Sunday, June 10, 2018

प्रीती की शादी

प्रीती की शादी
दोस्तों जैसा की आपने प्रीति की तपस्या में पढ़ा वह प्रदीप के आने के बाद अस्पताल से ठीक होकर घर लौटती है ! इसके बाद एक दिन दोनों यूनिवर्सिटी गए ! इन लोंगो का किस्सा इतना फ़ैल चूका था की काफी लोग लोंग इनको देखने आये और उसी दिन शाम को एक शानदार पार्टी भी उन दोनों के लिए आयोजन किया गया !
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दुसरे दिन हम दोनों प्रीति के माता (माया देबि) और पिता (प्रीतम सिंह) से मिलने गए ! प्रीती की माँ बंगाली थी और पिता पंजाबी दोनों का भी प्रेम बिबाह हुआ था ! माया जी मुझे देख कर बहुत खुश हुई !प्रीतम जी भी मुझे दामाद जी कह कर मेरी काफी सराहना की और अलमारी से बेशकीमती मदिरा निकली मैंने कहा सरजी मै दारू नहीं पीता हूँ मुझे छमा करे ! प्रीतमजी बोले बरखुरदार पंजाबी का दामाद दारू नहीं पियेगा तो उसकी तौहीन होगी ! माया जी बोली जब दामाद जी नहीं पीना चाहते हैं तो आप क्यू उसे परेशां कर रहे हैं ! मेरा बियर पीने का मामूली तजुर्बा था इसलिए मैंने प्रीतमजी से कहा सर थोड़ा दीजियेगा जिससे मै मदहोश न हो जाऊ ! लेकिन बातो बातो में मैंने अपनी क्षमता से थोड़ा अधिक पी लिया था ! मायाजी ने बहुत अच्छा भोजन पकाया था ! भोजन के उपरांत हमलोग प्रीतीजी के कमरे में गए और वहां जाकर मै आश्चर्य चकित हो गया, सारे कमरे में मेरेा ही चित्र टंगे थे ! प्रीती का टुटा हुआ प्रोजेक्ट का बक्सा भी वहां सजा के रक्खा गया था ! प्रीती बोली देख रहे हो प्रदीप मै तुमको कितना चाहती हूँ और मै अकेले नहीं हम तीनो तुम्हे चाहते हैं !अगर तुम नहीं आते तो हम तीनो मर जाते !प्रीतम जी बोले प्रदीप तुम दोनों में प्यार मुहब्बत कैसे हुआ ? हम लोगो ने भी लव मर्रिज की थी लेकिन तुम्हारे सास ने कभी भी मेरी इस तरह आराधना नहीं की ! मै नशे में हमारी कहानी बताने लगा इतने में माया जी बोली सिंह जी आप को दारू चढ़ गया है क्या ? भला बताइये कई सज्जन अपने दामाद से ऐसी बाते करता है क्या ? प्रीतम जी बोले भागवान् मै पंजाबी हूँ और पंजाबी लोग दामाद को दोस्त की तरह मानते हैं !अब प्रीतीजी ने मोर्चा सभाला और कहा प्रदीप आओ हम तुमको मम्मी पापा का शादी का एल्बम दिखाते हैं मै बोला सिंह जी हम किसी और दिन इस बारे में बात करेंगे ! प्रीतीने मुझे एल्बम के साथ साथ अपने बचपन के फोटो भी दिखाए ! अब रात हो गई थी और हम लोंगो ने प्रीती के घर रात गुजारी ! एकदिन निगम सर ने भी हम दोनों को अपने घर बुलाकर रात को भोजन कराया !
