Tuesday, February 20, 2018

पुनर्मिलन

 पुनर्मिलन
दोस्तों, प्रणाम आज मै आप लोंगो को एक ऐसी कहानी सुनाने जा रहा हूँ ,जो एक सत्य घटना पर आधारित है, जिसे सुनकर आपकी आँखे भर आएगी क्यूकी जब मै खुद लिखते हुए बेबस हूँ तो आप भी होंगे !
हमारे मोहल्ले में एक सज्जन रहते थे उनका नाम शशि बाबू था, वह अंडमान में पुलिस ट्राइंग स्कूल में नौकरी करते थे और साल में एकबार लम्बी छुट्टी पर घर आते थे ! हमलोग शशि बाबू से अंडमान की कहानी सुनते थे !एकबार उन्होंने हम लोंगो को आप बीती यह कहानी सुनाई जिसके चलते उन्हें भारत सरकार से पुरस्कार मिला और TV में कहानी का प्रसारण भी हुआ था !यह घटना एक मासूम बच्चे गोपी की है जो उस समय सिर्फ दस साल का था ! उसे घर संसार का कोई ज्ञान नहीं था अपना घर ही उसका संसार था !
शशि बाबू का अंडमान पुलिस ट्रेनिंग स्कूल ९ महीने चलती थी और ३ महीने की गर्मियों की छुट्टी हो जाती थी ! इस छुट्टी के दौरान किसी एक कर्मचारी को बंद स्कूल की निंगरानी के लिए अकेले रहना पड़ता था ! लेकिन इतने बड़े इलाके में अकेले रहना बहुत कठिन काम था ! बहुत से लोग एकांत की पीड़ा नहीं सह पाते थे और बीमार पड़ जाते थे !
एक बार शशि बाबू को भी छुट्टिओ के दौरान काम करना पड़ा था ! शशि बाबू को सबेरे उठ कर नहा धोकर स्कूल का प्रार्थना संगीत बजाकर झंडा फहराकर सलामी देना पड़ता था ! इसके बाद गेट के सामने एक कुर्सी लेकर बैठना होता था दिन भर के लिए !फिर शाम को सलामी देकर झंडा उतारना होता था ! दिन भर में इस एकांत जगह में कोई नहीं आता था ! लेकिन इसमें एक भिन्नता थी कि सबेरे एक चरबाहा बांसुरी बजाते हुए अपनी बकरियों के साथ गेट के सामने से गुजरता था और फिर शाम को लौटता था ! वह बहुत ही सूंदर बांसुरी बजाता था जिसे सुनकर तबियत खुश हो जाती थी ! एक दिन चरबाहा गेट के पास आया और शशि बाबू से कहा साहबजी थोड़ा पानी पिला सकते है क्या ? शशि बाबू बहुत खुश होकर बोले क्यू नहीं मै तुम्हे और तुम्हारे बकरियों को भी पानी पीला सकता हूँ, यह कहकर उन्होंने सबको पानी पिलाया और कहा तुम बहुत अच्छा बांसुरी बजाते हो कहा से सीखा ? उसने उत्तर दिया मैंने अपने आप बजाते बजाते सीख गया ! शशि बाबू ने फिर पूंछा तुम्हारा नाम क्या है ? उसने बताया गोपी खत्री ! अब शशि बाबू ने कहा मेरा नाम शशि है मै इस स्कूल का कर्मचारी हूँ ! मेरे क्वाटर में मेरी माता है और मेरी पत्नी कलकत्ते में एक बैंक में नौकरी करती है और अपने मायके में रहती है ! अब तुम बताओ तुम कहाँ के रहने वाले हो और तुम्हारे घर में कौन कौन लोग है ! गोपी बोला मै अंडमान में मेरे मालिक भूषणजी के यहाँ काम करता हूँ और बकरी चराता हूँ ! साहबजी मै जब १० साल का था तब घर से भाग गया था और मुझे कुछ नहीं मालूम !
गोपी के जाने के बाद शशि बाबू को लगा यह आदमी कुछ छुपा रहा है ! उसके मन में भय है और दुखी भी है !शशि बाबू अपने डेरे में आकर माँ को गोपी के बारे में सब कुछ बताया ! माँ ने कहा कल उसको घर में ले आना ! दूसरे दिन जब गोपी आया तो शशि बाबू ने गोपी से कहा, आज मेरे अम्मा ने तुमको बुलाया है क्या तुम चलोगे मेरे घर ? गोपी ने कहा माँ का कहना कौन टाल सकता है ? गोपी ने अंदर घुसकर माको प्रणाम किया !और माँ ने उसे आशिर्बाद दिया और कहा भगबान तेरी इच्छा पूरी करे ! भोजन करने के उपरांत शशि बाबू ने गोपी से कहा तुम्हारे चेहरे से हमें लगता है तुम बहुत दुखी हो ! अपनी ब्यथा मुझे बताओ मै तुम्हे कुछ मदत कर सकता हूँ ! गोपी बोला नहीं मै ठीक हूँ ! अब शशि बाबू बोला गोपी मै पुलिस वाला हूँ और लोगोसे सच उगलवाना ही मेरा काम है तुम मुझसे झूंठ बोल रहे हो, तुम मुझे सच बोलो इसमें तुम्हारा ही फायदा है ! अब गोपी बोला साहेबजी मेरा मालिक और मालकिन ने मुझे हिदायत दी है की मै किसी भी अनजान आदमी से बात न करूँ ! शशि बाबू ने कहा मैंने तुम्हे दोस्त माना है और तुम मुझे पराया मानते हो, ठीक है तुम मत बताओ अगर तुम्हे मुझपर बिश्वास नहीं है ! अब गोपी टुटा और कहा बताता हूँ, ऐसा मत बोलिये, आप मेरे गैर नहीं है !
