Monday, March 22, 2021

ब्योमकेश बक्शी

 ब्योमकेश बक्शी

शरदेन्दु बन्द्योपाध्याय द्वारा रचित बांग्ला जासूसी कहानिया है। इसकी रचना आर्थर कोनन डायल द्वारा रचित महान साहित्यिक जासूस शरलोक होम्स से प्रेरणा लेकर हुई थी। शरदेन्दु जी ने सं 1942 से लेकर 1970 के बीच ब्योमकेश बक्शी की 32 कहानियाँ लिखी किन्तु असमय मृत्यु होने के कारण 33वीं कहानी अपूर्ण रही।


ब्योमकेश बक्शी की पहली कहानी "सत्यान्वेशी" ( सत्य की खोज करने वाला ) है तथा 32वीं कहानी "लोहार बिस्किट"( लोहे का बिस्किट) है। ब्योमकेश की मुलाकात 10वीं कहानी मे शरदेन्दु द्वारा रचित " बरोडा - द घोस्ट हन्टर " से होता है। ब्योमकेश के पहली कहानी मे खलनायक के रूप में डॉ अनुकूल बाबू सामने आते हैं। इसी कहानी में ब्योमकेश की मुलाकात अजित बनर्जी से होती है जो अन्य कहानी मे ब्योमकेश के परम मित्र के रूप में सामने आते है। डॉ अनुकूल बाबू चौथी कहानी मे खलनायक के रूप में फिर वापसी करते हैं।

ब्योमकेश आधारित पहली फिल्म महान बांग्ला लेखक, फिल्म निर्माता, आलोचक द्वारा निर्देशित 1942 मे आई चिड़ियाखाना है। 90 के दशक में ब्योमकेश आधारित चलचित्र दूरदर्शन मे आया। इस चलचित्र में ब्योमकेश का किरदार रजीत कपूर ने निभाया। ब्योमकेश की पत्नी का नाम सत्यवती है तथा ब्योमकेश के बेटे का नाम खोका है।
ब्योमकेश बख्शी के चरित्र के सहित लिखित कहानियाँ यह हैं:
सत्य का खोजी, रास्ते के कांटे, मस्तक का -हीरा, मकड़ी का रस अर्थमनअर्थम, quick sand चोरबालु, अग्निबाण, निष्कर्ष, खूनी नीलम, ब्योमकेश और बरदा, चित्र-चोर दुर्गरहस्य, चिड़ियाघर, आदिम रिपु, अग्नि-पतंगा, खून के धब्बे, नेकलेसआभूषण, अमृत ​​की मृत्यु, पहाड़ का रहस्य, अज्ञात पक्षी, कहिन कवि कालिदास, अदृश्य त्रिकोण, तलाश नारी की , अद्वितीय, मग्न मैनाक, दुष्चक्र, ताल की लय, कमरा नंबर दो, छल की छंद, hedgehog सेइ का काँटा, बेनीसंघार, लोहे के बिस्कुट, बिशुपाल का वध (अधूरा)   







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