Saturday, November 6, 2021

"जनम जनम से"

"जनम जनम से"
  प्रदीप कुमार मैत्रा
२३ सितंबर २०१८
मेरा नाम मिस रीता रॉस है, आसाम में मेरा मूल घर है! मैं गुवाहाटी विश्वविद्यालय से रसायन विज्ञान में एमएससी के साथ प्रथम श्रेणी में पास  करने के बाद नौकरी की तलाश में थी ! उस समय हमें वहां व्याख्याता   होने के लिए दो प्रथम श्रेणी की डिग्री की आवश्यकता होती  थीं, लेकिन मेरे पास एक थीं! और मुझे नौकरी भी  चाहिए थी! विश्वविद्यालय में मुझे डिमांस्ट्रेटर की नौकरी मिल रहा था, लेकिन मुझे वह नौकरी पसंद नहीं थी! एक दिन मैंने मध्य प्रदेश में एक डिग्री कॉलेज के लिए एक विज्ञापन देखा, और उस में एक शर्त थी  कि उम्मीदवार को रसायन विज्ञान में एम.एससी प्रथम श्रेणी और एनसीसी सीनियर डिवीजन सी सर्टिफिकेट पास होना चाहिए, और मेरे पास ये दोनो थी ! मैंने भगवान के नाम लेकर आवेदन भेजा!
कुछ ही दिनों में इंटरव्यू आ गया! मेरे साथ  साक्षात्कार में दो और उम्मीदवार थे, लेकिन उनके पास NCC  का प्रमाणपत्र नहीं था, इसलिए मुझे काम मिल गया! बाद में मुझे पता चला कि कॉलेज में NCC महिला बटालियन खोली जाएगी इसलिए यह विज्ञापन दिया गया था ! सरकारी कॉलेज का वेतन अच्छा था  और ऊपर से एनसीसी भत्ता मिल रहा था ! कॉलेज के प्रिंसिपल ने कहा कि आपको कल से काम पर उपस्थित होना  चाहिए और फिर आसाम से घरेलु चीजें लाने के लिए आपको कुछ दिनों की छुट्टी और जोइनिंग अलाउंस  दी जाएगी! मैं तुरंत   सहमत हो गई  ! मुझे सात दिनों के लिए गर्ल्स हॉस्टल में एक कमरा दिया गया था! मैं काम से जुड़कर बहुत खुश थी !

यह जुलाई का महीना था, पहले वर्ष के नए लड़के और लड़कियां काफी तादाद में आते थे और मुझे उन्हें पढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई थी! मैंने कक्षाएं लेना शुरू कर दिया, लेकिन नए लड़के / लड़कियों को अंग्रेजी अच्छी तरह से समझ में नहीं आती थी, और छात्रो की संख्या  अधिक होने के कारन कक्षा में काफी हो-हल्ला होता था, जिसे देख कर मै सहम जाती थी ! एक दिन क्लास के लड़के और लड़कियाँ मुझे परेशान कर रहे थे तब एक सुंदर नौजबान लड़का क्लास में घुसा, उसे देखकर सभी लड़के चुप हो गए थे! उसने मुझ से कहा  मिस रॉस यदि कोई छात्र आपको किसी भी प्रकार की अवज्ञा की, तो मुझे उन उदंडो का नाम बताइयेगा मैं उन्हें ठीक कर दूंगा ! और छात्रों ने कहा कि यह मैडम मेरी दोस्त है और अगर आप उन्हें परेशान करेंगे तो आपलोंगो के लिए  अच्छा  नहीं होंगा । मै उनके साथ क्लास से बाहर आई और उनसे पूंछा सर आप कौन हैं,उन्होंने मुझसे कहा मेरा नाम विनय है मैं इस विभाग का डेमोंस्ट्रेटर हूं !  