बचपन का प्यार
Dr P K MAITRA
सपना और निलय छोटी उम्र से ही साथ-साथ बड़े होते हैं। सपना के पिता टैक्सी चालक और निलय के पिता गांव के डॉक्टर हैं। दोनों परिवारों के बीच संबंध अच्छा हैं। सपना मन ही मन निलय को प्यार करती है पर कभी कह नहीं पाई। दोनों ने ऑनर्स के साथ स्नातक किया। निलय को वेंट्रिकल नाम की एक सरकारी नौकरी मिलती है। कुछ समय के उपरान्त निलय का धूमधाम के साथ शादी हो गई । सपना बेचारी अपने कमरे में अकेली बैठ कर रोती रहती है। उसके पास करने के लिए कुछ थी नहीं था क्यू की उसने कभी भी अपने प्यार का इज़हार निलय से किया ही नहीं था । सपना की ग़मगीन स्थिति को देखकर उसकी माँ सपना पर दवाब डालती हैं। माँ को बताने में क्या दिक्कत है? तब जाकर आंसू भरी आवाज में सपना ने अपने छुपे हुए प्यार के बारे में बताती है, उनका एकतरफा प्यार। यह जानकर सपना के परिवार में मातम छा जाता है । सपना के पिता लड़की के ब्यथा पता चलते ही उसकी शादी कराना चाहते हैं। लेकिन सपना ने एक बात जो मन की गहराइयों में निलय के लिए डाल दी है वह अब किसी भी हालत में दूसरे लड़के से शादी करना संभव नहीं है। इसलिए उसकी बात नहीं मानने पर वह आत्महत्या कर अपना जान गवाने की धमकी भी दे दी है । अतः सपना के परिवार में हर कोई डरा हुआ है करने के लिए कुछ भी नहीं है लेकिन इकलौती बेटी का चेहरा देखो और आह भरो।
इस एकाकी जीवन के ५ साल बीत गए । सपना अब कोलकाता के एक निजी स्कूल में शिक्षिका हैं। वह पिछले कुछ समय से गांव नहीं गई थी, माता-पिता से फोन पर बात होती थी ! वह छुट्टी पर 5 दिन के लिए गांव आई थी । सपना को पता नहीं था की इसबार गांव लौटने से उनकी जिंदगी बदल जाएगी ? सपना पहले जब भी घर आती थी तो उसे घर में हर किसी का दर्द महसूस होता था। लेकिन इसबार अपने पिता माता के चेहरे में कुछ भिन्न चिंता की लकीर दिखाई दी ! सपना ने इस चिंता का कारन अपनी मां से पूछा, क्या हुआ अम्मा, क्यू परेशान हो ? सपना की मां पहले तो सपना से कुछ नहीं कही, लेकिन बेटी के दबाव में उन्होंने खुलकर सब कुछ कह दिया ! बेटी निलय गांव आ गया है. उसका एक प्यारा सा बच्चा है। बबुआ अभी 2 साल का है। बच्चे को जन्म देते समय उसकी मां की मौत हो गई है ।
निलॉय सपना के माता-पिता से मिलने गांव आया है। उन्हें निलय के मन में एक अजीब सा गुस्सा दिखाई देता है। एक न दबने वाला दर्द। घटना सुनकर सपना सहम गईं। जीवन कोई फिल्म तो नहीं है जो निलय के बच्चे की मैं परवरिश करूंगी, उसे अपनी बच्चे की तरह पालूंगी । लेकिन सपना बहुत इच्छुक है। एक बार फिर सपना खुद से हार जाती है। अपनी गुप्त इच्छा के बारे में खुलकर बात नहीं कर सकती ।
सपना की छुट्टी ख़त्म हो चुकी है, वह आज दोपहर कोलकाता लौट जाएंगी। बैग पैक करते समय सपना की मां दौड़ती हुई आई और बतायी कि निलय तुमसे मिलने आया है। सपना चौकजाती है। वह निलय को नहीं देखना चाहती थी। दुख का बोझ बढ़ाने से क्या फायदा? उसकी मां के जोर् देने पर , वह आखिरकार निलय से मिली । दोनों चुप थे । अचानक निलय ने कहा "तुम कोलकाता में रहती हो, मैंने सुना"? मैं भी कोलकाता में बड़ा बाजार में रहता हूँ। और तुम कहाँ रहती हो ?
सपना ने जवाब दिया- ''बड़ाबाजार में !
हम दो दोस्त एक स्थान में रह रहे हैं। जो मेरे साथ एक ही स्कूल में जाती थी। मेरे गांव की लड़की।" सपना बोली कुछ देर बाद मैं वापस जा रहीं हूँ । एक दूसरे को अलविदा कहें। सपना अपने कमरे की ओर चलने लगती है और कहती है "अच्छा चलती हूँ "। छाती में अज्ञात दर्द लिए हुए जैसे धुएं में घूम रही है। वह अपने मन में एक असंभव शक्ति इकठा कर के कमरे में वापस चलने का प्रयास करत है। उसने अपना सिर घुमाया और आखिरी बार पीछे देखा। उसने देखा कि निलय गोद में एक प्यारा सा बच्चा लिए खड़ा है। उसकी आँखे गीली है। आंसू दूर से देखे जा सकते हैं। किसी कारण से सपना बच्चे को देखकर अपने आप को रोक नहीं पाई, और बच्चे को गोदमे उठा लिया ।
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