Friday, November 10, 2017

दिलका मेल


दिलका मेल 

जो कुछ था मेरे पास वह मैंने दिल खोलके दियाक्यू मै कहता फिरू क्या क्या तुमने मुझसे लिया !
क्या वाकई में तुम नहीं समझती मेरा समर्पण या फिर तुम परख रही हो मेरा ह्रदय और मन !

सीप कभी कहे मोती से तेरा सब कुछ मुझको दे सब कुछ लेकर ही मोती रहती सीप के सीने में !


चांदनी में जो सुख मिलता है वह सूरज का ही है देनपर तुमने देखा न होगा सूरज को करते अभिमान !


बिन मांगे जब कोई देता उसे लेना चाहिए खुशीसे दाता और ग्रहीता दोनों झूम उठते तब उल्लास से !


लेखक डॉ प्रदीप कुमार मैत्रा ०९/११/१७