एक अनुभागीय उम्मीदवार के रूप में आपका पद मुझे मिलना चाहिए था, लेकिन मुझे उस महिला एनसीसी वाली शर्त के कारण यह पद  नहीं मिल सका ! लेकिन अच्छा हुआ  कि आपको लिया गया वर्णा  आप से कैसे मुलाकात होती ? मैंने कहा बिनय आप मुझे क्षमा करें और आपको  बहुत-बहुत धन्यवाद, मैंने अपना हाथ को आगे बढ़ाया और कहा फ्रेंड्स बिनय ने दोनों हांथो से मेरे हाँथ पकड़ कर कहा, आपका स्वागत है रस! हम पहली नजर में दोस्त बन गए! कक्षा समाप्त करने के बाद, मैं लैब में आई और विनय से मिली और उनसे पूछा, “आप अपने प्रतिद्वंद्वी को मदद क्यों कर रहे हैं? नम्रता से बिनय ने कहा कि मैं उस पद के हर उम्मीदवार का विरोधी था न कि केवल मिस रीता रॉस का! मैंने कहा कि अब हम दोस्त हैं क्या आप मुझे सात दिनों में रहने के लिए कोई  जगह दिला सकते हैं? बिनय  ने कहा, " सात दिनों में क्यू मै  इसी वख्त आपके लिए घर दिला सकता हूँ ! मेंने  कहा, कहाँ ! बिनय ने कहाँ मेरे कमरे में यह कहकर विनय ने मेरा हाथ पकड़ लिया और कहा, क्या हुआ  तुम नाराज तो नहीं अपने से निम्न प्रतिष्ठा के सदस्य के बात से? मैंने कहा आप ऐसा क्यों कहते हैं? आज, मैंने आपकी गरिमा देखी है, अगर कक्षा के छात्र उस समय शांत नहीं होते तो मै क्लास छोड़ कर भाग जाती ! बिनय  ने मुझे कहा कि बैठो और उसने मुझे चाय के लिए पूंछा ? मैंने सिर हिला कर सम्मति दिया! चाय पिने के बाद, बिनय मुझे स्टाफ रूम में ले गया और सबसे मेरा परिचय कराया और कहा यह मेरी दोस्त मिस रीता रॉस है, और नई लेक्चरार ! सभी शिक्षकों ने को अपने हाथों से ताली बजाई और शिष्टाचार से मेरा  स्वागत किया। सबने पूंछा दादा यह परदेशी बाला कबसे आपकी दोस्त हैं ? बिनय ने विनम्रता ने कहा "जनम जनम से", लेकिन यह ईसाई है पुनर्जन्म में विश्वास नहीं करती है, मै  हिन्दू हूँ इस लिए कहा ! मैंने कहा क्यों नहीं मानूगी मेरे पूर्वज सभी हिन्दू थे, मैं अतीत में बकरी थी  और तुम बाघ थे! हर कोई मुस्कुराया, और कहा मैडम, दादा इस जनम में भी रॉयल बंगाल टाइगर हैं सब छात्र इनसे डरते है और हम लोंगो से अच्छा पढ़ाते  है  इनसे सावधान रहिएगा   इस तरह मेरा कार्य जीवन शुरू हुआ, मुझे कॉलेज के पास एक पूरा घर मिला और एक एक पेइंग गेस्ट भी बन गयी !


कॉलेज के पड़ोस में रहने और बिनय के आकर्षण के कारण, मैं शाम को केमिस्ट्री लैब में आ जाया करती  थी ! आज मैंने बिनय को ध्यान मग्न होकर काम करते देखा, और मैंने धीरे से उसके पास जाकर पूछा, विनय क्या कर रहे हो ? उसने कहा कि मैं अपनी थीसिस के लिए एक प्रयोग कर रहा हूँ ! मैंने कहा कि विनय तुम रिसर्च स्कॉलर हो यह बात पहले कभी नहीं कहा? किस बिषय में कर रहे हो, कब से कर रहे हो कृपया बताओ मुझे जानना है ! आप निश्चिन्त रहिये मै किसी से भी इस बात की चर्चा तक नहीं करुँगी ? बिनयने मेरे चेहरे को गौर से देखा, और देखता ही रहा !मैंने कहा कि आप क्या देख रहे हैं? बिनय  ने कहा मैं तुम्हारी  खूबसूरत आँखों को  देख रहा हूँ ! यह सुनकर मुझे बहुत प्रसन्नता हुई ! उसने फिर कहा अगर मैं तुम्हें देखता रहूँगा  तो मैं काम कब करूंगा, अब तुम जाओ! मैंने कहा कि टाइगर सर बकरी  जितना संभव हो उतना आपको मदत करेगी,  बिनय ने कहा मैं तुम्हारे बात को काट कैसे सकता हूँ ? सुनो, मैं रसायन शास्त्र में प्रोफेसर अरुण कुमार डे, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अधीन काम कर रहा हूँ! मेरा काम पूरा हो चूका है और मार्च में अपनी थीसिस प्रस्तुत करने जारहा हूँ !  मैंने कहा आपका विषय क्या है?
