Saturday, May 7, 2022

लोटा

 लोटा REPAIRING OF LED BULB https://www.youtube.com/watch?v=iL0tVzKvcnI

Dr P K MAITRA =========
दोस्तों यह कहानी, भारत के आज़ादी के कुछ दिनों बाद की है ! उस ज़माने में अफसरों की तनख़्वाह कम होती थी लेकिन अनगिनत सुविधाएं थी, जैसे बड़ा बांग्ला, नौकर चाकर,माली, दरवान, गाड़ी ड्राइवर,फ्री बिजली, पानी, पेट्रोल, डाक्टर दबाई, इत्यादि इत्यादि !
उन दिनों खानदानी लोग ही IPS IAS होते थे ! अफसरों के घर में अंग्रेजो की चलाई गई प्रथा लागू थी जिसके तहत ब्यापारी लोग हर महीने अफसर लोंगो को नज़राना देते थे और अपना काम करवा लेते थे ! लेकिन बहुत सारे अफसर नज़राना नहीं लेते थे और देने वाले सेठ लोंगो को बंगले में दाखिल नहीं होने देते थे ! बहुत से ब्यापारी दरवान को पटाकर अफ़सराइन के दरबार में पहुँच जाते थे वह बात अलग है !ऐसे ही एक जज हमारे कहानी के नायक श्री राम कुमार शुक्ल जी थे ! धार्मिक आदमी थे सबेरे उठ कर बंगले से हटकर शौचालय जाते थे फिर कुएँसे दरवान पानी निक!लकर देता था नहा धो कर पूजा पाठ करने के बाद ब्रेक फ़ास्ट करते थे ! इस दौरान उनकी पत्नी भानुमति घर का पूरा किस्सा सुनाती थी और कुछ पैसे की मांग करती थी ! लेकिन जज साहब की कोई खास आमदनी नहीं थी की शौकिया सामान ख़रीदे अतः भानुमति को थोड़े में ही संतोष करना पड़ता था !
एक दिन शाम को जज साहब घर लौटने की तैयारी कर रहे थे तब देखा एक मारवाड़ी सेठ हाथ जोड़ कर खड़ा है !
शुक्ल जी ने पूंछा क्या बात है सेठजी ? सेठ जी रोने लगे बोले जज साहब मेरे बच्चे को बचा लीजिये ! शुक्ल जी का मन पसीज गया बोले क्या आपका बच्चा बीमार है ? और कितने साल का है ?
सेठ बोले नहीं हज़ूर वह बीमार नहीं जेल में है, नेपाल से घड़ी स्मगलिंग कर रहा था पकड़ा गया है ! सूटकेस में रखकर खुद ही ला रहा था एजेंट का पैसा बच!ने के चक्कर में, वह सिर्फ ३० साल का है, ब्यापार का तजुर्बा नहीं था और एजेंट लोंगो ने सीमा-शुल्क अधिकारी को खबर देकर उसे पकड़वा दिया ! आप उसको बचाइए मै आपको समुचित नजराना दूंगा !
अब जज साहब को गुस्सा आया और सेठ को डांटते हुए उसे भगा दिया !
शुक्ल जी घर आकर पत्नी को कहा दरवान से कहना अगर वह सेठ आता है तो धक्केमार कर उसे निकल देना ! भानुमति बोली आप बहुत कठोर इंसान है क्या होता अगर आप उसे फाइन लगाकर छोड़ देते ! अनाड़ी लड़का है ! जज साहब बोले क्या मूर्खो जैसी बात कर रही हो ? ऐसे दुष्ट लड़के बाद में ड्रगस ,और आर्म स्मगलर बनते हैं !
शुक्ल जी अदालत आकर देखते हैं, मारवाड़ी सेठ हाथ जोड़कर खड़ा है ! शुक्ल जी ने गार्ड को बोलै इस आदमी को अदालत के बहार निकालो ! और नहीं जाता है तो सलाखों के पीछे रक्खो जब तक पुलिस नहीं आती ! यह सुनते ही सेठ जी का हालत बिगड़ गया और भाग कर घर आये और सोचते रहे कैसे इस पागल जज से निपटे !
जाड़े का दिन था सबेरे उठ कर जज के घर गया और दरवान को मोटा बक्शीश दिया फिर उससे कहा जज से मिलादो ! दरवान बोला हुज़ूर अभी उस शौचालय गए हैं वहां से आकर कुए की पानी से नहाएंगे तब मै आप से बात करवा दूंगा !
