मा का मोल
लेखक डॉ प्रदीप कुमार मैत्रा
अचानक दरवाजे की घंटी बज उठी ! तब करीब दिन के दो बज रहे थे, मैंने सोचा इस भरी दोपहरिया में कौन आया ? बाहर आकर देखा दरवाजा तो खुला है ! कमरेसे निकलकर देखा एक महिला जो करीब ७० साल की होगी बाहर खड़ी थी ! मुझे देख उस महिला ने धीरे से कुछ कहना चाहा ! पर मैंने उसे कह दिया हम लोगो को कुछ नहीं खरीदना है, महीने का अंत हो रहा है,अगले महीने आना ! लेकिन उस बृद्धाने डबडबाई आँखों से मेरे तरफ देखा और डरते हुए कहा, मै सामान नहीं बेचती !
उस महिलाको देखकर मुझे कुछ दर्द का आभास हुआ और मैंने कहा कहिये आप को क्या चाहिए ? महिला ने कहा मुझे एक गिलास पानी चाहिए गला सूख रहा है ! मैंने तुरंत महिला को एक गिलास पानी दिया और कहा आप बैठ जाइये हम बैठ कर बात करेंगे ! मैंने देखा उस महिला का परिधान मेरे जैसा ही था थोड़ा मैला जरूर हो गया था ! उसने बैठकर पानी पिया और कहा मेरा नाम सरिता है और मेरा मकान थोड़ा आगे है ! मै बहुत भूखी और कमजोर हूँ ! अगर आप दो रोटी खाने को देंगे तो मै बच जाउंगी ! मैंने कहा मेरा नाम दीप्ति है, मै इस घर की मालकिन हूँ, आप हाँथ मुँह धो लीजिये मै खाना लगाती हूँ ! खाना खाने के बाद महिला के शरीर में थोड़ा बल आया और उसने कहा तुमने मुझे आज मरने से बचा लिया भगवान आपलोंगो को सुखी रखे यही दुआ करती हूँ ! मैंने यह मन ही मन सोचा ऐसी बाते तो एक सेल्स रिप्रेजेन्टेटिव नहीं कर सकती ! मैंने कहा अब आप अपनी कहानी बताइये ! उसने थोड़ा हिचकिचाते हुए कहा मेरे पास घर द्वार, बच्चे बहु सब थे लेकिन आज कुछ भी नहीं है ! मैंने पूछा ऐसा क्या हुआ की आपको सबकुछ खोना पड़ा ? सरिता जी ने कहा,मेरे शादी के बाद मै अपने पति के साथ एक छोटे से मकान में किराये से रहती थी ! मेरे पति ने एकदिन मुझसे कहा सरिता मेरा प्रमोशन हुआ है अब मुझे ज्यादा तनख्वा मिलेगा , और हमलोग एक अच्छे मकान में शिफ्ट कर सकते हैं ! मैंने उनसे कहा मुझे कंही नहीं जाना है, आप कंपनी से होम लोन लेकर एक फ्लैट या बना बनाया मकान लेलो ! मेरे पति ने शहर के बहार एक जमीन मेरे नाम से ख़रीदली और इसके लिए मेरे सारे गहने उनको बेचने पड़े ! फिर उन्होंने लोन लेकर मकान बनाना चालू किया और आधा मकान किराये में दिया ! मै घर में स्कूली बच्चो को पढ़ाती थी, पति भी कुछ काम कर अधिक पैसा घर लाते थे ! पांच साल के कठोर परिश्रम से हम दोनों ने उधारी के सारे रूपए चूका दिए !