उन्होंने जवाब दिया "क्लॉटेड ब्लड के लिए सॉल्वेंट" यानि धमनियों में जब खून, बसा या  प्रोटीन" जम कर खून के बहाओ को अबरुद्ध करता है तब उस कचरे को साफ़ करने के लिए मैंने साल्वेंट बनाने पर शोध कर रहा हूँ  विनय ने मुझे बताया कि कभी-कभी किसी कारण से मानव नसों में, रक्त के थक्के किसी भी अंग में रक्त प्रवाह रुकजाने का कारण बनते हैं और सम्बंधित अंग कार्य करने में असमर्थ हो जाता है।  उदाहरण के लिए, यदि मस्तिष्क में खून  पहुँचाने वाली केशिकाओं में खून जम जाता है, तब मनुष्य  अपनी मेमोरी पावर खो देता है या अपने अंगों का परिचालन करने में असमर्थ हो जाता है! यदि इस रसायन को क्लॉटेड रक्त नाली में इंजेक्ट किया जाता है, तब रक्त का थक्का एक पल में घुल जाएगा और रोगी रोग मुक्त हो जायेगा ! इस परियोजना को केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान (सीडीआरआई) द्वारा अनुमोदित किया गया है!
मैं यह सुनने के बाद बिनय को  गले लगा लिया, तब बिनय ने  कहा अब खुश हो ना ! मैंने कहा मै  बहुत खुश हूँ ? और मै  ऐसे महान ब्यक्ति के सामने अपने को तुच्छ पा  रही हूँ यह कहते हुए मेरी  आँखे डबडबाई ! यह सुनकर बिनय बोला  रॉस ऐसा मत कहो तुम भी इससे भी बेहतर काम कर सकती हो ! मै  बोली सच ?
बिनय बोला सच सच सच तीन सच !
मैंने कहा बिनय तुम मुझ पर एक एहसान करोगे ?बिनय ने कहा क्या ? मैंने कहा कि मैं इस परियोजना पर काम करना चाहूगी   और मैं तुम्हारे  हर काम में मदद करूंगी  और इस  काम को और आगे बढ़ाऊंगी  ! बिनयने कहा ठीक है, मान लिया तुम्हारा कहना अब तुम्हारे मन को शांति मिली की नहीं कहो?

मैंने कहा परम शांति मिली ! मै  बोली बिनय हम ईसाई हैं हमलोग किसी भी सफलता के लिए चुम्बन करते है क्या मै  तुमको चुम सकती  हूँ ? बिनय बोला  रॉस हम हिन्दू है हमलोग इंगेजमेंट के बाद ही लड़की को चूम सकते हैं ! तुम अभी घर जाओ और मुझे कुछ काम करने दो ! मै  बोली अभी तुमसे बात हुई की मै तुम्हारा सारा काम करुँगीँ !बिनय बोला ठीक है चलो दोनों अपने अपने घर चलते हैं ! मै  बोली नहीं पहले मै अपना ईसाई   धर्म का पालन करती हूँ !बिनय बोला रॉस हम दोनों का भबिष्य साफ़ नहीं है अतः हम दोनों को दूर दूर रहना चाहिए ! मै  बोली बिनय मै अपना दिल तुम्हे दे चुकी हूँ ! अब तुम्हारी मर्जी उसे रक्खो या निकल फेंको !


  इसी तरह से हमारा आपसी सहयोग शुरू हुआ! विनय ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मेरा शोध अनुज्ञा प्राप्त किया, मुझे प्रोफेसर अरुण कुमार डे से मिलवाया, और मेरा शोधकार्य का स्वरुप का सारांश बनाया और मुझे पीएचडी साक्षात्कार करवा दिया दिया और मेरा पंजीकरण कराया ! इधर मैंने विनय का रिसर्च आर्टिकल  टाइप किया और प्रयोग का विवरण लिखा और इसे मुद्रित किया ! मैं विनय का काम अध्ययन करते हुए शोध  की प्रकृति को समझने में सक्षम हो गई ! हम दोनों ने इस प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए पूरा  दिन चर्चा करते थे, इस शोध  में अधिक अनुभवी और जानकार बनाने के लिए बिनय ने मुझे डॉ चौधरी (सीडीआरआई I लखनऊ) के पास भेजा। डॉ चौधरी ने विनय द्वारा बनाए गए रसायनों के साथ विभिन्न लोगों के रक्त के साथ प्रयोग किया और बताया कि यह रसायन केवल एक महीने पूर्ब  जमे हुए रक्त के थक्के को पिघला सकता है, लेकिन अगर रक्त उससे पुराना है, तो इसे पिघलने में लंबा समय लगेगा ! डॉ चौधरी मुझे उनके पशुघर ले गए। प्रयोग दिखाए और इस शोध की बहुत प्रशंसा की !
