रिश्वत
दोस्तों आज आपको एक कहानी सुनाता हूँ ! यह कहानी ६० की दशक की है ! मै हाई स्कूल पास कर लिया था और कालेज जाने की तयारी में था ! मेरे पिताजी रिटायर हो चुके थे और इलाहबाद में काम कर रहे थे ! मै रीवा में मेरे फुफेरे भाई के यहाँ रहकर कालेज की तयारी कर रहा था ! भाई साहब बिजली के ठेकेदार थे और उनको किसी काम से सीधी जाना था ! उन्होंने मुझे बुलाकर कहा तुमको कल मेरा एक काम करना होगा मैंने कहा क्या काम भाईसाहब ? उन्होंने कहा यह लो ५ रूपए इसे कल PWD ऑफिस में जाकर फला बाबू कोअलग बुलाकर
दे देना ! उस ज़माने में रिश्वत लेना या देना एक बड़ा अपराध था अफसर बहुत कम होते थे ! सबसे बड़ा अफसर चीफ इंजीनियर उसके बाद एक्सिक्यूटिव या डिविशनल इंजीनियर होता था !
ठेकेदार लोग अधिक मुनाफा कमाने के लिए इंजीनियर के सामने कुत्ते की तरह दुम हिलाते रहते थे !,सबसे पहले बिल ऑफ़ मेटेरियल पेश होता था पक्के रसीद के साथ ! इस बिलके आधार पर ठेकेदारों को एडवांस मिलता था !इसके बाद काम पूरा होने पर साइट सुपरवाइजर के द्वारा बिल ऑफ़ मेज़रमेंट पास कराया जाता था और बाबू लोग इस बिलको पास कराते थे और उनका एक दक्षिणा होता था !
शयद भाई साहब को बाबू को दक्षिणा देना था ! मै दूसरे दिन PWD ऑफिस पहुंचकर फला बाबूसे जाकर कहा फला ठेकेदार के पास से आया हूँ ! बाबू ने इधर उधर देख कर मुझे धीरे से कहा उस कोने में जो कुर्सी मेज लगी है उसमे जाकर बैठ जाओ ! मै वहाँ जाकर बैठ गया ! करी १५ मिनट बाद बाबू आकर मेरे बगल वाली कुर्सी में बैठ गया और मेरे कालेज के बारे में बात करने लगा ! फिर उसने मेरे जांघ को दबाने लगा मैंने उसका हाथ झटक दिया !थोड़ी देर बाद वह फिर वही हरकत करने लगा ! मै समझ गया की यह HOMO है मै उसे मारने के लिए हाथ उठया तो उसने अंगूठेसे पैसे का इशारा किया और धीरे से कहा टेबल के नीचे से दे जिससे किसीको दिखाई न दे ! अबमेरे समझ में आगया की क्या माजरा है ! बाबू पैसा लेकर नमस्ते कर भाग गया ! इसके बाद मै खूब हँसा और हसता ही रहा !
दोस्तों आज आपको एक कहानी सुनाता हूँ ! यह कहानी ६० की दशक की है ! मै हाई स्कूल पास कर लिया था और कालेज जाने की तयारी में था ! मेरे पिताजी रिटायर हो चुके थे और इलाहबाद में काम कर रहे थे ! मै रीवा में मेरे फुफेरे भाई के यहाँ रहकर कालेज की तयारी कर रहा था ! भाई साहब बिजली के ठेकेदार थे और उनको किसी काम से सीधी जाना था ! उन्होंने मुझे बुलाकर कहा तुमको कल मेरा एक काम करना होगा मैंने कहा क्या काम भाईसाहब ? उन्होंने कहा यह लो ५ रूपए इसे कल PWD ऑफिस में जाकर फला बाबू कोअलग बुलाकर
दे देना ! उस ज़माने में रिश्वत लेना या देना एक बड़ा अपराध था अफसर बहुत कम होते थे ! सबसे बड़ा अफसर चीफ इंजीनियर उसके बाद एक्सिक्यूटिव या डिविशनल इंजीनियर होता था !
ठेकेदार लोग अधिक मुनाफा कमाने के लिए इंजीनियर के सामने कुत्ते की तरह दुम हिलाते रहते थे !,सबसे पहले बिल ऑफ़ मेटेरियल पेश होता था पक्के रसीद के साथ ! इस बिलके आधार पर ठेकेदारों को एडवांस मिलता था !इसके बाद काम पूरा होने पर साइट सुपरवाइजर के द्वारा बिल ऑफ़ मेज़रमेंट पास कराया जाता था और बाबू लोग इस बिलको पास कराते थे और उनका एक दक्षिणा होता था !