जज साहब सेठ को जब देखा तो दरवान से बोला इसे पकड़के रस्सी से बांध कर रखो मै पुलिस बुलाता हूँ ! यह सुबते ही सेठ भागा ! घर जाकर फिर सोचने लगा क्या करू !
सेठ दूसरे दिन र!त तीन बजे उठा और एक बोतल व्हिस्की, भुना हुआ काजू, और ५००० रूपए के नए नोट का बण्डल लिया और अपने छोटे बेटे को साथ लिया और जज साहब के घर के तरफ चल दिया ! गाड़ी दूर खड़ी की और बेटे से कहा जाकर दरवान को यह मदिरा देना काजू के साथ और कहना मदिरा चख के बताये कैसा है ? अगर अच्छा होगा तो और ला देंगे ! बेटे ने वही किया और पिता को आकर बताया दरवान मदिरा पी चूका है !
अब सेठ गाड़ी से निकलकर जज के घर दबे पाव घुसा और पाखाना घर पहुंच कर कमरे का बल्ब निकलकर बहार फैक दिया और सारा नोट पैखानने के लोटे के अंदर डाल दिया और दबे पाव आकर गाड़ी में बैठ कर घर आया और बहुत दिनों बाद चैन से सो गया !
सबेरे जब शुक्ल जी जगे तो देखा चौकीदार बेधड़क सो रहा है, तब उन्होंने खुद ही छोटी बाल्टी में पानी लेकर शौचालय गए ! लेकिन यह क्या लोटे में थोड़ा पानी डालते तो पानी बहार आ रहा था शुक्लजी सोचे बच्चो ने लोटे में पत्थर डाला होगा और हाथ डाल कर देखा लोटे में कुछ नोट जैसा है उन्होंने यह बच्चो का खेलने वाला नकली नोट लगा ! तब उन्होंने बत्ती जलाई तो जली नहीं ! आखिर शुक्ल जी को गुस्सा आया और उन्होंने सब नोट निकालकर कोने में फैक दिया ! और नाश्ता करते वख्त पत्नी को हिदायत दी की कोई बच्चा पाखाने में नहीं खेलेगा !
भानुमति ने नोटों को सुखाकर एक झोले में रख दिया और सोचने लगी "हे भगवान यह नोट अगर असली होते तो मै बहुत सामान खरीदती" ! इसके बाद जज साहब टूर में चले गए सात दिन के लिए !
एक दिन भानुमति ने झोले से एक १०० रुपये का नोट निकालकर कामवाली बाई से कहा देख बाई यह असली है या नकली ? बाई बोली लगता है असली है , मै बाजार जाकर देखती हूँ ! थोड़ी देर बाद आकर बाई बोली मालकिन यह असली है ! अब क्या था मालकिन ने ५००० की खरीदारी की घर का हुलिया ही बदल दिया पर्दा से लेकर जेबरात खरीद लिया और जज साहब के लिए सूट भी ले लिया ! लेडीज क्लुब में पार्टी दिया और नौकर चाकर को इनाम भी दिया !
हप्ता भर बाद जब शुक्लजी आये तो चौक गए सोचा कही दूसरे के घर तो नहीं आ गए भूल से ? फिर भानुमति को देखा तो समझ गए की काया पलट हुई है ! अब पत्नी से पूंछे यह सब किसने ख़रीदा है? पत्नी ने कहा मैंने !
अब जज ने पूंछा पैसे कंहासे आये मै तो इतना कमाता नहीं हूँ ! पत्नी बोली आपही का दिया हुआ है ! जज बोले मैंने कब दिया ? पत्नी बोली यह आपके पाखाने के लोटे का नोट है ! यह सुनकर जज साहब ने अपना माथा ठोक लिया !
उधर सेठ जी वकील लगाकर पेशी की तारिख बढ़ाते रहे !
करीब तीन महीने बाद सेठ का बेटा जज के अदालत में पेश हुआ लेकिन यह क्या पीछे पीछे उसका पिता भी हाँथ जोड़े खड़ा था !
जज साहब आँख तरेर कर बोले तुम फिर आगये ?
अब सेठ निडर होकर बोला हुज़ूर कैसे नहीं आते ! अब तो हम आप के पाखाने के लोटा हैं !
जज ने मोटा जुरमाना लगाकर मुल्जिम को कड़ी हिदायत देते हुए छोड़ दिया, जैसा भानुमति ने कहा था !
जज साहब के दुश्मनो का कहना है की अब भानुमति को
कभी पैसे की कमी नहीं हुई !

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