गोपी की कहानी ऐसी थी !
गोपी अपने गांव में अपने माता पिता और छोटे भाई के साथ रहता था ! एक दिन उसने गांव की दुकान में एक लाल रंग की साड़ी लटकते देखा तो उसे लगा उसकी अम्मा अगर यह साड़ी पहनेगी तो वह देबि दुर्गा जैसी लगेगी, उसने दुकानदार से उस साड़ी की कीमत पूँछी तो सेठ ने पचास रूपए बताया ! अब वह लड़का ५० रूपए कहासे लाता ! उसने अपने दोस्तों से पूंछा कैसे कमाऊ ५० रूपए ? तो दोस्तों ने कहा ठाकुर (जमींदार ) के पास जा वह बहुत नौकर चाकर रखता है हो सकता है तुझे कोई काम दे दे ! गोपी भागकर ठाकुर के पास गया और उससे काम माँगा ! ठाकुर ने तुरंत उसे खेत में काम करने को कहा ! लेकिन महीने भर काम करने के बाद जब वह ठाकुर के पास पैसा मांगने गया तो ठाकुर ने कहा बच्चो की कोई तनख़ा नहीं दी जाती, तुमने काम माँगा था,तो मैंने काम दे दिया ! गोपी को यह बात सुनकर बहुत गुस्सा आया और उसने ठाकुर को गाली देदी ! ठाकुर गुर्राया और बोला आज तुझे मै गोली मार दूंगा कहकर बन्दूक लेन घर के अंदर गया , वहां खड़े मज़दूरों ने गोपी को कहा जल्दी यहाँ से भाग जा नहीं तो ठाकुर तुझे गोली मार देगा ! यह सुनते ही गोपी डर गया और दौड़ने लगा उसे गोली चलने की आवाज़ सुनाई दी और वह दुगनी रफ़्तार से भागने लगा और तब तक दौड़ता रहा जबतक न वह थककर एक पेंड के नीचे गिर गया, और सोगया ! जब कुछ कोलाहल से उसकी नींद खुली तो उसे पता नहीं चला वह कहा है, और घर किधर है ! वहां एक बस खड़ी थी , जिसमे से लोग उतर रहे थे ! गोपी बस में चढ़ गया और पीछे जाकर फिर सो गया ! जब उसकी नीद खुली तो देखा बस का कन्डक्टर उसे पकड़कर नीचे उतार रहा था ! उसने पूंछा इस जगह का नाम क्या है ? कंडक्टर ने कहा यह बनारस है !
गोपी को बनारस में कोई ऐसा आदमी नहीं मिला जिसको उसके गाव के बारे में पता हो ! हार कर वह एक होटल में काम जोगार किया और वही रहने लगा ! थोड़े दिन बाद उसी होटल में एक और लड़का आया काम करने और दोनों में दोस्ती हुई और दोनों साथ रहने लगे ! गोपी का साथी बिहार से काम की तलाश में बनारस आया था और कुछ बिहारी लोंगो को जानता भी था ! उन दोनों को एक साथ काम करते हुए दो साल बीत गए ! एक दिन वह लड़का गोपिसे कहा की वह अंडमान जा रहा है नौकरी करने अगर गोपी चाहे तो वह भी उसके साथ चल सकता है ! और दोनों बनारस छोड़ कर अंडमान आगये और एक कारखाने में दोनों काम करने लगे ! जब उन के पास थोड़ा पैसा जमा हो गया तो उन लोगो ने सोचा की यहाँ से पहले बनारस जाकर गोपी का गांव ढूंढेंगे और फिर बिहार होकर वापस आएंगे ! लेकिन तकदीर को यह मंजूर नहीं था और एक दिन समुन्दर में भयंकर तूफान आया और गर्जन हुआ सारा पानी कारखाने में घुसकर सबकुछ बहा ले गया कुछ मजदूर भाग सके बांकी बह गए ! इस हादसे में गोपी का दोस्त मारा गया पर गोपी बच गया !