शयद भाई साहब को बाबू को दक्षिणा देना था ! मै दूसरे दिन PWD ऑफिस पहुंचकर फला बाबूसे जाकर कहा फला ठेकेदार के पास से आया हूँ ! बाबू ने इधर उधर देख कर मुझे धीरे से कहा उस कोने में जो कुर्सी मेज लगी है उसमे जाकर बैठ जाओ ! मै वहाँ जाकर बैठ गया ! करी १५ मिनट बाद बाबू आकर मेरे बगल वाली कुर्सी में बैठ गया और मेरे कालेज के बारे में बात करने लगा ! फिर उसने मेरे जांघ को दबाने लगा मैंने उसका हाथ झटक दिया !थोड़ी देर बाद वह फिर वही हरकत करने लगा ! मै समझ गया की यह HOMO है मै उसे मारने के लिए हाथ उठया तो उसने अंगूठेसे पैसे का इशारा किया और धीरे से कहा टेबल के नीचे से दे जिससे किसीको दिखाई न दे ! अबमेरे समझ में आगया की क्या माजरा है ! बाबू पैसा लेकर नमस्ते कर भाग गया ! इसके बाद मै खूब हँसा और हसता ही रहा !
ऑमलेट
======
दोस्तों आपलोग तो जानते ही है की मेरे स्वर्गीय बाबूजी बिजली इंजिनीअर थे और उन्होंने BHU जिसमे बनारस इंजीनियरिंग कालेज या BANCO था जो मदन मोहन मालबियाजी के प्रचेष्टा से बना था ! और वह VC थे और हॉस्टल के वार्डन भी थे, हॉस्टल में NON VEG बनाना और खाना अबैध था ! पकडे जाने पर छात्रों को कालेज से निष्काषित भी किया जा सकता था ! बाबूजी फुटबॉल के कप्तान थे और उनका चयन अच्छे फुटबॉलर के चलते हुआ था और उन्हें शॉलरशिप भी इसी वजह मिलता था !
एक बार सब फुटबॉलर लोंगो ने रविबार के दिन ऑमलेट और चाय पीने का प्रोग्राम बाबूजी के कमरे में किया गया !
बाबूजी के कमरे में इतने लड़को का जमाबेडा देख कर बिरोधी छात्रों को पता चलगया की यहाँ क्या हो रहा है ?
अब इतने लोंगो का ऑमलेट अलग अलग नहीं बन सकता था इसलिए बड़े साइज़ का ऑमलेट केरोसिन के स्टोव पर बन रहा था लेकिन ऑमलेट की खुशबू चारो तरफ फ़ैल रही थी ! एक बिरोधी छात्र चुपके चुपके वार्डन के पास कंप्लेंट लेकर गया की हॉस्टल में अंडा पक रहा है ! फुटबॉलर भी अपना मुखबिर लगा रक्खी थी की कोई वार्डन के यहाँ कंप्लेंट तो ठोक नहीं रहा है ?
और मुखबिर दौड़ते हुए आकर सुचना दी की वार्डन को कम्प्लेन मिला है और वह खड़ाऊ पहन कर खट खटाते हुए आरहे है ?
यह सुन ते ही सब लड़के भागकर इधर उधर छुप गए !
बाबूजी अब क्या करते सब अंडे का छिलका बीन कर रूमाल में बांध दिया और गरम सॉसपैन ऑमलेट सहित
चमड़े के सूटकेस के अंदर डाल दिया और सूटकेस में ताला डालकर पलंग के नीचे छुपा दिया !स्टोव पर चाय की केतली रखदी गई और पंखा चला दिया गया खिड़की खोलदी गई ! फिर भी थोड़ा बहुत गंध कमरे में रह गई !