उन्होंने मुझे बताया मिस रॉस क्या आप बता सकती है कि विनय जैसे प्रतिभाशाली विद्वान मध्य प्रदेश के एक छोटे से कॉलेज में क्यों काम कर रहे हैं। उनका स्थान अमेरिका जर्मनी है और अगर वह वहां जाते हैं, तो दुनिया के  प्रसिद्ध वैज्ञानिको मेसे एक होंगे ! आप इस कार्य को जर्नल नेचर में छापने के लिए भेजें ! मैं उस रात लखनऊ से लौटी ! मैंने वापस आकर बिनय से कहा, सर, आपका सारा काम अच्छे से हो गया है और डॉ चौधरी ने आपकी बहुत तारीफ कर रहे थे ! इस प्रयोग को करने के बाद मुझे एक और नई जानकारी डॉ चौधरी से मिली! बिनय ने कहा वह क्या ? उन्होंने मुझे  बताया कि यह रसायन केवल एक महीने के लिए ही कार्यकारी होगी यानि प्रयोग में ली जा सकेगी, क्यू की खून के थक्के के साथ रक्त में उपस्थित घुलित ऑक्सीजन प्रतिक्रिया करके एक अघुलनशील परत से थक्के को ढक देती है जिसे यह रसायन भेद नहीं सकता है। यह बात सुनकर बिनय  यूरेका यूरेका कह कर कूदने लगा ! मैंने कहा, "क्या तुम पागल हो?" यह आपकी रासायन की  गतिविधि को सीमित कर देगा ! बिनय ने कहा इस लिए तुम बकरी हो समझी !
क्या मैंने इतना सारा काम किया और इस तरह की जानकारी इकट्ठा की और आप मुझे बकरी कहते हैं? बिनय ने कहा वास्तव में,मई सही कह रहा हूँ  मेरी बकरी जैसी प्रेमिका ! अब मुझसे नहीं रहा गया  और मैंने उसकी  उसकी चौड़ी छाती पर दो तीन घूंसे बरसा दिए, विनय ने कहा, मैडम, पागल मत होइए अगर आप मेरा जवाब सुनेंगी  तो आप कुछ कांड कर बैठेंगी ! बैठी रहो मैं नहीं बताऊंगा !
मैंने कहा कि आप क्यों नहीं कहेंगे ? आपको बताना होगा ! विनम्र ने कहा ठीक है, लेकिन आप उस कुर्सी पर बैठ जाओ, विनय एक कुर्सी पर बैठ गया हम दोनों आमने बैठे थे और बीच में एक मेज थी! बिनय  ने कहा कि यह टेबल  आपके उत्साह को शांत करने  का एक तरीका है और उन्होंने मुझे पीने के लिए एक गिलास पानी दिया, और I खुद भी पिया !  अब उसने कहा एक पेपर में मेरे थीसिस का टाइटल शीर्षक लिखो। मैंने लिखा था "सॉल्वेंट फॉर क्लॉटेड ब्लड"। बिनय ने कहा अब तुम्हारे थीसिस का शीर्षक लिखो थीसिस शीर्षक! मैंने "रिएक्शन  विद क्लॉटेड ब्लड" अब तुम बताओ  कि कौन  गधा आपको डॉक्टरेट की उपाधि देगा? मैंने कहा, मैं अपना शोध करूँ तो किस समाधान के लिए करू ? विनय ने कहा कि मै यह सोच रहा था की तुम्हारे शोध का शीर्षक क्या होना चाहिए जो तुरंत  परीक्षक को लगे की यह काम महत्यपूर्ण  है और आप अपने साथ उस समाधान को लेकर आए हैं इसलिए मैं यूरेका यूरेका कह रहा था! बिनय  ने कहा कि मेरे रसायन की एक सीमा है कि यह रसायन एक महीने से अधिक पुराना रक्त पिंड नहीं गलाया जा सकता है! और आपका काम इस ऑक्सीडाइज़्ड रक्त के थक्के को सम्पूर्ण गलसाना होगा !