शशि बाबू बोले तुम २००४ की सुनामी की बात कर रहे हो क्या ? गोपी ने कहा हाँ साहेब मुझे भी चोट लगी थी और मै हॉस्पिटल में पड़ा था और बाद में राहत कैंप में रहने लगा ! वही कैंप में भूषन बाबू आय थे मज़दूर खोजने और मुझे ले आये थे अपने घर ! शशि बाबू ने पूंछा गोपी अब तुम्हारा उम्र कितना है ? गोपी ने कहा करीब ३५ साल ! और अंडमान में २० साल से जिसमे कारखाने में २ साल काम किया था ! शशि बाबू बोले अब तो तुम अपनी माँ के लिए साड़ी खरीद सकते हो ! गोपी बोलै नहीं साहेब मेरे पास कोई धन नहीं है ! कारखाने में काम करते हुए हमने जो धन कमाए थे वह पानी में बाह गया ! और भूषण बाबू कहते हैं जब मै गांव जाऊंगा तब मेरा सारा पैसा मुझे देकर घर भेंजेंगे ! लेकिन साहेब मै जनता ही नहीं मेरा घर कहा है ? शशि बाबू बोले गोपी तुम अपने गांव का नाम बताओ ! गोपी ने कहा बिधान नगर ! शशि बाबू रात भर इंटरनेट में बिधान नगर बनरस डिस्ट्रिक्ट में ढूँढ़ते रहे लेकिन उन्हें नहीं मिला ! उन्होंने अपने पत्नी को भी कंप्यूटर से ढूंढने को कहा उन्हें भी नहीं मिला ! दूसरे दिन जब गोपी आया तो शशि बाबू ने कहा, बिधान नगर नाम की कोई गांव बनारस डिस्ट्रिक्ट में नहीं है, गोपी जरा सोच के बताओ ! गोपी बोला साहेब मुझे लगता है बिधानपुर हो सकता है ! शशि बाबू ने तुरंत अपने पत्नी को फ़ोन कर बिधानपुर गांव को विकिमापिए में खोजने को कहा और यह भी कहा की उसगाव में कोई पोस्ट ऑफिस, पुलिस थाना या बैंक अगर है तो पता !लगाओ ! आधे घंटे के बाद पत्नी का फ़ोन आया की बिधानपुर नाम का एक छोटा गांव है लेकिन वहा कोई सरकारी ऑफिस नहीं है,लेकिन उस गांव से करीब ५ किलोमीटर दूर हमारे बैंक का एक छोटा ब्रांच है और उस बैंक में एक कर्मचारी है जो बिधानपुर से रोज काम करने आता है ! उसका टेलीफ़ोन नंबर मै SMS कर रही हूँ आप उनसे बार करे ! शशि बाबू ने तुरंत उसबैंक कर्मचारी को फ़ोन कर सारी बात बताई ! उस सज्जन ने कहा आप सही बोल रहे हैं, हमारे गांव से २५ साल पहले गोपी नाम का लड़का गायब हो गया था, मै गोपी के छोटे भाई को जानता हूँ कल मै उसका फ़ोन नंबर SMS करूँगा ! शशि बाबू ने गोपी से कहा अब तुम घर जाकर भूषण बाबू से कहो की तुम्हारा घर का पता चल चूका है और तुम अब घर जाना चाहते हो अतः तुम्हारा सम्पूर्ण बेतन को चेक से प्रदान करे !
दूसरे दिन बैंक कर्मचारी ने गोपी के भाई का मोबाइल नंबर भेजा और शशि बाबू ने उससे बाते भी की लेकिन उस दिन के बाद से गोपी मिलने नहीं आया ! इधर गोपी का भाई फोन कर भाई से मिलवाने का प्रार्थना कर रहा था ! इस जद्दोजहत में छुट्टीके दिन बीत गए और स्कूल के सारे कर्मचारी वापस आ गय थे ! जब गोपी तीसरे दिन भी नहीं आया तो शशि बाबू को संदेह हुआ की जरूर भूषण ने गोपी को रोक कर रक्खा होगा ?
शशि बाबू ने तुरंत स्कूल के प्रधान से बात की और दो सिपाही के साथ खोजते हुए भूषण के घर पहुंचा !संयोग से भूषण और उनकी पत्नी बरामदे में मिल गए ! पुलिस देखकर वह दोनों घबड़ाये और पूंछा क्या बात है ? शशि बाबू ने भूषण से पूछा गोपी कहा है ! इसपर भूषण ने कहा वह अपना घर चला गया है, अपना बकाया बेतन के साथ ! लेकिन शशि बाबू को बिश्वास नहीं हुआ और उन्होंने जोर से आवाज़ लगाई गोपी बहार आओ ! इस पर अंदर छुपा गोपी बाहर आ गया ! और गोपी ने कहा साहबजी मुझे माफ़ कर दीजिये, मुझे मालिक ने आपसे मिलने को मना किया था, और कहा था की आप हमको बेच देंगे ! आपने हमें झूठा वादा किया है की मेरा घर खोजकर मुझे घर जाने में मदत करेंगे ! इस बात पर शशि बाबू को गुस्सा तो आया पर उन्होंने शांति से गोपी के भाई को फ़ोन किया ! वह घर पर बैठ कर फ़ोन का इंतज़ार कर रहा था, घंटी बजते ही फ़ोन उठाया और कहा है मेरा भाई ? शशि बाबू बोले गोपी यही है लो बात करो कह कर फ़ोन गोपी के तरफ बढ़ाया ! अब क्या था दोनों रो रहे थे और भाई भाई कर रहे थे जैसे भारत मिलाप हो रहा हो ! इसके बाद गोपी ने अम्माँ से और भौजाई से बात की लेकिन पिता से बात नहीं हुई जो घर पर नहीं थे !