लेकिन खड़ाऊ का आवाज़ नहीं आरहा था ! अब बिरोधी छात्र भी दो चक्कर लगा लिया और कही झूठा साबित होने के डर से छट फटा रहा था ! करीब दस मिनट बाद मालबिया जी पधारे और शिकायत करनेवालों से पूंछा कौन से कमरे अंडा पक रहा है ! लड़कोने बाबूजी का कमरा दिखाया ! मालबिया जी कमरे के बाहर खड़े होकर बोले यहाँ तो कोई गंध नहीं है ! अब क्या था बाबूजी किताब हाथ में लेकर बाहर आकर मालबिया जी को प्रणाम किया ! मालबिया जी बोले यह मेरा चयन किया फुटबॉलर है और अब कप्तान भी है ! फिर वह अंदर घुस कर इधर उधर सूंघ कर बोले तुम अंडा खाते हो ? बाबूजी बोले हाँ खाता तो हूँ पर बाहर खाता हूँ क्यू की हॉस्टल में खाना मना है ! पंडित जी फिर बोले पंखा क्यू चला रक्खी है !बाबूजी बोले मुझे तो कोई गंध नहीं मिल रहा था लेकिन एक लड़का बोलरहा था की अंडा पक रहा है उसका गंध आरहा है ! इसलिए चला दिया ! अब मालबिया जी ने पढाई और खेल के बारे में बात की और बाबूजी को लेकर अपने ऑफिस के तरफ चल दिए ! बाबूजी जब वापस आये तो सबने पूछा पंडित जी ने क्या कहा ?
बाबूजी ने कहा उन्होंने कहा HEALTH IS WEALTH
अब बारी थी सूटकेस खोलने की ! सूटकेस खोल कर देखा
अंडे के छिलका वाला रुमाल जल गया था लेकिन ऑमलेट अभीभी गरम था और दरवाजा बंद कर सबने अंडा खाया और बाद में चाय पीया !
अब प्रष्न यह उठता है की मालबिया जी देर से क्यू आये ? और उनको गंध क्यू नहीं मिला ? बाबूजी को लगा पंडित जी को मालूम था की BHU में सारे भारत से लड़के पढ़ने आते है जिनका खाने पीने के संस्कार अलग अलग होते हैं जिसे सही तरीके से नियंत्रण करना चाहिए ! न की रूढ़िवादी तरीके से !
अप्रत्याशित मुलाकात दोस्तों पुराने ज़माने के बड़े अफसर टेक्नोलॉजी के अलावा प्रखर अडमिंस्ट्रेटर भी हुआ करते थे वह अधस्तन कर्मचारी के मनोबैज्ञानिक स्थति भी समझ ते थे ! ऐसी ही एक कहानी पढ़िए ! यह कहानी ८० के दशक की है, BALCO में एलुमिना प्लांट चालू हो चूका था स्मेल्टर की तैयारी हो रही थी ! Dr दत्ता को दो जियोलॉजिस्ट मिला एक कलकत्ता से और एक मध्य प्रदेश से ! पहले सज्जन को कलकत्ता टूर मिलने से बड़ी ख़ुशी मिलती थी !कलकत्ते का कोई भी काम हो सम्बंधित अफसर से रिक्वेस्ट कर कलकत्ता चल देते थे !यहाँ तक की ईस्टर्न साइड का कोई भी टूर हो वह जाने के लिए तैयार रहते थे !
इस कलकत्ता प्रेमी को लेकर डॉ दत्ता परेशां हो गए थे ! फिनेन्स के सम्बंधित लोग डाक्टर साहब से कहते इस आदमी को कलकत्ता ऑफिस में क्यू नहीं तबादला कर देते ? उस समय BALCO के GM डॉ टी बी सिंह हुआ करते थे और उनके चेम्बर में नया माइनिंग एरिया में खनन के बारे जोर डिस्कशन हो रहा था जब कुछ एक्सप्लोरेशन डाटा मांगे गए तो पताचला सम्बंधित जियोलॉजिस्ट टूर में है ! यह सुनकर डॉ सिंह नाराज हो गए ! इसके बाद डॉ दत्ता ने सेक्रेटरी को बुलाके कहा इस कलकत्ता प्रेमी जिओलॉजिस्ट का टूर बंद करता हूँ कोई भी अधिकारी इस ब्यक्ति का टूर का शिफारस नहीं करेगा और ४--६ महीने तक उसे कोई टूर नहीं मिला ! अब क्या था कलकत्ता प्रेमी की हालत जल बिन मछली जैसी हो गई,डिपार्टमेंट के हर सीनियर अधिकारियो से प्रार्थना करने पर भी कोई उसे घास नहीं डाला ! इधर दशहरा दिवाली का मौसम आगया और हर डिपार्टमेंट में आदमी की कमी हो गई और माइनिंग मैनेजर का रिक्वेस्ट आया की एक क्वालिटी के इंस्पेक्टर को लोहरदंगा रांची भेजिए BAUXITE खरीदना है ! डॉ दत्ता ने पूरा अटेंडेंस खाता देखा कोई भी आदमी खाली नहीं था बांकी सब छुट्टी में है ! हारकर डॉ ने कलकत्ता प्रेमी को बुलाया और कहा तुम जमशेदपुर होकर रांची जाओगे और न कि कलकत्ता होकर, और काम ख़तम कर जल्दी वापस आओगे यह मेरा आर्डर है ! कलकत्ता प्रेमी को जैसे हाथ में स्वर्ग मिला जैसे प्यासे को बिन मांगे