 इस बार मैं बिनय के समझ और मेरे लिए उनकी भाबनाओ को देख कर अभिभूत हो गई ! मै  ईसाई होने के बाबजूद भी  मैंने विनय  को प्रणाम किया और कहा, “आजसे  आप मेरे गुरु हैं।  विनय ने कहा अब आप खुद अपने काम का सिनोप्सिस लिखे ! कल सुबह आप जो कुछ भी लिखेंगे मै देख लूंगा !  फिर वह कुर्सी से उठा और दरवाजा खोल कर मुझसे भागा  और जाते जाते कहा कि हिन्दू धर्म में गुरु पिता के बराबर होता है । मुझे लगा कि मैं इस लड़के को नियंत्रित नहीं कर सकती ! हे भगवान मुझे मदत करो ? मैं रात जाग कर अपने प्रोजेक्ट के लिए सिनोप्सिस बनाया और अगले दिन विनय सिनोप्सिस देखने के पश्चात्  कहा, "ठीक है, रॉस तुम सुंदर हो और बुद्धिमान भी हो" मुझे ऐसा लगा ईश्वर ने मेरी पुकार सुनली है ! मेरे  नए सिनॉप्सिस के साथ, बिनय  इलाहाबाद चला गया! और मै यहाँ बिरह की आग में जलने लगी !मै अगर बिनय को हासिल करने के बारे में सोचती रहूंगी तो शोध कैसे करुँगी !  \बिनय  इलाहाबाद से थोड़ी दिनों में लौटा और कहा कि आपकी नई सिनोप्सिस को जमा करने में काफी दिक्कते आई लेकिन प्रोफ़ेसर अनिल डे के समझाने के बाद काम हो गया !
फिर बिनय अपने Ph D बचाव परीक्षा के लिए तैयारी शुरू  कर दिया था !  सुबह लैब जाता था, और सारा दिन  लैब से  बाहर नहीं निकलता था ! मैं उसे खाना और चाय देने जाती  थी,  और लाइब्रेरी से उसके लिए संदर्भ ढूंढती रहती  थी ! कभी-कभी, मुझे डॉट भी  पड़ती थी  मेरे आँखों में आंसू आजाते थे ! और फिर वह कहता सॉरी रॉस मुझे माफ़ करना मेरा दिमाग काम नहीं कर रहा है, मै  दौड़ के उसके पास जाती और उसका गर्म माथा अपने सीने में दबोच लेती थी जैसे बिनय कोई बच्चा हो, वह शांत हो जाता और टेबल पर माथा रखकर सो जाता था !
कुछ समय बाद, बिनय की प्रेजेंटेशन  और डिफेंस  की तारीख आगई ! रबि से मंगल तीन दिन की होली की छुट्टी थी  बुधवार को उसे  यात्रा करना था ! मैंने बिनय से कहा मैं भी आपके साथ जाऊंगी ? बिनय बोला नहीं तुम यही रहोगी, मुझे अगर किसी चीज की आवश्यकता हुई तो मै  तुम्हे फ़ोन करूंगा !  और मैंने कुछ नहीं कहा, मैंने एक सेंड ऑफ पार्टी विनय के लिए शनिवार को रक्खा, और उसे शनिवार दोपहर चार बजे आने के लिए कहा! मैं बिनय को  मुझसे दूर नहीं  भेजना चाहती थी जब तक कि वह मुझे अपना नहीं लेता था ! कौन जानता है कि कोई अनजान लड़की मेरे भोले बंधू  को मुझसे छीन ले, अलग कर दे  ! इस  डर से मैं जितना जल्दी संभव हो उतना जल्दी बिनय को  प्राप्त करना चाहती  थी ! और यह पार्टी मुझे वह मौका जरूर देगी! यह मेरे जीने मरने की समस्या है! आप मुझे स्वार्थी समझ सकते हैं, लेकिन मेरे पास ऐसा करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था! दोपहर के करीब चार बजे बिनय  आए, मैंने दो फिल्म के टिकट काट के रक्खे थे  और हम सिनेमा हॉल आ गए, फिल्म देखकर बहुत खुशी हुई! मैं उसे कभी-कभी गले लगा रही  थी  और उसने कोई आपत्ति नहीं की थी! पार्टी के लिए मैं पहले से ही बहुत सारे खाद्य फल और शैम्पेन की एक बोतल ले आयी  थी !घर आकर