अब शशि बाबू ने भूषण से कहा, क्यू जनाब मै झूठा हूँ और गोपी को बेचना चाहता हूँ यह कहा था आपने ? भूषण बोला नहीं मैंने ऐसा कुछ नहीं कहा है ! शशि ने कहा मै कैसे स्वीकार करू की आप सही बोल रहे हैं, कुछ देर पहले आपने मुझ से झूठ कहा था की गोपी अपना पैसा लेकर बनारस चला गया है ! क्यू न आपके नाम से FIR दर्ज करदी जाये की बिना बेतन देकर गोपी को बंधक बनाकर आप ने रक्खा था और पुलिस आकर गोपी को छुडाया है ? अब भूषण गिडगिराने लगा और कहा मै आप से माफ़ी मांगता हूँ ! शशि बाबू ने कहा आप को माफ़ कर सकता हूँ कुछ शर्त पर ? भूषण ने पूछा कैसी शर्त ? शशि बाबू बोले पहला शर्त यह की सुनामी राहत शिबिर से जो सर्टिफिकेट गोपी को मिला था वह दीजिये ! दूसरा शर्त गोपी का १८ साल का तनख्वा सूद के साथ एक चेक बनाकर गोपी के बैंक खाता में डलवा दीजिये, जो आज हम उसके नाम खोल देंगे ! तीसरा शर्त गोपी का जहाज का टिकट अंडमान से कलकत्ता और ट्रेन का टिकट कलकत्ते से बनारस का बनवाकर कल हमारे ऑफिस आइये ! भूषण ने कहा मुझे आप का सभी शर्त मंजूर है !
शशि बाबू गोपी को अपने क्वाटर ले आया और उसका वापस जाने की तयारी में जुट गया ! गोपी माताजी को प्रणाम कर उनका आशिर्बाद लिया ! माताजी ने गोपी को काफी उपहार दिया और गोपी के माँ के लिए एक लाल रंग की साडी दिया और गोपी के साथ बनारस जाने के लिए मंदिर के पुजारी को नियुक्त किया ! दूसरे दिन सबेरे भूषण बाबू गोपी की तनख्वा और जहाज और ट्रैन टिकट लेकर शशि बाबू के पास आया ! शशि बाबू ने गोपी के भाई से बात कर उसके यात्रा का बिबरन दिया और पुजारी जी से भी परिचय करवा दिया ! गोपी को सबने जहाज में चढ़ा कर बिदा किया !
गोपी का भाई बनारस स्टेशन में पहले ही आगया था और गाड़ी से उतारते ही दोनों भाई आपस में लिपटकर खूब रोये ! पुरोहित जी को बिदा कर दोनों भाई बिधानपुर आ पहुंचे !
गोपी गांव आने पर देखा पूरा गांव उसके स्वागत में उमड़ पड़ा था, गोपी को देखने के लिए ! गोपी को कंधे में बैठकर बैंड बाजा बजाते हुए सब लोग गोपी के घर पहुंचे ! गोपी का अम्मा गोपी को सीने से लगाकर रोते रोते बेहाल हो गई माँ बेटे के मिलन देख कर ! गांव वाले भी रोने लगे ! गोपी ने कहा अम्मा मै सिर्फ शशि बाबू नाम के एक पुलिस वाले की मदत से, अंडमान से तेरे पास वापस आ सका ! मै वहा बंधुआ मजदूर बन गया था शशि बाबू ने मेरी बांसुरी सुनकर, मुझे बुलाया और मेरे बारे में जानकारी हासिल की और मेरे मालिक से मुझे छुड़ाया और मेरा तनख्वा भी दिलाया ! इतने में शशि बाबू का फोन आया और गोपी के सकुशल घर लौटने की बधाई दी ! गोपी ने अम्मा को फ़ोन दिया, अम्मा बोली बेटा तुम मेरे लिए भगवान् हो ! शशि बाबू ने कहा अम्मा मै भी आपका बीटा हूँ और अपने भाई को अपराधी के चंगुल से बचाया है, और एक पुलिस सिपाही का काम किया है ! अब गोपी बोला दादा मै आपका छोटा भाई हो गया हूँ, जब आप छुट्टी में घर आओगे, तो सपरिवार हम दो भाई से मिलने जरूर आना !