पानी ! वह एडवांस लेकर चला गया ! दुसरे दिन डॉ दत्ता को हेड ऑफिस से खबर आया कि दिल्ली में UNIDO टीम आचुकी है आप उनको साथ लेकर कलकत्ता जाइये और GSI के डयरेक्टर से मिलकर फुटका पहाड़ माइनिंग एरिया का पूरा एक्सप्लोरेशन रिपोर्ट दिखाइए ! तदनुसार डॉ दत्ता कलकत्ता पहुंचे ! संयोगबस डॉ दत्ता ग्रैंड होटल चौरंघी से टीम के साथ जैसे निकले तो देखा कलकत्ता प्रेमी जिओलॉजिस्ट अपना जूता पोलिश करा रहा था फुटपाथ में खड़ा होकर ! डॉ दत्ता उसके पास जाकर बोले राम बाबू तुम यहाँ कैसे तुम्हे मैंने मना किया था न कि कलकत्ता मत जाना तुमने मेरे आर्डर कि उपेक्षा कि है तुम्हे सजा मिलेगी ! उस आदमीने तुरंत कहा कौन राम बाबू मै तो रमेश हूँ मै तो आपको जानता तक नहीं ! कौन हैं आप ? आपका दिमाग ख़राब हो गया है क्या ? डॉ दत्ता इस सफ़ेद झूठ को पीकर बिदेशी लोंगो के साथ GSI जाकर BALCO का काम निपटाया और वापस आगये ! ऑफिस आकर डॉ दत्ता ने सेक्रेटरी से पूंछा कि राम बाबू रांची से वापस आगया है क्या ? सेक्रेटरी बोला यस सर वह वापस आगये है ! डॉ दत्ता ने सेक्रेटरी से कहा जाकर उससे कहो अभी TA बिल खुद आकर सबमिट करे ! राम बाबू का चेहरा देखतेही डॉ दत्ता समझ गए कि वह बहुत डरा हुआ है ! डॉ दत्ता ने राम बाबू से कहा ! सुनो तुम जिस कॉलेज के स्टूडेंट हो मै उसी कालेज का प्रिंसिपल रह चूका हूँ ! राम बाबू बोला सर मै कुछ समझा नहीं ? आप क्या कहना चाहते हैं ! अब डॉ दत्ता अपने अधिनायक के शैली में पेश आये और कठोरता से कहा राम बाबू तुम कलकत्ता क्यू गए थे सच बोलकर माफ़ी मानगो कि मै कारवाई कारु ! राम बाबू बोला मै कलकत्ता कैसे जा सकता हूँ जब आपने मना किया था ! डॉ दत्ता बोले बताता हूँ कैसे ! सेक्रेटरी से बोले जाओ भीजिलेन्स के साहू जी को बुलाकर लाओ जिसको मैंने इसके पीछे भेजा था ! डॉ दत्ता ने साहूजी को रिपोर्ट सौपने को कहा ! अब डॉ दत्ता ने सेक्रेटरी को कहा चेयरमैन को लिखिए थ्रू डॉ टी बी सिंह GM सर कंपनी के आदेश अनुसार मैंने राम बाबू के साथ भीजिलेन्स के अफसर को भेजा था और मै खुद कलकत्ता जाकर राम बाबू को कलकत्ते में रगे हाथ पकड़ा है ! यह आदमी सरकारी नौकरी करने के लिए विश्वसनीय नहीं है मै राम बाबू को आज और अभी ससपेंड करता हूँ और टर्मिनेशन का शिफारस करता हूँ ! इस डिक्टेशन को सुनते ही राम बाबू टूट गए और डॉ दत्ता का पैर पकड़ लिया और कहा सर मुझे माफ़ कर दीजिये ! डॉ दत्ता बोले राम बाबू मै तुमसे बार बार कह रहा था गुनाह कबूल कर लो, लेकिन तुम तो अड़े थे खैर मै तुम्हे माफ़ कर सकता हु अगर तुम एक घंटे के अंदर माफ़ी नामा लिख कर दो ! राम बाबू ने तुरंत माफ़ी नामा लिख कर दिया और डॉ साहब ने उसे माफ़ किया और चाय पिलाकर वापस भेजा ! बाद में सेक्रेटरी ने पूंछा सर साहूजी विजिलेन्स अफसर कैसे बन गए और वह राम बाबू के पीछे पीछे कब गए ? डॉ दत्ता बोले यह सब प्रशासनिक ट्रिक्स है !