इसके बाद हम लोगोने शहर से दूर एक जल प्रपात देखने गए, और वहां एक सरकारी अतिथिशाला में कमरा बुक कराया ! जब से हम प्रीती के पास आये है तबसे प्रीती मेरे साथ साये की तरह रह रही थी मुझे अकेले कभी नहीं छोड़ती थी ! हर बात में हंसती थी और मुझसे लिपट जाती थी,पर मै ऐसा कुछ नहीं करता था ! रात के समय डिनर के बाद प्रीती बोली प्रदीप तुम मुझे पाकर खुश नहीं हो क्या ? मैंने कहा तुम ऐसा क्यू कह रही हो ? अभी तो मुझे तुम्हे पाना है हम लोंगो के शादी के बाद ! प्रीति बोली हम लोग कब शादी कर रहे हैं ? मैंने कहा कम से कम एक महीना तो लगेगा ! हमारे तुम्हारे परिवार वाले आपस में बात करेंगे, बहुत सारे शादी के नियम होते हैं, रिश्तेदारों को बुलाना पड़ता है ! शादी के बाद मेरी सारी झिझक दूर हो जाएगी और हम लोग एक साधारण पति पत्नी की तरह रहने लगेंगे ! अब प्रीती बोली देखो प्रदीप मैंने तुम्हारे लिए तीन साल इंतज़ार किया है लेकिन अब नहीं कर सकती इंतज़ार ! मैंने कहा तुम सही कह रही हो ! लेकिन शादी के पहले हम दोनों के बीच आपसी समझौता होना चाहिए एक दुसरे को जानना चाहिए जिसे म्यूच्यूअल अंडरस्टैंडिंग कहते हैं ! मैंने कभी भी तुम्हे सिर्फ उस घटना को छोड़ कर तुम्हे पाने की मनस्थिति नहीं बनाई इसलिए मेरे मन में तुम्हारे लिए कुछ कमी रह जाती है ! यह सुनकर प्रीती मेरे पास आई और मुझे अपने आगोश में लेकर कहा बोलो प्रदीप अब कुछ महसूस की तुमने ! मैंने प्रीती से अपने को छुड़ाते हुए कहा यह क्या बच्चो जैसी हरकत कर रही हो !
मैंने कहा प्रीती मै बहुत दिन हुए यहाँ आया हूँ, अब मुझे अपने काम पर वापस जाना पड़ेगा ! नौकरी ठीक से नहीं करूँगा तो शादी कैसे करूँगा ! तुम मेरा मोबाइल फ़ोन नंबर अपने पास रखलो जब चाहे फ़ोन करना अब तुम्हे मुझे ढूढ़ने कंही नहीं जाना पड़ेगा ! प्रीतीने मेरे फ़ोन से एक मिस काल किया ! प्रीती मेरे और करीब आई और अपने बाहो में भरकर बोली मै भी तुम्हारे साथ जाउंगी ! जब तुम्हे एकबार पाया है अब मै किसी भी कीमत पर तुम्हे नहीं छोडूंगी ! मैंने कहा प्रीती मै तो तुम्हारा हो चूका हूँ अब तुम्हे क्या चिंता है ! वह बोली चिंता क्यू नहीं है ? तुमने आज तक मुझे नहीं कहा की तुम मुझे प्यार करते हो ? मैंने तुरंत उसके चेहरे को दोनों हांथो में लेकर उसकी आँखों में आंखे डाल के कहा प्रीती मै तुमसे प्यार करता हूँ ! यह कहते ही उसके आँखों से पानी बहने लगा और उसने मेरे कानो में फुसफुसाकर कहा प्रदीप तुमने यह बात कहने में इतनी देरी क्यू की ? क्यू यह बात कहने के लिए मुझे तुम्हे कहना पड़ा यह तो एक दान हुआ उपहार नहीं ! मैंने उसको अपने आगोश में लेकर उसे चुम्बन किया और कहा मै तुम्हे प्यार करता हूँ और तुमसे शादी करना चाहता हूँ ! प्रीती ने कहा ठीक है मै समझी, लेकिन यह बताओ अगर तुम मुझसे प्यार करते हो तो यह तीन साल तुम्हे मेरी याद क्यू नहीं आई !मैंने कहा सच तो यह है की मै तुमसे डरता था ! प्रीतिने कहा क्यू डरते थे मै कोई डायन हूँ जो तुम्हे खा जाउंगी ! मैंने कहा नहीं, तुम डायन नहीं हो ! लेकिन तुमने जो हरकत की थी मेरे लैब में आकर उससे मै तुमसे डरने लगा था ! तुमने मुझे धमकाया था की अगर मै तुमसे बात नहीं करूँगा तो तुम छत पर चढ़कर वहां से कूद जाओगी, तुम्हे मैंने जो बचन तीन साल पहले दिए थे या तुमने मुझसे हासिल किये थे वह कोई प्रेमी का बचन नहीं था बल्कि एक डरे हुए इन्सान का था जो तुमको चाहता जरूर था लेकिन तुम्हारा उग्र रूप देख कर डर गया था और किसी भी हालत में तुमसे अपना जान छुड़ाना चाहता था !और यही वह कारन था की मैंने तुम्हारा कोई खोज खबर नहीं लिया ! प्रीती ने रोते हुए कहा तुम्हारे अनजाने अबहेलना से मै इतना ज्यादा दुखी थी की अगर तुम मुझे उसदिन नकार देते तो पता नहीं मै क्या कर बैठती !