डॉ प्रदीप कुमार मैत्रा
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Monday, February 12, 2018

पति पत्नी सम्बाद

पति पत्नी सम्बाद
१]तुमने कहा --मुझे पर्बत खरीद के दोगे
मैंने कहा --   किस लिए खरीदोगे
तुम एक पत्थर उठाके ले आओगे अगर
हम उसे देवता मानेगे मंदिर में रखकर

२]अचानक तुम्हारी इच्छा हुई बाग़  खरीदने का
मैंने कहा क्या ज़रूरत है ब्यर्थ में पैसा लुटाने का
तुम बाजार से एक गुलाब लेते आना
और प्यार से मेरे जूड़े  में लगा देना

३]तुमने कहा मुझे बिदेश ले जाओगे
मैंने कहा क्यू, इससे तुम क्या पाओगे
अच्छा होगा हम जाकर बैठे नदी किनारे
और एकांत में बैठ कर सूर्यास्त को निहारे

४]जीवन है एक छोटी नौका जैसी
क्या ज़रूरत उसको मस्तूल की
तूफानी हवाओ से बचने के लिए
सिर्फ उसे दो मजबूत डॉड चाहिए

५] हम माटी से जुडे हुए आम  लोग हैं
हमें इच्छाओ पर नियंत्रण रखना है
 हमारी चाहत जितनी कम  होगी
 जीवन उतनी ही मनोरम होगी
 डॉ प्रदीप कुमार मैत्रा


পুনর্মিলন

এই ঘটনাটা  এক মাতা পুত্রের পুনর্মিলনের, যা ঘটেছিলো বিচ্ছেদের প্রায় ২৫ বৎসর পর !
আমাদের পাড়ায় এক ভদ্রলোক থাকতেন তার নাম ছিল শশী বাবু, তিনি আন্দামানের পোর্ট ব্লেয়ার শহরের  পুলিশ ট্রেনিং স্কুলে কাজ করতেন, আর বছরে একবার করে ছুটিতে আসতেন আমরা তাকে ওখানকার গল্প বলতে বলতাম, তখন তিনি এই পুনর্মিলনের গল্পটা একবার বলেছিলেন সেই গল্পটা আমি আপনাদের শোনাচ্ছি !
পুলিশ ট্রেনিং স্কুলটা ছাত্রদের ট্রেনিং সমাপ্ত হওয়ার পর অনেক দিন বন্দ  থাকতো ! সেই সময় শশী বাবুর একবার ডিউটি পড়েছিল ছুটির সময় পুরো তিন মাস স্কুলে থেকে  স্কুলের হেফাজত করা ! কিন্তু সমস্যা  ছিল স্কুলের আসে পাশে কোনো বসতি ছিলোনা আর স্কুল থেকে বাইরে যাওয়ার কোনো অনুমতি ছিলোনা ! অগত্যা শশী বাবুর  স্কুল থেকে কোয়াটার আর কোয়াটার থেকে স্কুল এই ছিল তার রোজ নামচা আর গেটের  কাছে একটা চেয়ার নিয়ে শুন্য পথের দিকে তাকিয়ে থাকা ! এর মধ্যে একটাই ব্যতিক্রম ছিল যে সকাল বেলা এক রাখাল ছেলে বাঁশি বাজিয়ে তার ছাগল নিয়ে গেটের সামনে দিয়ে যেত তাই দেখা !
একদিন সেই রাখাল ছেলে এসে শশী বাবুকে বললো সায়েব একটু জল দেবেন ? শশী বাবু তো হাতে স্বর্গ পেলেন বললেন  আলবাত দেব আর তোমার ছাগলদের জন্যও পাবে !রাখাল বললো সায়েব  আমার নাম গোপী আর আমি আমার মালিক ভূষণ বাবুর ছাগল চড়াই ! শশী বাবু খুশি হয়ে বললেন গোপী তোমার বাড়ি  কোথায় ?
গোপী বললো বিধান নগর, বেনারস শহরের পাশে একটা গ্রামে ! শশী বাবু বললেন  তোমার বাড়িতে কে কে আছেন ?
গোপী বললো সায়েব আমার মা, বাবা ভাই আছে !
পরেরদিন শশী বাবু, রাখাল ছেলের জন্য অপেক্ষা করছিলেন কখন সে আসবে আর তার সাথে কথা বলবেন ! গোপী আসতেই তাকে আর তার ছাগল গুলো কে জল খেতে দিলেন,আর বললেন গোপী তুমি এত সুন্দর বাঁশি বাজাও তুমি কার কাছে বাঁশি বাজানো শিখেছো ?
গোপী বললো নিজে নিজেই বাজাতে বাজাতে শিখেছি  !