डाकू सब पकडे गए और स्वरस्वती देबि को बीरनारी का ख़िताब और सन्मान मिला !
लेखक डॉ प्रदीप कुमार मैत्रा ३०/४/१८
एक सौरसेल कैसे काम करता है बिद्युत प्रचालन के संदर्भ में सामग्रियों तीन प्रकार के होते है कंडक्टर-- सामग्री का एक प्रकार है जो एक या अधिक दिशाओं में विद्युत प्रबहित कर सकता है जैसे कॉपर,एल्युमीनियम, इंसुलेटर--एक विद्युत इन्सुलेटर एक ऐसी सामग्री है जिसका आंतरिक विद्युत चार्ज स्वतंत्र रूप से बहता नहीं है; जैसे लकड़ी , कांच और अर्धचालक होते हैं। हम उपकरणों का निर्माण करने के लिए अर्धचालक का उपयोग कर रहे हैं क्योंकि इसके प्रवाह या लागू वोल्टेज के साथ वर्तमान वृद्धि। अर्धचालक को आचरण करने के लिए मुफ्त वाहक की आवश्यकता होती है ताकि वोल्टेज लागू होने पर वाहक आगे बढ़ने लगें और वर्तमान प्रवाह हो जाएं।एक सौरसेल दो प्रकार के अर्धचालक से बना होता है, जिसे पी-प्रकार और एन-प्रकार सिलिकॉन कहा जाता है। पी-प्रकार सिलिकॉन परमाणुओं को जोड़कर उत्पादित किया जाता है - जैसे बोरॉन या गैलियम- जिसमें सिलिकॉन की तुलना में उनके बाहरी ऊर्जा स्तर में एक कम इलेक्ट्रॉन होता है। चूंकि आसपास के सिलिकॉन परमाणुओं के साथ बॉन्ड बनाने के लिए बोरॉन के पास एक कम इलेक्ट्रॉन होता है, इसलिए इलेक्ट्रॉन रिक्ति या "छेद" बनाया जाता है।
अप्रत्याशित मुलाकात दोस्तों पुराने ज़माने के बड़े अफसर टेक्नोलॉजी के अलावा प्रखर अडमिंस्ट्रेटर भी हुआ करते थे वह अधस्तन कर्मचारी के मनोबैज्ञानिक स्थति भी समझ ते थे ! ऐसी ही एक कहानी पढ़िए ! यह कहानी ८० के दशक की है, BALCO में एलुमिना प्लांट चालू हो चूका था स्मेल्टर की तैयारी हो रही थी ! Dr दत्ता को दो जियोलॉजिस्ट मिला एक कलकत्ता से और एक मध्य प्रदेश से ! पहले सज्जन को कलकत्ता टूर मिलने से बड़ी ख़ुशी मिलती थी !कलकत्ते का कोई भी काम हो सम्बंधित अफसर से रिक्वेस्ट कर कलकत्ता चल देते थे !यहाँ तक की ईस्टर्न साइड का कोई भी टूर हो वह जाने के लिए तैयार रहते थे !