इसलिए वह बात मैंने तुम्हे खोने के डर से कहा था, जिससे तुम मेरी प्रार्थना को थोड़ा तबज्जु दो ! लेकिन जब तुम मुझसे प्रेम ही नहीं करते थे तो तुम्हे डरने की क्या जरूरत थी ! मैंने कहा मेरे मन मै तुम्हारे लिए चाहत तो थी, और मै एक इंसान हूँ, मै कैसे तुम जैसे एक सूंदर मेधाबी छात्रा का हत्यारा बन सकता था ? ऐसा होने पर मै अंदर ही अंदर जल कर खोखला हो जाता, और मेरे इतने दिनों का अच्छा नाम एक मिनट में बदनाम हो सकता था ! प्रीती एक बात जान लो किसी को भी डराके तुम उसका प्यार नहीं पा सकती ! किसी का प्यार पाने के लिए तुम्हे उस इंसान को अपने तरफ आकर्षित करना होगा ! त्याग करना होगा ! मैं तुम्हारी योज्ञता से प्रभाबित था तुम्हारे सुंदरता से प्रभाबित था और यहाँ आने के बाद तुम्हारे त्याग से प्रभाबित हुआ तुम्हारे कमिटमेंट के प्रति निष्ठा से प्रभाबित हुआ ! प्रीती जब मै तुम्हे साईकिल में बिठाकर तुम्हारे घर जा रहा था तब मुझे बहुत अच्छा लगरहा था ! लेकिन साइकिल से गिरने के बाद मै तुम्हारे बहुत करीब आया जिससे मेरे मन में कामना जाग रही थी जो मुझे दुर्बल बना रहा था और यह दुर्बलता तुम्हारे लिए हानिकारक था इस लिए मै तुमसे बचता रहा ! प्रीती ने कहा प्रदीप मै छत से छलांग लगाने वाली बात कहने के लिए और तुम्हारे कोमल मन को ठेस पहुंचने के लिए तहे दिल से छमा चाहती हूँ ! मैंने यह बात अपनी दुनिया लुट जाने से बचाने के लिए एक स्वार्थी की तरह तुम्हारे ऊपर दवाव बनाया था जो गलत था यह मै समझ चुकी हूँ !यह कहते हुए वह पश्चाताप की आंसू बहाने लगी और मै उसके आंसू देखकर बिचलित होकर उसे अपने सीने से लगा कर उसके आंसू पोछने लगा और कहा जो हो गया उसे भूल जाओ !
अब मैंने प्रीती से पूंछा अब तुम मुझे बताओ तुम मुझसे प्यार क्यू करती हो और वह भी एक पगली की तरह और प्यार क्या होता है ! जिसके लिए तुमने इतनी जद्दोजहत की ! वह बोली बहुत लम्बी कहानी है रात बीत जाएगी सुनते सुनते ! मैंने कहा अच्छा तो है तुम बताओ मै सुनूंगा तुम्हारे मुँह से ! प्रीती बोली मैंने तुम्हे मेरे बचपन की तस्बीर दिखाई थी हैना ? उसमे मै राजकुमारी जैसी लगती हूँ न ? मैंने कहा उससे भी सूंदर ! प्रीती बोली मेरी माँ रोज मुझे कहानी सुनातीं थी जिसमे एक राजकुमार होता था जो एक सफ़ेद रंग का उड़नेवाला घोड़े की सबारी करता था, वह एक लाल रंग का कुर्ता पहनता था ! एक बार राजकुमारी को डाकुओ ने घेर लिया था ! राजकुमार भी वही से जा रहा था और उसने राजकुमारी को डाकुओ से बचाने के लिए चिल्लाते हुए देखा और राज कुमार को बुलाया ! राज कुमार घोड़े से उतारकर आया और डाकुओ से पूँछा यहाँ क्या हो रहा है ? डाकुओने कहा हम डाकू हैं और इस को लूट रहे है ! राजकुमार को गुस्सा आया और उसने डाकुओके सरदार को मार गिराया ! बांकी डाकू राजकुमार से डर कर भागने लगे ! राजकुमार ने कहा, कभी भी किसी लड़की का असन्मान मत करना , नहीं तो सबका हाल तुम्हारे सरदार जैसा होगा ! डाकुओने राजकुमारी से माफ़ी मांगी और जंगल भाग गए ! राजकुमार ने तब राजकुमारिको अपने घोड़े में बैठाया और राजकुमारी के महल के छत पर उतार दिया ! और उन दोनों में प्यार होगया ! उसी तरह जब मै कालेज आई तो तुम्हे देखा तुम्हारे उज्वल तन सुगठित शरीर लाल रंग का शर्ट और सफ़ेद मोटर साईकल को देखा जैसे तुम कोई राज कुमार हो ! तुम्हे देखने के लिए मै पागल हो जाती थी, तुमसे मिलना चाहती थी और अपने मन की बात बताना चाहती थी ! लेकिन तुम ऐसे थे की मेरे तरफ कभी भी देखा नहीं ! मै तुम्हे देखने के लिए तुम्हारे क्लास के सामने से बार बार गुजरती थी की काश तुम नज़र आजाओ ! तुमसे नज़र चार हो जाये !