শশী বাবু বললেন  গোপী আমি এখানে একলা থাকি আমার সহকর্মীরা সব ছুটিতে গেছে  আমার বাসা তে আমার মা আছেন আর আমার স্ত্রী তার পিত্রালয় আছে সেখানে সে একটা ব্যাংকে চাকরি করে ! তোমাকে দেখে আমার মনে হয় তোমার মনে কোনো দুঃখ বেদনা আছে যা তুমি  কাউকে বলতে চাও, তাই আমার তোমার সাথে গল্প করার খুব ইচ্ছে হচ্ছে, তুমি তোমার গল্প বলো আমি শুনি ! গোপী বললো সাহেব আমি খুব অল্প বয়সে বাডি  ছেড়েছি আমার কিছু মনে নেই ! শশী বাবু বললেন দেখো গোপী আমি পুলিশের লোক আমাকে মিথ্যা কথা বলোনা !তুমি অনেক কিছু জানো যা তুমি আমার কাছে লুকাচ্ছো ! গোপী বললো ঠিক বলেছেন বাবু আমি কিছু জানি কিন্তু আমার মালিক ভূষণ বাবু আর ওনার স্ত্রী রাধা বৌদি আমাকে, কোনো বাইরের লোকের সাথে কথা বলতে বারণ করেছে ! শশী বাবু বললেন ঠিক আছে আমি যখন তোমার কাছে বাইরের লোক তখন তোমাকে বলতে হবে না ! গোপী বললো বাবু আপনি আমার কাছে নিজের লোকের মতন, আপনি যখন জানতে চাইছেন তখন বলছি !
গোপীর কথা
 আমি যখন প্রায় ১০ বছরের তখন আমার ইচ্ছে হলো মার জন্য একটা লাল রঙের শাড়ি কিনবো, কিন্তু টাকা কোথায় পাই ? আমার বন্ধুরা বললো গ্রামের ঠাকুর (জমিদার) অনেক লোক খাটায় তার কাছে যাও, সে তোমাকে কাজে দিতে পারে ! তখন আমি ঠাকুরের কাছে কাজ চাইতে গেলাম আর কাজ পেয়েও গেলাম !এক মাস পরে যখন আমি টাকা চাইতে গেলাম তখন ঠাকুর বললো বাচ্চাদের  কোনো মাস মাইনে হয় না ! আমি ঠাকুর কে অনেক অনুরোধ করলাম কিন্তু সে কিছুতেই টাকা দিলোনা ! তখন আমি রেগে গিয়ে ঠাকুরকে গালাগাল করলাম ! ঠাকুর রেগে বললো তোর এতো আস্পর্ধা যে আমাকে গাল দিলি, আমি তোকে গুলি করে মারবো এই বলে ঘর থেকে বন্দুক আনতে গেলো, আর জমিদারের লোকেরা আমাকে ছুটে পালতে বললো, আর আমি ছুটতে লাগলাম আর জমিদার পেছন থেকে চাঁচাচ্ছিলো, ধরেআন বেটাকে আজ ওকে গুলি করে মারবো ! কিছুক্ষন ছোটার পর দেখলাম দূরে কিছুলোক লাঠি নিয়ে আমাকে তেড়ে আসছে তাই দেখে আমার আরও ভয় করতে লাগলো আর আমি আরও জোরে ছুটতে লাগলাম আর একটা গাছের তলায় এসে শুয়ে পড়লাম ! কতক্ষন গাছের তলায় ছিলাম জানিনা তবে লোকজনের চেঁচামেচিতে উঠে দেখি একটা বাস থেকে লোকজন নামছে ! আমি সেই বাসে চেপে বসলাম আর ঘুমিয়ে গেলাম ! বাসের কন্ডাক্টর আমাকে টেনে বাস থেকে নামিয়ে দিলো একটা শহরে, মনে হয় সেই শহরটা বেনারস ছিল ! সেখানে কেউ আমার গ্রামের নাম জানতো না ! আমি একটা হোটেলে ঢুকে কাজ চাইলাম আর কাজ পেলাম ! কিছুদিন পর এক বন্ধুও জুটে গেলো ! একদিন  আমার বন্ধু বললো সে একটা কাজ পেয়েছে আন্দামানে আর আমি ইচ্ছে হলে তার সাথে যেতে পারি ! আমি বললাম আন্দামান কোথায় ? বন্ধু বললো সমুদ্রের মাঝখানে  একটা বড় শহর ! যে লোক আমাদের নিয়ে যাবে সে টিকিট কাটবে  আর থাকা খাবার সব ব্যবস্থা করবে ! আমি রাজি হয়ে গেলাম আর সেই বন্ধুর সাথে এসে আন্দামান শহরে একটা কারখানাতে চাকরি করতে লাগলাম ! কিছুদিন পর এক ভীষণ সমুদ্র গর্জন হলো আর শহরের কারখানাটা ধ্বংস হয়ে গেলো ! শশী বাবু বললেন সুনামি ২০০৪ সালে হয়ে ছিল ? গোপী বললো হ্যাঁ সায়েব, তাতে বহু লোক মারা যায়, ভগবানের কৃপায় আমি বেঁচে গেলাম কিন্তু বন্ধু কে হারিয়ে আবার একলা হলাম ! সেই সময় আমি যে হাসপাতালে ছিলাম সেখানে আমার মালিক, ভূষণ বাবু  আমার ভালো হওয়ার পর নিজের বাড়ি নিয়ে আসলেন ! সেই থেকে  আমি ওনার কাছেই থাকি, ছাগল চড়াই আর বাঁশি বাজাই ! শশী বাবু বললেন এখন তো তুমি বড় হয়েছে, তোমার বেতন দিয়ে তুমি তোমার মায়ের জন্য শাড়ি কিনতে পারো তাইনা ?
