनका बर्बाद हो रहा है ! हमलोग दोनों एक दूसरे को इतना सन्मान करते है की डाक्टरी इलाज के बारे में बात करने की दुःसाहस नहीं कर पाते है !
आज पहलीबार कमलेश को लगा उसको पत्नी के साथ पहल करनी चाहिए थी ! चाहे किसी में भी कमी हो उसे ठीक करना डाक्टर का काम है, लेकिन डाक्टर के दरवाजे तक कमलेश को ही पत्नी को लेकर जाना था, यह नहीं हुआ ! कमलेश पत्नी को जान कर भी अनजान रहा !
लेखक डा प्रदीप कुमार मैत्रा १८/४/२०१८
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