एक दिन वह सुनहरा अबसर आया जब सेकंडईयर के लड़के हमारी रैगिंग कर रहे थे ! मुझे मोटी होने के उपरांत भी उन लोगों ने ५० बार उठ्ठक बैठक करने को कहा मै दसबार कर चुकी थी और वह लोग मुझे और ४० बार और करने को कह रहे थे ! इतने में तुम वहां से गुजर रहे थे तो मैंने तुम्हे बुलाया ! तुम्हारे आते ही वह लड़के चुप हो गए ! तुमने पूछा यहाँ क्या हो रहा है ? लड़कियों की रैगिंग कर रहे हो क्या ? एक लड़का बोलै इनसे उठ्ठक बैठक करा रहे है ! तुमको गुस्सा आया और तुमने उस लड़के को एक चांटा मारा और कहा कोई भी अगर लड़कियों को असन्मान करोगे तो कालेज से निकाल दिए जाओगे तुमने मुझसे कहा तुमने अच्छा किया जो मुझे बुलाया तुम इस लड़के को माफ़ कर दो और अपने क्लास में जाओ ! मुझे ऐसा लगा की तुम मेरे सपनो के राजकुमार हो और मैंने तुम्हारी छबि मेरे सीने में बसा लिया ! मुझे बाद में पता चला तुम स्टूडेंट यूनियन के सेक्रेटरी हो !
मैंने कहा तुम्हे मालूम नहीं है जिस दिन तुमने मुझे अपने दिल में बसाया था उसी दिन मैंने भी तुम्हे पसंद किया था (कल्पना में) और यही कारन था की मै तुम्हारे प्रति किसी का दूरब्यबहार नहीं सहन कर पाने के चलते उस लड़के को मारा था !और बाद में मेरा गुस्सा जब कम हुआ तो मैंने उस लड़के से माफ़ी भी मांगी ! उस लड़के ने मुझसे पूंछा था की वह लड़की आपकी कौन लगती है ? मैंने उसे कहा था दोस्त समय आने पर बताऊंगा ! मै तुम्हारे तरफ इसलिए देखता नहीं था की मेरी तुम्हारी दोस्ती कभी किसी के लिए समस्या न बने !
मैंने माँ को तुम्हारी बात बताई उन्होंने तुम्हे अपने साथ हमारे घर लाने को कहा था !लेकिन जब तुमसे मेरा परिचय ही नहीं था और तुम मुझे जानते तक नहीं थे तब मै तुम्हे किस आधार पर अपने घर आने का निमंत्रण देती ? एक दिन मै अपना स्कालरशिप फार्म तुम्हारे पास ले गई थी उसे भरवाने के लिए , लेकिन तुमने मेरे तरफ बिना देखे कहा था फार्म दस्तखत कर टेबल के ऊपर रख दो मै फार्म भरकर जमा कर दूंगा ! जब तीन साल के चेष्टा से भी मै तुम्हे अपने तरफ आकर्षित नहीं कर पाई तब मैंने तुम्हारे साथ टकराने, प्रोजेक्ट बॉक्स टूट जाने का बेहोश होने का अभिनय किया ! मेरा अभीनय कामयाब रहा मुझे तुम गोदी में उठाकर लैब तक ले गए इससे मुझे बहुत शांति मिली !तुम्हारे साथ नया प्रोजेक्ट बनाते हुए चार घंटे का तुम्हारा साथ मेरे जीवन का सबसे आनंदमय उप्लभ्धि था ! फिर तुम्हारे साथ साईकिल में सबार होना और गिर जाना, बस वही एक गलती हो गई थी मुझसे जिसके चलते मैंने तुम्हे फिर खो दिया था !