গোপী বললো না সাহেব, ভূষণ বাবু বলেছেন যখন আমি আমার গ্রামে যাবো তখন উনি আমার থাকা খাবার আর বস্ত্রের টাকা কেটে নিয়ে আমার বেতন দেবেন ! আর টাকা দিয়ে আমি কি করবো সাহেব ? আমি জানিনা আমার গ্রাম কোথায় ?
শশী বাবু বললেন গোপী আমি চেষ্টা করবো তোমার মা আর তামার বাড়ি খুঁজে  বার করতে ! তুমি শুধু তোমার গ্রামের নাম ঠিক করে বলো ? গোপী বললো বিধান নগর ! শশী বাবু বললেন তুমি আমাকে আগে বলে ছিলে কিন্তু  আমি বিধান নগর নামে  কোনো গ্রাম বেনারসের আসে পাশে খুঁজে পাইনি তুমি আরও ভালো করে চিন্তা করে দেখো নামটা তুমি ঠিক বলছ কিনা ? গোপী বললো এখন থেকে
পরের দিন গোপী এসে বললো সায়েব জায়গাটার নাম বিধানপুর হবে ! আমি বোধ হয় ভুল বলেছিলাম ! শশী বাবু
সঙ্গে সঙ্গে ওনার স্ত্রী কে ফোন করে বললেন যে উইকিমাপিয়া  তে খুঁজে দেখো বেনারসের পাশে  বিধানপুর   বলে কোনো গ্রাম আছেকিনা ? আর যদি থাকে তাহলে সেই গ্রামে কোনো ব্যাঙ্ক,পুলিশ স্টেশন কিংবা পোস্ট অফিস আছে কিনা ?
তৃতীয়  খন্ড
কিছুক্ষন পরে শশী বাবুর স্ত্রী ফোন করে জানালেন যে বেনারসের পাশে বিধানপুর নাম একটি গ্রাম আছে কিন্তু ওখানে ব্যাঙ্ক,পোস্ট অফিস বা থানা নাই ! ওটা একটি সামান্য গ্রাম, কিন্তু ওই গ্রাম থেকে  ৫ কিলোমিটার দূরে আমার  ব্যাংকের একটা ব্রাঞ্চ আছে  আর সেখানের  একজন কর্মী বিধানপুরে থাকে আমি সেই ভদ্রলোকের ফোন নম্বরটা দিলাম তার সাথে কথা বলে দেখো মনে হয় তোমার চেষ্টা সফল হবে !
শশী বাবু স্ত্রীর দেয়া নম্বরে ফোন করলেন আর ভদ্রলোকের সাথে কথা বললেন ! সেই ভদ্রলোক জানালেন অনেক বছর আগে গোপী নামের একটি ছেলে গ্রাম থেকে নিরুদ্দেশ হয়ে ছিল আমি তার ছোট ভাই কে চিনি আর তার ফোন নম্বরটা আপনাকে পাঠাচ্ছি !শশী বাবু ফোন নম্বর নিয়ে গোপীর ভাইয়ের সাথে কথা বললেন ! ছোট ভাই আনন্দে আত্মহারা হয়ে ভাই ভাই করতে লাগলো ! শশী বাবু বললেন শীঘ্রই তোমাদের কথা হবে !

এর মধ্যে স্কুলের ছুটি শেষ হওয়ার পর, নুতন সেশন আরম্ভ হয়েছিল, কিন্তু গোপী আর এদিকে আসছিলোনা ! শশী বাবুর মনে একটু সন্দেহ হলো সে নিজের দল বল নিয়ে ভূষণ বাবুর বাড়ি গেলেন গোপী কে খুঁজতে ! ভূষণ বাবু ও তার স্ত্রী হটাৎ পুলিশ দেখে একটু ঘাবড়ে  গেলেন আর মিথ্যে কথা বললেন যে গোপী তার দেনা পাওনা নিয়ে চলে গেছে ! শশী বাবুর সন্দেহ হলো যে গোপী এখানেই আছে, সে জোরে জোরে গোপীর নাম ধরে ডাকতেই গোপী ছুটে এসে হাজির হলো আর বললো আমাকে ক্ষমা করবেন, আমার মালিক আমাকে আপনার থেকে দূরে থাকতে বলেছেন আর বলেছেন যে আপনি আমাকে বিক্রি করে দেবেন ! শশী বাবু গোপী কে বললেন আমি সরকারি কর্মচারী, আর তোমার মালিকদের মতো ভন্ড আর মিথ্যাচারী লোকেদের ধরে দেশের আইনের হেফাজত করাই  আমার কাজ ! এখন তুমি তোমার ভাইয়ের সাথে আর মার সাথে কথা বোলো ! এই বলে তিনি গোপীর ভাইয়ের ফোন নম্বর লাগলেন ! গোপীর ভাই তিনদিন ধরে ফোনের অপেক্ষা করছিলো ! দুই  ভাই ব্যাথিতো  হৃদয় নিয়ে কাঁদতে লাগলো আর কথা বলতে লাগলো !