हम दोनोंने  हॉट कॉफ़ी और स्नैक्स खा लिए ! मैंने सोचा, शेर आज इतना बकरी का आज्ञाकारी क्यों हो गया है! विनय एक अच्छे लड़के के तरह बाथरूम गया और नहा धो कर आया और TV देखने लगा ! मै  भी नहाकर खुले बालो  में बिनय  के सामने आकर खड़ी  हो गयी ! विनय ने मुझे कभी इस रूप में नहीं देखा था  इसलिए मुझे देखता ही रहा मैंने कहा कि आप मेरे में क्या  तलाश कर रहे हैं ? मैंने आपको कभी खुले बालों के साथ नहीं देखा है इसलिए देख रहा हूँ ! मैंने टीवी बंद कर दिया और धीरे-धीरे संगीत बजाना शुरू किया, फिर मैंने विनय से  कहा कि आप नृत्य कर सकते हैं और उसने कहा कि जब मैं छात्र संघ का सचिब था, तब  मैं समारोह में थोड़ा बहुत लड़कियों के साथ नृत्य किया करता था ! मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और हम दोनों नाचने लगे, मैं साफ देख सकता था जब हमारा शरीर एक-दूसरे को छू रहा था, तब बिनय का  चेहरा लाल हो जारहा था! मैंने उसे एक पेय कंटेनर में शैंपेन दिया और मैंने एक ले लिया! हमने ध्यान नहीं दिया कि रात के 8 बज चुके थे! हमने नाचना बंद कर दिया और खाना खाने बैठ गए! खाने के बाद, हमने बाकी शैंपेन समाप्त कर दीया! और ऐसा करते करते रात के ११ बज गए ! मैंने बाहर का दरवाजा बंद कर दिया! बिनय ने कहा अब मुझे जाना होगा !मैंने कहा कहाँ जाना है? और उसने कहा  मै लैब  जाके थीसिस का टेक्स्ट को एकबार दोहराना चाहता हूँ !मैं थोड़ा नशे में थी   मैंने उससे कहा कि तुम्हारी लैब यहाँ है और मैंने उसे अपने बिस्तर पर लेटा दिया और उसने कहा कि तुम कहाँ लेटोगी अब ?  मैंने कहा यही तुम्हारे पास यह कहते हुए मैंने बत्ती बुझा दी ! यह विनय का पहला मौका था जब उसने मुझे अपने बहो में जकड लिया था मुझे गले लगाया, मैंने भी उसे पकड़ लिया और उससे कहा कि मेरे प्यार की जीत हुई ! विनय ने कहा  - अब शांतिमिली तुम्हे ?
मैंने कहा अवश्य, तुम्हारे मन में मेरे प्रति प्रेम तो था लेकिन किन्ही कारनो से तुम मुझसे दूरी बनाये हुए थे शायद मै ईसाई हूँ या तुम मेरे परिवार बालो को नहीं जानते हो या तुम किसी और से प्रेम करते हो !
बिनय  ने मुझसे कहा --- नहीं ऐसी कोई बात नहीं है मै अपनी माँ को तुम्हारे बारे में बता चूका हूँ  लेकिन वह तुम्हे बगैर देखे अपनी बहु नहीं बनाएगी ? मैंने कहा ठीक है तुम्हारे वापस आने के बाद हम माताजी से मिलने जायेंगे !
बिनय बोला लेकिन इसके अलावा भी एक बात है ?
मैने कहा --- वह क्या ?