इसके बाद मेरे दो बच्चे पैदा हुए और हम लोंगो ने बच्चो की अच्छी परवरिश की, उनलोगो पढ़ा लिखा कर इस काबिल बनाया कि उन्हें अच्छी नौकरी मिल सके ! नौकरी मिलने के उपरांत हम लोगोने उनकी शादी भी करदी और सब एक साथ ही रहने लगे ! थोड़े दिनो के बाद कहते कहते सरिताजी रोने लगी तब मैंने उनका आंसू पोछे और कहा आप मत रोइये आगे बताइये क्या हुआ ? उन्होंने कहा इसके बाद मेरे पति का देहांत हो गया ! अब मै अकेली हो गई, दोनों भाइयो ने मकान आपने नाम करना चाहा लेकिन मै इस बात से सहमत नहीं थी ! बहुये आपस में लड़ती रहती और अलग हो गई ! मै अपना खाना खुद बनाती थी और खाती थी ! एक दिन बच्चो ने कहा माँ इस मकान को प्रमोटर को दे देते हैं वह हम लोंगो को तीन फ्लैट देगा मै इस बात पर भी राजी नहीं हुई ! तब उन लोंगो ने मेरे कमरे में ताला लगा दिया ! मै भूखी प्यासी अपने कमरे के सामने दोदिन बैठि रहि किसीने भी मेरी मदत नहीं की, मै थाने में रिपोर्ट लिखाने गई तो पुलिस आकर मेरे कमरे का ताला खुलबाया और मेरे दोनों बेटो को धमकाया और कहा माँ के साथ ऐसा बदसलूकी करोगे तो थाने में बंद कर दूंगा ! पहले तो वह दोनों डरे लेकिन उन लोगोने पैसे देकर थानेदार को अपने तरफ कर लिया फिर मुझे घर से बाहर कर गेट में ताला लगा दिया ! मै निराश होकर सड़क पर भटक रही थी तभी मैंने आपको देखा और मुझे लगा की आप मेरी सहायता कर सकती है ! मैंने कहा दीदी आपने सही सोचा है मै आपकी मदत करुँगी ! मेरा बेटा रमेश हाई कोर्ट में अधिवक्ता है वह सब ठीक कर देगा !
शाम को जब रमेश घर आया तो मैंने उसे सब सुनाया और कहा तुम्हे इस महिला का काम कर देना होगा मैंने इसे बचन दिया है ! इनका नाम सरिता शर्मा है इनका मकान इसी रास्ते पर है ! रमेश ने कहा माँ मेरे पिताजी के जो मुवक्किल थे उनमे से एक नाम सरिता शर्मा है ! रमेश मेरे पति के चेम्बर को खोला और वहां से एक पुराना फाइल लेकर आया और सरिता देबी को दिया और कहा देखिये यह आपका है की नहीं ! सरिता ने ख़ुशी से कहा हाँ यह मेरा ही है मेरे पति ने जब जमीन ख़रीदा था तब आप के पिताजी से इसका रजिस्ट्रेशन करवाया था ! रमेश ने कहा जी आप सही कह रही हैं अंकल जी ने अपने मकान के सब दस्ताबेज मेरे पिताजी के पास रक्खे थे,क्यू की आपका माकन काफी असुरक्षित था उस समय !
मुझे याद है आप के मकान के पास एक तालाब है जिसमे हम लोग नहाने जाते थे और हम लोग आप के घरमे खाना भी खाये है ! आपके दोनों बच्चे मुझसे काफी छोटे थे उस समय ! कल मै थाने में आपका FIR जमा करूँगा !
मैंने कहा दीदी मैंने आपके पति शर्माजी को देखा है बहुत ही मिलनसार इंसान थे उन्होंने कहा था की आपके प्रचेष्टा से ही यह मकान बना है ! आप को हर हालत में यह मकान वापस मिलेगा और आपके पुत्रो को उनके किये की सजा भी मिलेगी ! सरिता जी ने कहा नहीं बहन मेरे बच्चो को सजा से बचाइयेगा वे नादान हैं !
दूसरे दिन रमेश सरिता जी के घर पुलिस लेकर गए और पूंछा यह माकन किसका है ? सरिता जी के दोनों बेटे मोहन और सोहन, घर पर उपस्थित थे, दोनों ने कहा यह घर मेरा है ! तब उनसे मकान का दस्ताबेज माँगा गया जो उनके पास नहीं था ! तब थानेदार ने कहा अब आप घर खाली कीजिये हमको मकान सील करना है ! मोहन बोले आप हमें आपने माँ के घर से कैसे बेदखल कर सकते हैं ! आप के पास कोर्ट का आर्डर है क्या ? कोर्ट का आर्डर और सजा दोनों आप चारो को मिलेगा और जेल भी हो सकती है, माँ को घर से निकलने के लिए ! सोहन बोला आपको किसने कहा की हम लोगोने माँ को घर से निकला है ? थानेदार ने कहा आपके माँ ने थाने में आप चारो के खिलाफ FIR दर्ज किया है ! अब आपलोग इस घर से निकलो नहीतो आप लोंगो को जबरन निकालना पड़ेगा ! इस बात पर दोनों बहुये नीता और गीता आपने अपने मइके चली गई और मोहन और सोहन घरमे ताला लगाकर बाहर आगये ! दोनों भाई रोने लगे और पूंछा हमारे माताजी कहाँ है ! हमसे बड़ी भूल हुई उनसे हमें माफ़ी मांगना है ! रमेशने कहा भूल तो माफ़ हो सकता है लेकिन आप चारो ने पाप किया है उसकी सजा आप सब को मिलेगी !