শশী বাবু ভূষণ বাবু কে বললেন মানুষ কে বন্দি করে রাখার আর বিনা মাইনেতে লোক খাটানোর জন্যে তোমার  শাস্তি হবে, আর ভূষণ বাবু কে বললেন গোপী আপনাদের কাছে কত দিন ধরে কাজ করছে ? ভূষণ বললো ১৮ বৎসর ধরে! শশী বাবু বললেন এবার আপনি গোপীর ১৮ বছরের মাইনা  সুদ সমেত হিসাব করুন, আর গোপীর ব্যাঙ্ক একাউন্ট আমরা খুলে দিচ্ছি, সেই  খাতাতে   আপনি টাকা জমা দিন, অন্যথা  আমরা আপনার নামে মোকর্দমা করবো !  তখন ভূষণ বললো এতো টাকা আমি কোথায় পাবো ! শশী বাবু বললেন আপনি হিসাব করুন তারপর আমি বলবো আপানি কোথায় টাকা পাবেন ! দরকার হয় যদি তাহলে আমাদের উকিল আর একাউন্টস ক্লার্ক এসে  আপনাকে সাহায্য করতে পারে কিন্তু তাতে আপনার আরও অসুবিধে হতে পারে !
শশী বাবু গোপীকে সাথে করে পুলিশ ট্রেনিং স্কুলে নিজের কোয়াটারে আনলেন এবং মায়ের কাছে প্রস্তুত করলেন ! গোপী মাকে  প্রণাম করে বললো  মা আমি একজন রাখাল আপনার ছেলে আমার জন্য কত কি করলেন আর আমার পরিবারের সাথে কথা বলার ব্যবস্থা করেছেন ! শশী বাবুর মা গোপীকে বললেন তুমিও আমার ছেলের মতো আর তোমার ভাই তোমার জন্য আর একজন জনারণ্যে হারিয়ে যাওয়া ভারত বাসীকে তার পরিবারের কাছে পাঠানের ব্যবস্থা করেছে এটা ওর কর্তব্য, ও তাই নিজের কর্তব্য পালন করেছে, আমি তোমাকে আশীর্বাদ করছি তুমি ভালো ভাবে নিজের বাড়ি গিয়ে তোমার মায়ের চোখের জল মুছে দাও !
পরের দিন ভূষণ বাবু গোপীর টাকা আর জাহাজের টিকিট কিনে নিয়ে আসলো শশী বাবুর মা গোপীর মার্ জন্য লাল রঙের শাড়ি দিলেন আর গোপীর সাথে যাওয়ার জন্য মন্দিরের পুরুত মশাই কে নিযুক্ত করলেন ! গোপী শশী বাবুকে বললো আপনি আমার দাদার মতো কাজ করেছেন আপনাকে একটা প্রণাম করতে চাই ! শশী বাবু গোপীকে বুকে জড়িয়ে আশীর্বাদ করলেন ! গোপী সবার থেকে বিদায় নিয়ে জাহাজে চড়লো আর নিরাপদে কলকাতা হয়ে ট্রেনে বেনারস পৌঁছলো মন্দিরের পুরুত মশাইয়ে সাথে !  গোপীর ছোট ভাই স্টেশনে এসে দাদার সাথে দেখা করলো আর দুই ভাই গলা জড়িয়ে খুব কাঁদলো ! দুই ভাই গ্রামে এসে দেখে লোকে লোকারণ্য পুরো গ্রাম বাসীরা গোপীকে দেখবার জন্য দাঁড়িয়ে আছে ! গোপী ঘরে ঢুকে মাকে  জড়িয়ে ধরে খুব কাঁদলো আর মাকে লাল শাড়ি দিলো ! এরইমধ্যে শশী বাবুর ফোন আসলো আর সে বললো গোপী কেমন লাগছে ? গোপী বললো দাদা আমরা এখন থেকে তিন ভাই ! তোমার ছোট ভাইয়ের অনুরোধ তুমি একবার আমার বাড়িতে এসে আমার মাকে তোমার মুখ দেখাও ! শশী বাবু বললেন নিশ্চই আসবো !

নোট-বন্ধুগণ এখানে সব চরিত্রই কাল্পনিক তবে বাস্তবিক জগতে এই পুলিশ কর্মচারীকে  তার কর্তব্য পালন আর নিষ্ঠার সাথে মানবিকতার পরিচয় দেয়ার জন্য তাকে সরকার পুরস্কৃত করেছিলেন !
Dr P K Maitra