इस कलकत्ता प्रेमी को लेकर डॉ दत्ता परेशां हो गए थे ! फिनेन्स के सम्बंधित लोग डाक्टर साहब से कहते इस आदमी को कलकत्ता ऑफिस में क्यू नहीं तबादला कर देते ? उस समय BALCO के GM डॉ टी बी सिंह हुआ करते थे और उनके चेम्बर में नया माइनिंग एरिया में खनन के बारे जोर डिस्कशन हो रहा था जब कुछ एक्सप्लोरेशन डाटा मांगे गए तो पताचला सम्बंधित जियोलॉजिस्ट टूर में है ! यह सुनकर डॉ सिंह नाराज हो गए ! इसके बाद डॉ दत्ता ने सेक्रेटरी को बुलाके कहा इस कलकत्ता प्रेमी जिओलॉजिस्ट का टूर बंद करता हूँ कोई भी अधिकारी इस ब्यक्ति का टूर का शिफारस नहीं करेगा और ४--६ महीने तक उसे कोई टूर नहीं मिला ! अब क्या था कलकत्ता प्रेमी की हालत जल बिन मछली जैसी हो गई,डिपार्टमेंट के हर सीनियर अधिकारियो से प्रार्थना करने पर भी कोई उसे घास नहीं डाला ! इधर दशहरा दिवाली का मौसम आगया और हर डिपार्टमेंट में आदमी की कमी हो गई और माइनिंग मैनेजर का रिक्वेस्ट आया की एक क्वालिटी के इंस्पेक्टर को लोहरदंगा रांची भेजिए BAUXITE खरीदना है ! डॉ दत्ता ने पूरा अटेंडेंस खाता देखा कोई भी आदमी खाली नहीं था बांकी सब छुट्टी में है ! हारकर डॉ ने कलकत्ता प्रेमी को बुलाया और कहा तुम जमशेदपुर होकर रांची जाओगे और न कि कलकत्ता होकर, और काम ख़तम कर जल्दी वापस आओगे यह मेरा आर्डर है ! कलकत्ता प्रेमी को जैसे हाथ में स्वर्ग मिला जैसे प्यासे को बिन मांगे
पानी ! वह एडवांस लेकर चला गया ! दुसरे दिन डॉ दत्ता को हेड ऑफिस से खबर आया कि दिल्ली में UNIDO टीम आचुकी है आप उनको साथ लेकर कलकत्ता जाइये और GSI के डयरेक्टर से मिलकर फुटका पहाड़ माइनिंग एरिया का पूरा एक्सप्लोरेशन रिपोर्ट दिखाइए ! तदनुसार डॉ दत्ता कलकत्ता पहुंचे ! संयोगबस डॉ दत्ता ग्रैंड होटल चौरंघी से टीम के साथ जैसे निकले तो देखा कलकत्ता प्रेमी जिओलॉजिस्ट अपना जूता पोलिश करा रहा था फुटपाथ में खड़ा होकर ! डॉ दत्ता उसके पास जाकर बोले राम बाबू तुम यहाँ कैसे तुम्हे मैंने मना किया था न कि कलकत्ता मत जाना तुमने मेरे आर्डर कि उपेक्षा कि है तुम्हे सजा मिलेगी ! उस आदमीने तुरंत कहा कौन राम बाबू मै तो रमेश हूँ मै तो आपको जानता तक नहीं ! कौन हैं आप ? आपका दिमाग ख़राब हो गया है क्या ? डॉ दत्ता इस सफ़ेद झूठ को पीकर बिदेशी लोंगो के साथ GSI जाकर BALCO का काम निपटाया और वापस आगये ! ऑफिस आकर डॉ दत्ता ने सेक्रेटरी से पूंछा कि राम बाबू रांची से वापस आगया है क्या ? सेक्रेटरी बोला यस सर वह वापस आगये है ! डॉ दत्ता ने सेक्रेटरी से कहा जाकर उससे कहो अभी TA बिल खुद आकर सबमिट करे ! राम बाबू का चेहरा देखतेही डॉ दत्ता समझ गए कि वह बहुत डरा हुआ है ! डॉ दत्ता ने राम बाबू से कहा ! सुनो तुम जिस कॉलेज के स्टूडेंट हो मै उसी कालेज का प्रिंसिपल रह चूका हूँ ! राम बाबू बोला सर मै कुछ समझा नहीं ? आप क्या कहना चाहते हैं ! अब डॉ दत्ता अपने अधिनायक के शैली में पेश आये और कठोरता से कहा राम बाबू तुम कलकत्ता क्यू गए थे सच बोलकर माफ़ी मानगो कि मै कारवाई कारु ! राम बाबू बोला मै कलकत्ता कैसे जा सकता हूँ जब आपने मना किया था ! डॉ दत्ता बोले बताता हूँ कैसे ! सेक्रेटरी से बोले जाओ भीजिलेन्स के साहू जी को बुलाकर लाओ जिसको मैंने इसके पीछे भेजा था ! डॉ दत्ता ने साहूजी को रिपोर्ट सौपने को कहा ! अब डॉ दत्ता ने सेक्रेटरी को कहा चेयरमैन को लिखिए थ्रू डॉ टी बी सिंह GM सर कंपनी के आदेश अनुसार मैंने राम बाबू के साथ भीजिलेन्स के अफसर को भेजा था और मै खुद कलकत्ता जाकर राम बाबू को कलकत्ते में रगे हाथ पकड़ा है ! यह आदमी सरकारी नौकरी करने के लिए विश्वसनीय नहीं है मै राम बाबू को आज और अभी ससपेंड करता हूँ और टर्मिनेशन का शिफारस करता हूँ ! इस डिक्टेशन को सुनते ही राम बाबू टूट गए और डॉ दत्ता का पैर पकड़ लिया और कहा सर मुझे माफ़ कर दीजिये ! डॉ दत्ता बोले राम बाबू मै तुमसे बार बार कह रहा था गुनाह कबूल कर लो, लेकिन तुम तो अड़े थे खैर मै तुम्हे माफ़ कर सकता हु अगर तुम एक घंटे के अंदर माफ़ी नामा लिख कर दो ! राम बाबू ने तुरंत माफ़ी नामा लिख कर दिया और डॉ साहब ने उसे माफ़ किया और चाय पिलाकर वापस भेजा ! बाद में सेक्रेटरी ने पूंछा सर साहूजी विजिलेन्स अफसर कैसे बन गए और वह राम बाबू के पीछे पीछे कब गए ? डॉ दत्ता बोले यह सब प्रशासनिक ट्रिक्स है !