इतने में मोहन सोहन के ससुर भी आ गए उनलोगोने सब सुना और कहा इन चारो ने महापाप किया है ! दरोगाजी बोले अब हमको इनके दफ्तर में जाकर कंपनी के मालिक से बात करनी होगी की ऐसे अपराधी को काम पर क्यू रखना ? अब दोनों भाई रमेशजी का पैर पकड़ लिया और रोने लगे ! रमेश ने कहा कल तुम्हारे माँ की जो दशा हुई थी वह आज तुम्हारी हो रही है ! अब समझ में आ रहा है की अपनेही घर से बेदखल होने पर कितना कष्ट होता है ! तुम्हारे माँ ने एक एक ईंट जोड़ कर भूखे रहकर रात दिन मेहनत कर यह घर बनाया था तुमलोगो को शिक्षित किया और तुमलोगोंने ही उन्हें घर से निकाल दिया ?
अब मोहन-सोहन ने कहा अब हम कभी ऐसा अपराध नहीं करेंगे आप सिर्फ यह बता दीजिये की मेरी माँ कहा है ? रमेश ने कहा वह तो थाने में रिपोर्ट लिखाकर चली गई है ! अब तुम लोग ढूंढो अपनी माँ को !
मकान में ताला लगाकर रमेश अपने घर वापस आये और सरिता जी से सब कहा तब सरिता जी ने कहा तुम लोंगो ने घर में ताला क्यू लगा दिया ? रमेश ने कहा मोहन और सोहन ने जो पाप किया उसका फल तो उन्हें भोगना ही पडेगा !
अब मै बोली सरिता दीदी आप हमारे साथ ही रहेंगी आपके मकान में एक वृद्धाश्रम खोल देंगे ! आपके बेटे नौकरी करते हैं कोई बेकार नहीं जो भूखे मरेंगे ! रमेश उन लोंगो का खैरियत का समाचार आप को देता रहेगा, आप चिंता न करे ! छह महीने बाद रमेश मोहन और सोहन को अपने घर लाएंगे और देखेंगे उनके मनोभाव में क्या परिवर्तन हुआ है ! वृद्धाश्रम बढ़िया चलने लगा ! मोहन और सोहन बीच बीच में आते रहते, पर दरवान उन लोंगो को घुसने नहीं देता था ! रमेश ने उस वृद्धाश्रम को चार मंजिला और सर्वेसुबिधा पूर्ण बना दिया और करीब ५०--६० वृद्ध और वृद्धाये उसमे रहने लगे ! करीब साल भर बाद रमेश ने मोहन और सोहन को उनके घर के दफ्तर में बुलाया पत्नियों के साथ ! मोहन की पत्नी आई थी सोहन की नहीं आई ! सोहन ने बताया उसकी पत्नी ने उसे तलाक दे दिया है ! मोहन की पत्नी नीता गर्भवती थी उसने कहा मुझे माजी के पास जाना है ! अब मै कमरे के अंदर आई और कहा तुम लोंगो ने तो माजी को घर से निकाल दिया था अब क्यू माजी के पास जाना है ? उसने कहा तब मै बच्ची थी मा का मोल नहीं जानती थी अब मै माँ बनने वाली हूँ माँ और संतान का रिश्ता मुझे पता चल गया है !
मोहन और सोहन ने कहा रमेश बाबू हम लोंगो को मकान नहीं चाहिए हमें अपनी माँ चाहिए ! रमेश ने कहा आप लोंगो को माँ चाहिए तो माँ को घर से क्यू निकला था ! मोहन ने कहा हम लोग माँ की कमी कभी भी महसूस नहीं की थी, माँ के जाने के बाद हम अनाथ हो गए हैं हमें हमारी माँ चाहिए और कुछ नहीं !
इतना सुनते ही सरिता जी आपने को रोक नहीं पाई और दौड़ कर बाहर आ गई और दोनों बच्चोको गले लगाया बहु को भी प्यार किया ! तीनो सरिता जी के पैर पर गिरके माँ माफ़ करो माफ़ करो कह कर रोने लगे ! सरिता जी ने बच्चो को कहा तुमलोग तुम्हारे दीप्ती मौसी और रमेश भैया से छमा मागो ! जिस दिन तुमलोगोंने मुझे बेघर किया था उसी दिन दीप्ती मौसी ने मुझ बेसहारा को सहारा दिया था !
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