बिनय ने कहा ---हमने अभी शादी नहीं की है! मैंने कहा नहीं हुई तो क्या हुआ? हो  जाएगा
बिनय  ने कहा-- कि इस बीच अगर कोई दुर्घटना हुई तो ? मैंने कहा आप कुछ मत सोचे  मैं सब  संभाल
लूंगी ! बिबेक ने कहा मैंने सुना था आसाम महिला प्रधान राज्य है, और आज यह देख रहा हूँ !मैंने कहा बिबेक तुम मुझे चाहते हो की नहीं ? बिनय ने कहा खुद से भी ज्यादा ! मैंने कहा फिर तुमने मुझसे प्यार का इजहार क्यू नहीं किया ? बिनय ने कहा मेरे आत्मविश्वास में कमी थी, मै  पहले अपने आप को तुम्हारे और तुम्हारे परिवार के सामने एक उपयुक्त पति  जो तुम जैसे सुंदरी बिदुषी लड़की को स्थिर घर-संसार दे सके, बनना चाहता था ! एक डेमॉन्ट्रेटेर कैसे इस चुनौती को स्वीकार कर सकता है ! मैंने कहा बिनय जिसदिन मैंने तुम्हे पहलीबार देखा था मै उसीदिन तुम पर फ़िदा हो गई थीं और तुम्हे हासिल करना चाहती थी लेकिन तुमने तो बैराग्य धारण कर रखा था अंत में मै  हार कर हम दोनों का सुहाग रात रचाया तुम्हारे जाने से पहले, क्यू की मै तुम्हे बिना पाए अकेले इलाहबाद नहीं जाने देना चाहती थी ! बिनय बोला  वह क्यू ? मैंने कहा बिनय तुम मेरे सबसे कीमती धरोहर हो और मुझे डर था की तुम्हे मुझसे कोई छीन न ले ! मेरा मन तो कहता था की तुम मुझे चाहते हो किन्तु तुमने कभी भी इस चाहत का प्रदर्शन  नहीं किया था !  तुम स्वतंत्र थे और मेरे प्यार को ठुकरा सकते थे लेकिन आज मैंने तुम्हे पा लिया है, अब तुम कंही भी जा सकते हो, मुझे अब किसी बात का कोई डर नहीं है ! बिनय ने मुझे कहा रॉस
मै भी तुम्हे चाहता हूँ उसी दिन से जिस दिन मैंने तुम्हारे हाँथ को स्पर्श किया था !लेकिन मेरा लक्ष था मेरा शोध कार्य जो सम्पूर्ण नहीं हुआ था और बिना उपयुक्त पद हासिल किये बिना तुम्हे प्रोपोज़ नहीं कर सकता था ! अभीभी मुझे डर है की इस मिलान का अंत कोई दुखद घटना को अंजाम दे दे ! मैंने कहा बिनय तुम्हे इस बात  चिंता नहीं करनी है मैं सब सम्हाल लुंगी !

मेरे आत्मविश्वास और मन की शक्ति को देखकर बिनय ने अपना संकोच को त्याग दिया !फिर हम देश और दुनिया को भूल गए और एक दूसरे के हो गए बिना किसी हिचकिचाहट के !  इस कमरे में हम   कबतक रहे हमें मालूम नहीं थव! मकान के बाहर  होली है होली है के नारे लगाने वाले पड़ोसियों ने तोड़ा हमारा नशा!  । होली की चीखें हमें डरा रही थीं और हम  धीरे-धीरे अपनी असल जिंदगी में वापस आ गए! हमें लगा कि मुझे इतनी भूख लगी है कि मैंने कंडेंस्ड मिल्क से कॉफी का एक फ्लास्क बनाया और हम दोनों पुराने ब्रेड और बन के साथ नाश्ता किया! मैं दोपहर और रात का भोजन  रेस्तराँ से ले आयी , और बुधवार को मैंने बिनॉय को इलाहाबाद की बस में चढ़ा दिया और  घर लौट कर आयी और सो गयी निश्चिन्त होकर !मन में शांति थी की, अब बिनॉय मेरा है, अब कोई लड़की मेरे बिनॉय को छू तक नहीं सकती! वह कोई भी हो? रिश्तेदार, दोस्त, जाति और धर्म किसी का भी  कोई बाधा या दबाओ हम दोनों पर नहीं है! मैं अगले दिन चर्च गयी  और बिनय  के लिए प्रार्थना की! शुक्रवार को बिनॉय के फोन की घंटी बजी और उसने  एक अच्छा प्रेजेंटेशन होने का सम्बाद दिया और परीक्षको ने बिनॉय को बधाई दी, और वह जल्द ही वापस आ जाएगा! लेकिन बिनय नहीं आया जब 15 दिनो के  बाद भी बिनॉय नहीं लौटा, तब  मैं इलाहाबाद गयी  और प्रोफेसर अरुण कुमार डे से मिली ।