उपस्थित बुद्धि की कहानी
=============================
प्रस्ताबना ---बुद्धि (Intelligence) वह मानसिक शक्ति है जो वस्तुओं एवं तथ्यों को समझने, उनमें आपसी सम्बन्ध खोजने तथा तर्कपूर्ण ज्ञान प्राप्त करने में सहायक होती है। यह 'भावना' और अन्तःप्रज्ञा (Intuition/इंट्युसन) से अलग है। बुद्धि ही मनुष्य को नवीन परिस्थितियों को ठीक से समझने और उसके साथ अनुकूलित (adapt) होने में सहायता करती है। बुद्धि को 'सूचना के प्रसंस्करण की योग्यता' की तरह भी समझा जा सकता है।प्राचीन काल से ही बुद्धि ज्ञानात्मक क्रियाओं में चर्चा का विषय रहा है। कहा जाता है कि, बुद्धिर्यस्य बलं तस्य निर्बुद्धेस्तु कुतो बलम् ।
पश्य सिंहो मदोन्मत्तः शशकेन निपातितः ॥
जिसके पास बुद्धि है, उसके पास बल है । पर जिसके पास बुद्धि नहीं उसके पास बल कहाँ ? देखो, बलवान शेर को (चतुर) लोमडी ने कैसे मार डाला था ! बुद्धि के कारण ही मानव अन्य प्राणियों से श्रेष्ठ माना जाता है। मनोविज्ञान के क्षेत्र में भी बुद्धि चर्चा का विषय रहा है। हजारों वर्ष पूर्व से ही व्यक्तियों को बुद्धि के आधार पर अलग-अलग वर्गों में बांटा गया। कुछ व्यक्ति बुद्धिमान कहलाते हैं, कुछ कम बुद्धि के, कुछ मूढ बुद्धि के तो कुछ जड़ बुद्धि कहलाते हैं। परन्तु बुद्धि के स्वरूप को समझना बड़ा कठिन है।
दोस्तों उपस्थित बुद्धि या बुद्धि त्तपरता या Presence of mind या प्रत्युत्पन्नमतिस्व कह सकते हैं !यह उपस्थित बुद्धि उपरोक्त बुद्धि से भिन्न है!यह वह क़ाबलियत है जो मनुष्य में, किसी घटना या दुर्घटना के दौरान ही ब्यक्ति में प्रकट होता है ! और इस क़ाबलियत के वजह इंसान अचानक किसी संकट के चंगुल से मुक्ति पा सकता है !
दोस्तों एक बात आप को बता दूँ की उत्तर भारत की डकैती और पूर्बी भारत के डकैती में काफी फर्क होता है ! यहाँ डाकू लोग एक या दो होते है जो गांव वालो के घर में घुसते है तथा एक दो घर के बहार निगरानी रखते है ! यह डकैत लोग ज्यादातर कोलियरी के वर्कर होते है जो दिन में अपने हथियार के साथ खदान के अंदर छुपे रहते है !
दोस्तों उनदिनों मै ALUCOIN में काम करता था और आसनसोल में रहता था ! मेरा ससुराल रूपनारायणपुर नाम का एक छोटा सा क़स्बा में था जंहा मेरा दादा ससुर का मकान था ! जब मै ससुराल जाता था तब डकैती की कहानी सुनते थे वही एक कहानी आज मै आप लोंगो को सुनाता हूँ !
