Saturday, May 7, 2022

भयानक कहानी जलता हुआ यात्री

 भयानक कहानी जलता हुआ यात्री

डॉ। प्रदीप कुमार मैत्रा, २६/२/१९
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दोस्तों घटना 2016 की है, मैं बॉम्बे एक्सप्रेस से हावड़ा से कोरबा जा रहा था, बिलासपुर स्टेशन से पहले चापा स्टेशन आता है, मुझे वहाँ उतरना है और कोरबा के लिए टैक्सी लेनी है! बंबई एक्सप्रेस में बिना रिजर्वेशन के भी बर्थ उपलब्ध हो जाता है क्योंकि सभ्य-भब्य लोग इस पर कम सवार होते हैं। मंगला हाट के दिन भीड़ अधिक होती है, अन्य दिनों में भीड़ कम होती है! शाम को यह ट्रेन टाटा स्टेशन पहुँचती है ! मुझे एक एसी 2 टीआर बर्थ मिली, जिसके सामने के तरफ एक लकड़ी का डब्बा रक्खा था! शाम को सभी यात्री टाटा स्टेशन पर उतर गए! फिर रात आठ बजे उस विशाल डिब्बे में मैं अकेला बैठा थोड़ा डर रहा था कि कहीं कोई मेरा सामान लूट न ले जाए! उसी समय मैंने देखा कि कुछ बीएसएफ के जवान डब्बे में उठे,लकड़ी के डब्बे को चेक किया और राऊरकेला स्टेशन को फ़ोन कर सन्देश दिया दिया सब सही है ! मेरा डर कम हुआ! एक अधिकारी मेरे पास आया और बात करने के लिए बैठ गया!
हम आतंकवादियों के बारे में बात कर रहे थे, 16 जवान शहीद हो गए हैं, निश्चित रूप से अधिकांश ईंधन डिपो में, आग पकड़ने के चलते जले हैं, जो लोग उस आग में जल गए थे उनमे एक छत्तीसगढ़ी था उनका जला हुआ शरीर उनके घर बिलाशपुर ले जाया जा रहा था ! सैनिक अधिकारी ने कहा मेरा नाम गेंदराम एक्का है मैं छत्तीसगढ़ का सिपाही हूँ! मैंने सज्जन से हाथ मिलाया, हाथ बर्फ की तरह ठंडा और पत्थर जैसे सख्त था ! मैं घबरा गया मैंने किसी तरह अपने हाथ को उनसे छुड़ाया और अधिकारी के चेहरे को देखा। फिर मैंने खिड़की की सीट पर एक स्थानीय अखबार पड़ा हुआ देखा! मैंने उस पेपर को उठा लिया और पढ़ना शुरू किया! एक्का ने कहा सरजी थोड़ी शराब पीएंगे, हमें ठंड में रहना पड़ता है इसलिए हम बहुत शराब पीते हैं? मैंने कहा मैं नहीं पीता, उसने कहा-
"अकेले शराब पीने से भूत पकड़ता है", और "जो नहीं पीता है उसे भूत मार डालता है"!
मैंने कहा क्या आप भूतों में विश्वास करते हैं?
उन्होंने कहा अवश्य, हमारे सैनिक छेत्र में कदम-कदम पर लाशें हैं, सरजी आप जानते हैं कि कश्मीर में अब तक कितने लोग मारे जा चुके हैं? उसने मुझे शराब की बोतल सौंपी। मैंने शराब की एक चुस्की ली और बोतल एक्का को दे दी। उसने बोतल काफी खाली कर दी और कहा कि थोड़ा प्रसाद बचा है पीलो और खाली बोतल सीट के नीचे रख दो मैंने वैसा ही किया, अपनी छोटी उंगली दिखाई!
एक्का जाने के बाद, मैं अखबार के साथ बैठ गया और मैंने स्थानीय समाचार देखना शुरू किया, फिर जब मैंने एक खबर पढ़ी, तो मुझे लगा कि अभी यहाँ बैठे बैठे मेरे पहने हुए कपड़े खराब हो जायेंगे, एक्का की एक तस्वीर है जिसमें लिखा था "छत्तीसगढ़ के महान शहीद गेंद राम एक्का"!
तब मुझे किसी के आने की आवाज़ सुनाई दी, तो मैंने तुरंत अपना चेहरा कागज़ के पीछे छिपा लिया, मेरे हाथ-पैर काँप रहे थे और मेरा गला सूख रहा था! उस समय एक्का ने कहा सरजी मेरा फोटो देख रहे हैं, अच्छी तरह से देखो, फिर उसने कहा कि क्या तुम्हें पता है कि आग में जलने में कितना कष्ट होता है ? इस बारदात में डीजल तेल के ड्रम फट गए थे और तेल मेरे शरीर पर पानी की बौछार की तरह गिर रहे थे ! मेरा पूरा सिर आग में जल रहा था। फिर मैंने अपनी आँखों से श्री एक्का को अपने सामने खड़ा देखा और उसके चेहरे पर कोई त्वचा नहीं थी, सफेद दाँतों की पंक्तियाँ दिख रही थी, आँखें नहीं थीं, नाक नहीं थी, उसके सिर के बाल जल गए थे और आग की एक लपट मोटी काली जैकेट से निकल रही थी! मैं चिल्लाऊं, तो कैसे मेरे अंदर बिलकुल ताकत नहीं थी, मेरे गले से कोई आवाज नहीं निकल रही थी, मैंने अपने कानो से सुना सरजी मैंने जो शराब आप को दी थी, उसे आपने पीया था इसलिए आप बच गए!और यह सुन कर मैं होश खो बैठा, उसने कहा था -"अकेले शराब पीने से भूत पकड़ता है", और "जो नहीं पीता है उसे भूत मार डालता है"!
मैंने सबेरे काफी लोगों की चीखें सुनीं और नीद से जग गया, चारो तरफ शोर शराबा और हलचल के बाद, , मैंने देखा कि मैं चम्पा स्टेशन कबका पार कर चूका था और बिलासपुर स्टेशन पहुंच गया था! चारों तरफ लोग ही लोग थे , कभी-कभी सार्वजनिक रूप से शहीद गेंदराम एक्का के नारे दे रहे थे ! मुझे लगा कि यह एक सपना था? मैंने अपने हाथ में चिमटी काटी तो देखा, मैं जाग रहा हूं! मैं जल्दी से नीचे झुक गया और सीट के नीचे झाँकने लगा और देखा कि एक शराब की बोतल मृत आदमी की तरह पड़ी है!

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