मैंने कहा प्रीती इस घटना का एक पहलु और भी हैं, प्रीती बोली वह क्या ? मैंने कहा इस तीन सालो के दौरान कई लड़किया मुझे पाने की कोशिश की ! कुछतो मेरे काफी नज़दीक आई लेकिन उसी वख्त तुम हम दोनों के बीच आई और मुझे अपने बहो में बांध लिया ! वह लड़किया मुझे बिबेक हींन और घमंडी समझने लगी और तुम मेरी रक्षा कबच बन कर रही ! यद्दपि उस छणिक मिलन के एहसास को सही नहीं ठहराया जा सकता है, फिर भी वह छाण मेरे दिलोदिमाग में घर कर गई थी और आज तक वह जगह से तुम्हे निष्काषित कर किसी और को नहीं दे सका हूँ इसीलिए आजतक मेरी कोई प्रेमिका नहीं है !
लेकिन इतना कहते ही मेरे हाँथ पैर सुन्न होने लगा और मुझे लगने लगा की मै प्रीती के मोह में अपना सुधबुध खो रहा हूँ ! प्रीती ने मुझे दोनों हांथो से झक झोरा और कहा क्या हुआ प्रदीप तुम ऐसे क्यू हो रहे हो ! मैंने कहा, तुम्हारे साथ मैंने कुछ गलत हरकत तो नहीं करदी ! प्रीती ने कहा हाँ तुमने की है तुम्हे इसका दंड मिलेगा यह कहते हुए उसने मुझे चुम्बन किया और कहा तुमने यह किया था मेरे साथ !
अब हम दोनों के बीच की झिझक काफी कम हो गयी थी और हम एक दुसरे के करीब आने लगे थे !प्रीति बोली प्रदीप तुमने जो म्यूच्यूअल अंडरस्टैंडिंग (आपसी समझौता) की बात कही थी शायद वह अब हो गई है ? मैंने कहा हो गयी है ! अब मेरे मन में कोई दुबिधा नहीं है !लेकिन -- प्रीति बोली क्या लेकिन ? मैंने कहा शादी से पहले एक लड़का और एक लड़की एकसाथ एक कमरे में रात गुजारना क्या सही है ! प्रीती ने कहा हम दोनों अब दोस्त हो गए है और बाते करते करते रात गुजार देंगे ! प्रीतिने कहा प्रदीप तुम इस आपसी समझौता का जश्न नहीं मनाओगे मैंने कहा कैसे ? उसने कहा मिठाई खाकर और अपने जंबो बैग से एक डब्बा मिठाई का निकाला और कहा माँ ने तुम्हारे लिए सन्देश (छेने की मिठाई )दिया है ! मैंने कहा लाओ खाके देखता हूँ प्रीती ने मिठाई निकाल कर मेरे मुँह में डाला और मैंने भी उसे खिलाया ! इसके बाद मैंने देखा प्रीती के बैग में एक शैम्पेन की बोतल थी ! मैंने कहा प्रीती तुम शैम्पेन पीती हो क्या ?उसने कहा यह तोफा तुम्हारे ससुरजी ने अपने दामाद को दिया है !मैंने बोतल को देख कर कहा वैसे मै शराब नहीं पीता हूँ लेकिन क्या करूँ ? प्रीती बोली तुम्हारी मर्जी अगर नहीं पीना है तो मत पियो !मैंने कहा नहीं पीने से उनकी तौहीन होगी यह कहते हुए मैंने बोतल लेकर धीरे से उसका सील खोला और एक गिलास में धीरे धीरे शराब को डाला, और प्रीती से कहा तुमभी थोड़ा चख के देखो यह मीठा होता है ! लेकिन यह क्या शैम्पेन में इतना नशा होता है मुझे मालूम नहीं था !
हम दोनों एक दिन के लिए अतिथि निवास में ठहरने आये थे और तीन दिन और तीन रात कैसे बीता मुझे मालूम नहीं ! चौथे दिन प्रीती ने कहा।, माँ का फ़ोन आया था घर में सब परेशां हैं ! आज यहासे चलना है !मेरा मन और दो चार दिन ठहरने का हो रहा था लेकिन प्रीतिने कहा अगर तुम नहीं चलोगे तो पापा तुमको लेने आजायेंगे समझे ! हमलोग जब पीती के घर पहुंचे तो देखा मकान सजा हुआ है और घर में मेहमान भरे पड़े हैं ! उसी दोपहर को पंजाबी प्रथा से हम दोनों की शादी धूम धाम से हो गई !दुसरे दिन बिदाई संमेलन का आयोजन था और मैंने देखा गाड़ी के चारो तरफ लिखा था "आख़िरकार प्रीतिने शादी की प्रदीप से"
लेखक डॉ प्रदीप कुमार मोइत्रा ११/६/१८प्रीती की शादी

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