उन्होंने कहा कि बिनॉय शुक्रवार को यहां से चला गया था! मैंने पुलिस से शिकायत की लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ! मैंने अखबार में विज्ञापन दिया लेकिन कोई जबाब नहीं मिला! उसके बाद मैंने अपने शोध पर ध्यान केंद्रित किया, जैसे जैसे बिनॉय ने मुझे गाइड किया था, शोध के अच्छे परिणाम आरहे थे, और मैं  आगे बढ़ती गई ! मैं अनेको बार प्रोफेसर डे और डॉ. चौधरी से मिली !अस्पताल से बिभिन्न समय के अलग-अलग समय में रक्त नालियों में जमे  रक्त के थक्कों के नमूने लेने से, उस चमत्कारी  रसायन की जौगिक रचना करना संभव हो गया, जिनका उपयोग मानव शरीर में एक ही समय मे oxidised ऑक्सीकृत रक्त के थक्कों को पिघलाने के लिए किया जा सकता है! इस बीच, बिनॉय का पेपर नेचर मैगजीन में प्रकाशित हो चुकी थी और मेरा पेपर भी process में था कुछ दिनों में हम दोनों के नाम से प्रकाशित हो जाने वाला था ! प्रोफेसर दे ने मुझे यूनिवर्सिटी में सीनियर रिसर्च फेलो की पोस्टिंग करा दी  जहाँ मेरा हॉस्टल था उसके सामने मानसिक रूप से असंतुलित रोगी अस्पताल था! एक दिन मैं बिनॉय की तलाश में अस्पताल गयी  और सुपरिंटेंड  बिनॉय की एक तस्वीर दिखाई! फोटो देखकर डॉक्टर ने कहा कि यह सज्जन हमारे यहाँ २ साल से भर्ती हैं।दो साल पहले इनका एक बस दुर्घटना हुई थी! और उनके  के सिर में चोट लगी थी और वह रॉस रॉस कहकर पुकारते थे बांकी बाते उन्हें याद नहीं रही वे  सब कुछ भूल गये थे ! मैंने डाक्टर से कहा कि मैं रीटा रॉस हूं और उनका नाम डॉ बिनॉय हैं, जिन्होंने मनुष्य के नसों में खून के थक्कों को पिघलाने की दवा का आविष्कार किया है । मैंने अपनी कार से नेचर पत्रिका लाई और सभी को देखाया ! मैंने तुरंत भगवान का शुक्रिया अदा किया और बिनॉय के पास पहुँच गयी! पहले तो मैंने बिनॉय को गले लगाया और बहुत रोयी । बिनॉय ने मेरी तरफ देखा और कहा रॉस। मैंने कहा हाँ मैं ही रॉस हूँ! मैंने प्रोफेसर डे को सब कुछ बताया, उन्होंने मुझे एक फैमिली क्वार्टर दिया और मैं बिनॉय के साथ अपने क्वार्टर में आ गई  फिर बड़े बड़े  न्यूरोफिज़िशीयन  को दिखाया लेकिन सफलता की गारंटी कोई नहीं दे सका! फिर मैं लखनऊ गयी  और डॉ. चौधरी से बात की और उन्होंने कहा कि आपके पास एक रासायनिक नैदानिक ​​परीक्षण है! डॉ. चौधरी ने कहा चलो डायरेक्टर से बात करते हैं! निदेशक ने न्यूरो फिजिशियन से परामर्श किया और उन्होंने कहा कि चूंकि यह रसायन मानव संगत कम्पेटिबल है इसलिए यह दवा धीमी खुराक में दी जा सकती है! श्रीमान निदेशक ने मेरे शोध पत्र को दिल से पढ़ा और डॉ. चौधरी से चर्चा की! भगवान की कृपा से विनय सात दिनों में ठीक हो गया! और मैंने पूरी कहानी बिनय को सुनादी ! और बिनय ने कहा मेरी प्यारी बकरी अब शेरनी  में तब्दील  हो गयी है!
हम दोनों  घर वापस आकर जो पहला काम किया वह था शादी का पंजीकरण! हालां की मैंने हर शपथ पत्र में अपने को बिनय की  पत्नी लिखा था !माताजी को भी ले आये और तीनो सुख से रहने लगे !
 

No comments:

Post a Comment