रूपनारायण पुर में एक जमींदार सूर्य नारायण हुआ करते थे ! जमींदारी प्रथा ख़तम होने के बाद उनका दबदबा कम हो गया था और चौकीदार लठैल भी नहीं रहे ! जमींदार के दो लड़के थे रघुबीर और समरबीर जमींदार ने अपने हबेली का दो हिस्सा बना दिया था दोनों लड़को के लिए ! जमींदार मरने से पहले रघुबीर की शादी लक्समी नाम की लड़की से और समारबीर की स्वरस्वती के साथ कर दी थी ! खेतीबारी से जो आमदनी होती थी उससे दोनों परिवार का गुजर बसर ठीक ठाक चल जाता था !
पिताजी के समय का बन्दूक एक एक दोनों भाई के पास था ! दशहरा दिवाली या फिर शादी ब्याह के समय में आसमान में गोली चलाकर जमींदारी की शान बरकरार रक्खा जाता था !कभी कभी दोनों भाई पुलिस ग्राउंड में जाकर चांदमारी में कुछ गोली खर्च करते थे ! यही वजह था की जमींदार के हबेली में कभी भी डाका नही पड़ा था ! बड़ा भाई रघुबीर एकदम निश्चिन्त था की उसके घर में डाका नहीं पड़ेगा इसलिए वह रात को बहुत ज्यादा एहतियात नहीं बरतता था ! एक दिन रात को डाकुलोग आसानी से रघुबीर के घर घुसा और बन्दूक की नोक पर कैश और ज्वेलरी लूट लिया और भागने लगा इतने में रघुबीर की पत्नी ने चिल्लाकर कहा तुम हमारे दूधवाले हो न मैने तुम्हारी आवाज़ पहचान लिया है ! यह सुनते ही डाकू लौटकर आया और दोनों को चाकू से मार दिया !
अब डाकू लोग समरबीर के घर में घुसने की कोशिश की लेकिन समरबीर का घर मजबूती से बंद था ! डाकुओने फिर एक खिड़की को तोड़कर आरी से छड़ काटना चालू किया ! रघुबीर ने बन्दूक से गोली चलना चाहा ! किन्तु स्वरस्वती ने इशारे से मना किया और समरबीर को छत के मुंडेर के नीचे छुपा दिया !और आँगन का दरवाज़ा खोल दिया ! डाकुलोग अंदर आके पूछा समारबीर कहा है ? स्वरस्वती ने आँगन के तरफ इशारा किया डाकुओने नगदी और गहना लूट लिया इतने में सबेरा हो रहा था डाकू भागने लगे तब स्वरस्वती ने बन्दूक लेजाकर पति को दिया और कहा अब पीछेसे मारो ! समरबीर ने गोली मार कर दो डाकू को गिरा दिया ! स्वरस्वती देबि की उपस्थित बुद्धि ने समरबीर की रक्षा की !
लेखक डॉ प्रदीप कुमार मैत्रा ३०/४/१८
एक सौरसेल कैसे काम करता है बिद्युत प्रचालन के संदर्भ में सामग्रियों तीन प्रकार के होते है कंडक्टर-- सामग्री का एक प्रकार है जो एक या अधिक दिशाओं में विद्युत प्रबहित कर सकता है जैसे कॉपर,एल्युमीनियम, इंसुलेटर--एक विद्युत इन्सुलेटर एक ऐसी सामग्री है जिसका आंतरिक विद्युत चार्ज स्वतंत्र रूप से बहता नहीं है; जैसे लकड़ी , कांच और अर्धचालक होते हैं। हम उपकरणों का निर्माण करने के लिए अर्धचालक का उपयोग कर रहे हैं क्योंकि इसके प्रवाह या लागू वोल्टेज के साथ वर्तमान वृद्धि। अर्धचालक को आचरण करने के लिए मुफ्त वाहक की आवश्यकता होती है ताकि वोल्टेज लागू होने पर वाहक आगे बढ़ने लगें और वर्तमान प्रवाह हो जाएं।एक सौरसेल दो प्रकार के अर्धचालक से बना होता है, जिसे पी-प्रकार और एन-प्रकार सिलिकॉन कहा जाता है। पी-प्रकार सिलिकॉन परमाणुओं को जोड़कर उत्पादित किया जाता है - जैसे बोरॉन या गैलियम- जिसमें सिलिकॉन की तुलना में उनके बाहरी ऊर्जा स्तर में एक कम इलेक्ट्रॉन होता है। चूंकि आसपास के सिलिकॉन परमाणुओं के साथ बॉन्ड बनाने के लिए बोरॉन के पास एक कम इलेक्ट्रॉन होता है, इसलिए इलेक्ट्रॉन रिक्ति या "छेद" बनाया जाता है।
No comments:
Post a Comment